केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना, बोले- आर्थिक संकट का बोझ सिर्फ मिडिल क्लास पर क्यों?
आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवलाल ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा लोगों से विदेश यात्रा कम करने, विदेशी सामान न खरीदने, पेट्रोल-डीजल की बचत करने और वर्क फ्रॉम होम अपनाने जैसी अपीलें इस बात का संकेत हैं कि देश की अर्थव्यवस्था गहरे संकट से गुजर रही है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार का पूरा बोझ केवल मिडिल क्लास पर डाला जा रहा है, जबकि सरकार, मंत्री, अफसर और उद्योगपति खुद किसी तरह की कटौती नहीं कर रहे हैं।

"सिर्फ मिडिल क्लास पर क्यों डाली जा रही कुर्बानी"
दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देशवासियों से सात बड़े कदम उठाने की अपील की है। इनमें वर्क फ्रॉम होम, सोना कम खरीदना, पेट्रोल-डीजल की बचत करना, सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल, विदेशी उत्पादों से दूरी, खाने के तेल का सीमित उपयोग और विदेश यात्रा बंद करने जैसी बातें शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश ने कई संकट देखे हैं, युद्ध और आर्थिक मंदी भी झेली है, लेकिन किसी प्रधानमंत्री ने इस तरह की व्यापक और कठोर अपील पहले कभी नहीं की। केजरीवाल ने कहा कि इससे देशवासियों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर देश की आर्थिक स्थिति कितनी खराब हो चुकी है।
"देशवासियों को आर्थिक स्थिति की पूरी जानकारी दी जाए"
केजरीवाल ने प्रधानमंत्री से मांग की कि देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति और आने वाले महीनों में संभावित हालात की पूरी जानकारी जनता के सामने रखी जाए। उन्होंने कहा कि केवल निर्देश देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार को पारदर्शिता दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार स्पष्ट जानकारी साझा नहीं करती है तो अफवाहों का बाजार गर्म होता है और इससे अर्थव्यवस्था में लोगों का भरोसा कमजोर पड़ता है।
"ईरान-अमेरिका तनाव का हवाला, लेकिन सिर्फ भारत में इतनी सख्ती क्यों?"
AAP संयोजक ने कहा कि सरकार आर्थिक संकट के पीछे ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव को वजह बता रही है, लेकिन दुनिया के अन्य देशों ने अपने नागरिकों से इस तरह की कठोर अपील नहीं की है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पूरी दुनिया इस संकट से प्रभावित है तो आखिर भारत में ही इतनी बड़ी पाबंदियों जैसी अपील क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे लोगों के मन में आशंका पैदा हो रही है कि कहीं देश की आर्थिक स्थिति बताई जा रही स्थिति से ज्यादा खराब तो नहीं है।
"सरकार, मंत्री और उद्योगपति भी करें खर्चों में कटौती"
केजरीवाल ने कहा कि सरकार सबसे पहले अपने खर्चों में कटौती करे। इसके बाद प्रधानमंत्री, मंत्री और अफसर भी अपनी सुविधाओं और खर्चों को कम करें। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अब तक अपने किसी खर्च में कमी नहीं की, जबकि आम लोगों से त्याग की अपेक्षा की जा रही है।
उन्होंने कहा कि देश के बड़े उद्योगपतियों और अरबपतियों से भी अपील की जानी चाहिए थी कि वे अपने खर्चों में कटौती करें और देशहित में योगदान दें। लेकिन सरकार ने सिर्फ मिडिल क्लास से ही कुर्बानी मांगने का रास्ता चुना है।
"मिडिल क्लास को सिर्फ उसी को निशाना न बनाया जाए"
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मिडिल क्लास हमेशा देश के लिए खड़ा रहा है और जरूरत पड़ने पर हर तरह की कुर्बानी देने को तैयार है। लेकिन सवाल यह है कि केवल मिडिल क्लास से ही त्याग की अपेक्षा क्यों की जा रही है।
उन्होंने कहा कि देश सबका है, इसलिए आर्थिक संकट का बोझ भी सभी को समान रूप से उठाना चाहिए। साथ ही सरकार को देशवासियों के साथ पूरी सच्चाई साझा करनी चाहिए, ताकि लोग हालात को समझकर जिम्मेदारी निभा सकें।













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