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Aparna Yadav Divorce: अपर्णा यादव की BJP से होगी छुट्टी? 'तलाक' से लेकर KGMU तक, वो 5 कांड जिसने कराई किरकिरी

Aparna Yadav vs Prateek Yadav Controversy: मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू और भाजपा नेता अपर्णा यादव इन दिनों अपने राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रही हैं। पति प्रतीक यादव द्वारा सोशल मीडिया पर उन्हें 'स्वार्थी' बताते हुए तलाक की घोषणा ने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है।

भाजपा में शामिल होने के बाद से ही अपर्णा का सफर विवादों और महत्वाकांक्षाओं से भरा रहा है। टिकट की दावेदारी से लेकर आधिकारिक पद पर नाराजगी और हालिया हंगामों ने पार्टी नेतृत्व को असहज कर दिया है। क्या इन बढ़ते विवादों के बीच भाजपा अब अपर्णा से पल्ला झाड़ने की तैयारी में है?

Aparna Yadav Divorce BJP Exit

Aparna Yadav BJP Exit: टिकट की अंतहीन चाहत और सियासी दबाव

2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल होने वाली अपर्णा यादव की शुरुआत ही टिकट की मांग से हुई थी। लखनऊ की सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ने की उनकी इच्छा पूरी नहीं हुई, तो उन्होंने पार्टी की 'समर्पित कार्यकर्ता' होने का दावा किया। हालांकि, यह समर्पण जल्द ही दबाव में बदल गया जब उन्होंने मैनपुरी उपचुनाव और फिर 2024 लोकसभा चुनाव में भी टिकट के लिए दिल्ली से लेकर लखनऊ तक जबरदस्त पैरवी की, जिससे पार्टी के भीतर अनुशासन पर सवाल उठे।

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पद की गरिमा बनाम व्यक्तिगत नाराजगी

भाजपा ने ढाई साल के इंतजार के बाद जब सितंबर 2024 में अपर्णा को राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष बनाया, तो उन्होंने इसे अपनी कद के मुताबिक छोटा माना। पदभार संभालने में देरी कर उन्होंने सीधे तौर पर सरकार की नियुक्ति को चुनौती दी। किसी राजनीतिक कार्यकर्ता द्वारा सरकार द्वारा दिए गए सम्मानजनक संवैधानिक पद को इस तरह नजरअंदाज करना भाजपा जैसे कैडर-आधारित दल के लिए एक असहज और फजीहत भरी स्थिति बन गई।

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Aparna Yadav KGMU Controversy: पार्टी की साख पर प्रशासनिक बट्टा

हाल ही में केजीएमयू धर्मांतरण विवाद के दौरान अपर्णा यादव का व्यवहार भाजपा के लिए सबसे बड़ी किरकिरी का कारण बना। बिना किसी पूर्व सूचना के समर्थकों के साथ वीसी चैंबर में घुसकर हंगामा करना और प्रशासन के साथ तीखी बहस ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। इस घटना ने विपक्ष को यह कहने का मौका दे दिया कि भाजपा के अपने ही नेता संस्थानों का सम्मान नहीं कर रहे हैं, जिससे पार्टी की छवि को गहरा नुकसान पहुंचा।

प्रतीक यादव का 'तलाक' पोस्ट और गहराता संकट

राजनीतिक विवादों के बीच प्रतीक यादव के 'तलाक' वाले पोस्ट ने आग में घी का काम किया है। पति द्वारा सार्वजनिक रूप से उन्हें 'स्वार्थी' और 'मशहूर होने की शौकीन' बताना अपर्णा की व्यक्तिगत विश्वसनीयता पर हमला है। भाजपा नेतृत्व हमेशा परिवार और संस्कारों की राजनीति की बात करता है, ऐसे में अपर्णा के पारिवारिक विवाद का सड़क पर आना पार्टी के लिए अब एक बड़ा सिरदर्द बन चुका है, जिससे उनकी विदाई के कयास तेज हो गए हैं।

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