Atiq ahmed biography: किस वजह से तांगा चलाने वाले का बेटा 'अतीक अहमद' बना माफिया? पढ़ें पूरी कुंडली
Atiq Ahmed murder: अतीक अहमद के बेटे अशद की एनकांउटर में मौत के दो दिन बाद अतीक अहमद और उसके भाई अशर की हत्या प्रयागराज में की दी गई। तांगा चलाने वाले का बेटा कैसे जुर्म की दुनिया में आया क्या थी वजह जानिए!

Atiq ahmed biography: प्रयागराज जिसका पुराना नाम इलाहाबाद हुआ करता था, उसी शहर में कभी जिस कुख्यात डॉन अतीक अहमद के नाम से भी लोग थर-थर कांपते थे, उसी शहर में आज कुछ हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया।
ये हत्या तब हुई जब 15 अप्रैल शनिवार अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ मेडिकल जांच के लिए प्रयागराज में ले जाए जा रहे थे। मीडिया के सवालों का जवाब जब अशरफ दे रहा था तभी पत्रकार बन कर पहुंचे कुछ हमलावरों ने पहले अतीक और फिर उसके क्राइम पॉर्टनर अशरफ को गोलियों से छलनी कर दिया।
जिस शहर में बना गैंगस्टर उसी की जमीन पर हत्या के बाद सो गया मौत की नींद
गैंगस्टर से नेता बना अतीक अहमद जो सालों से गुजरात की साबरमती जेल में बंद तो था लेकिन उसका गैंग बादस्तूर जारी था। जो अतीक के बाद उसके बेटे और गु्र्गे संभाल रहे थे। अतीक अहमद का शव गोलियां खाने के बाद प्रयागराज की जिस मिट्टी में धूल चाट रहा था उसी प्रयागराज में उसने और उसके गैंग ने ना जाने कितने लोगों को मौत के घाट उतारा था।
आइए जानते हैं कि अतीक अहमद सालों पहले कैसे कम उम्र में इस जुर्म की दुनिया में एंट्री की? और कौन था वो शख्स जिसकी बजह से अतीक अहमद माफिया डॉन बना?
अतीक अहमद के पिता चलाते थे तांगा
10 अगस्त 1962 को प्रयागराज के चकिया गांव में तांगा चलाने वाले फिरोज अहमद के घर में जन्में अतीक अहमद जब 10 वीं कक्षा में था पढ़ाई में मन नहीं लगता था इसलिए फेल हो गया। जिस कारण फेल होने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी।
जल्द अमीर बनने के चक्कर में अपनाया ये शार्टकट
इसके बाद उसका बुरी संगत का साथ हो गया जल्द पैसे कमाने के लिए उसने शार्टकट लेते हुए रंगदारी और अपहरण कर पैसा वसूलने का काम शुरू कर दिया। ऐसे उसने जुर्म की राह पकड़ी और सालों तक जिसके नाम से भी लोग थर-थर कांपते थे, उसके जेल जाते ही उसकी माफियागिरी खत्म हो गई और शनिवार को वो हत्या के बाद वो मिट्टी में हमेशा के लिए दफन हो जाएगा।
किस माफिया की वजह से बना बड़ा गैंगस्टर
जिस समय अतीक ने क्राइम की दुनिया में कदम रखा उस समय शहर में चांद बाबा नाम के माफिया का सिक्का चलता था उसका दबदबा था। उसका इतना खौफ था कि पुलिस रानीमंडी और चौक में पैर रखने से भी घबराती थी।
पुलिस और राजनीति के धुरंधर तक चांद बाबा से छुटकारा चाहते थे। अतीक ने अपने शातिर दिमाग से पुलिस और नेताओं के इसी डर का लाभ उठाकर प्रयागराज के लोकल नेताओं से अपनी सेटिंग कर ली।
अतीक जो अपराध करता था इसके लिए उसे पुलिस और लोकल नेताओं का साथ मिला। महज सात साल के अंदर अतीक अहमद इलाहाबाद के चांद बाबा से भी दंबग और शातिर गैंगस्टर बन गया।
अतीक अहमद के अपराध के बढ़ते ग्राफ से तंग आकर पुलिस ने किया अरेस्ट
अतीक अहमद का गैंग बढ़ता गया और अपहरण, लूट और हत्या जैसे अपराध में शामिल हो गया । एक समय ऐसा आया जब कभी अतीक का सहयोग करने वाली पुलिए भी इसके बढ़ते अपराध से तंग आकर उसे तलाश कर अरेस्ट कर लिया था।
इनकी मदद से जेल से आया बाहर
उस समय जब वीर बहादुर सिंह की सरकार थी और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तब अतीक अहमद की इतनी पहुंच वाला बन गया था कि उसे जेल से छुड़ाने के लिए दिल्ली से फोन आय गया और महज एक साल बाद वो जेल से स्वतंत्र हो गया।
अतीक अहमद के क्राइम का कच्चा चिट्ठा
- वर्ष 1979 में अतीक अहमद के ऊपर पहला हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ।
- वर्ष 1989 तक अतीक अहमद का इलाहाबाद के पश्चिमी हिस्से पर दबदबा हो गया।
- लेकिन इस साल तक उसके खिलाफ 20 मुकदमें दर्ज हो थे।
जेल जानेंं से बचने के लिए बन गया गैंगस्टर से नेता
जेल जाने से बचने के लिए 1989 में उसने निर्दलीय चुनाव लड़ा और उसके खिलाफ चांद बाबा हराने के लिए खड़े हो गए लेकिन अतीक अहमद पहली बात जीत कर विधायक बनकर गैंगस्टर से नेता बन गया।
चांद बाबा का मर्डर करके भी बच गया
विधायक बनने के बाद रोशनबाग में चाय की टपरी पर जब अतीक बैठा था तभी चांद बाबा के गैंग के साथ गैंगवार हुई जिसमें चांद बाबा ढ़ेर हो गया यानी मारा गया। इस गैंगवार में पूरा बाजार गोलियों, बम और बारूद से बिछ गया था।
इस घटना के बाद चंद महीनों में प्रमुख दुश्मन चांद बाबा की गुंडे मार दिया और कुछ भाग गए और चांद की हत्या हो गई जिसका आरोप अतीक अहमद पर लगा लेकिन ऊंची पहुंच और विधायक होने के कारण इस केस में दोषी साबित नहीं हुआ।
पांच बार विधायक रहा अतीक अहमद
- 1991 में UP में राम मंदिर की लहर थी तब भी निर्दलीय उम्मीदवार बन कर चुनाव जीता
- 1996 में उसी इलाहाबाद शहर पश्चिमी सीट से विधायक बना
- 2002 में विधानसभा चुनाव में अतीक अहमद सपा के खिलाफ अपना दल के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीतकर पांचवी बार विधायक बना
सपा का सांसद भी बना
5 बार विधायक रह चुके अतीक अहमद पर मुलायम सिंह ने समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने भरोसा जताते हुए यूपी की फूलपुर लोकसभा सीपर बसपा के खिलाफ लड़ाया और अतीक सांसद बन गया। सांसद बनते ही इलाहाबाद की पश्चिमी सीट खाली हो गई। 6 महीने बाद उपचुनाव की तारीख का ऐलान हुआ और वो भी अतीक अहमद जीत गया।
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