CM विजय ने ज्योतिष गुरु को बनाया OSD, जानिए राधन पंडित की हिस्ट्री, इनकी सलाह के बिना कुछ नहीं करते हैं थलपति
Radhan Pandit Vetrive (Vijay Appoints Astrologer His OSD): तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों एक नई और अनोखी चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार से राजनेता बने और अब मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने वाले विजय ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। विजय ने अपने निजी ज्योतिषी राधन पंडित वेट्रिवेल (Radhan Pandit Vettrivel) को मुख्यमंत्री का विशेष कार्याधिकारी यानी OSD (Officer on Special Duty) नियुक्त किया है।
इस नियुक्ति के बाद जहां एक तरफ विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्रि कड़गम' (TVK) के समर्थक इसे 'शुभ संकेत' मान रहे हैं, वहीं सहयोगी दल कांग्रेस के खेमे में भौहें तनी हुई हैं। यह फैसला सिर्फ प्रशासनिक नियुक्ति नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे विजय की राजनीति और आस्था के गहरे रिश्ते के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि यही वही ज्योतिषी हैं जिन्होंने चुनाव से काफी पहले विजय की कुंडली देखकर कहा था कि उनकी राजनीति में "सुनामी जैसी ताकत" है।

अब विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद राधन पंडित वेट्रिवेल की राजनीतिक ताकत भी अचानक बढ़ती दिख रही है। ऐसे में आइए जानें कौन है ये राधन पंडित, जिसकी सलाह के बिना विजय अपना एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाते? आइए जानते हैं इस हाई-प्रोफाइल ज्योतिषीय और राजनीतिक गठबंधन की पूरी कहानी।
▶️कौन हैं राधन पंडित वेट्रिवेल? (Who Is Radhan Pandit Vetrivel)
राधन पंडित वेट्रिवेल मूल रूप से तमिलनाडु के इरोड के रहने वाले हैं। उनका असली नाम वेट्रिवेल था। पिछले करीब चार दशकों से वह ज्योतिष और अंक ज्योतिष के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
तमिलनाडु की राजनीति में उनका नाम नया नहीं है। राज्य के कई बड़े नेताओं के साथ उनके संबंधों की चर्चा लंबे समय से होती रही है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता (J. Jayalalithaa) भी उनसे सलाह लिया करती थीं। हालांकि बाद में दोनों के रिश्तों में दूरी आ गई।

▶️जयललिता से क्यों बिगड़ गए रिश्ते?
बताया जाता है कि आय से अधिक संपत्ति मामले में वेट्रिवेल ने जयललिता को भरोसा दिलाया था कि उन्हें जेल नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन सितंबर 2014 में अदालत के फैसले के बाद जयललिता को जेल जाना पड़ा।
इसके बाद दोनों के रिश्तों में दरार आ गई और जयललिता ने उनसे दूरी बना ली। करीबी सूत्रों के अनुसार इसी विवाद के बाद वेट्रिवेल तमिलनाडु छोड़कर कुछ समय के लिए सिंगापुर चले गए।
▶️दिल्ली पहुंचकर बदला नाम और पहचान
सिंगापुर और बाद में दिल्ली जाने के बाद वेट्रिवेल ने खुद को नए तरीके से पेश करना शुरू किया। उन्होंने अपना नाम बदलकर "राधन पंडित वेट्रिवेल" कर लिया। माना जाता है कि यह बदलाव सिर्फ पहचान बदलने के लिए नहीं, बल्कि उत्तर भारत और बड़े राजनीतिक दायरों में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए भी किया गया था। दिल्ली में रहते हुए उन्होंने कथित तौर पर भाजपा और कांग्रेस से जुड़े कई नेताओं तक अपनी पहुंच बनाई। सोशल मीडिया पर भी वह ज्योतिषीय सलाह देने लगे।
▶️जब 'सुनामी' के डर से बदली गई शपथ की टाइमिंग
विजय की मुख्यमंत्री बनने तक की राह आसान नहीं थी। राज्यपाल द्वारा बार-बार दावों को खारिज किए जाने के बाद जब आखिरकार उन्हें सरकार बनाने का मौका मिला, तो पूरी दुनिया की नजरें उनके शपथ ग्रहण पर थीं। शुरुआत में 10 मई को दोपहर 3:45 बजे का समय तय किया गया था। लेकिन, तभी एंट्री हुई राधन पंडित वेट्रिवेल की।
पंडित वेट्रिवेल ने विजय की कुंडली का हवाला देते हुए बताया कि दोपहर का समय ठीक नहीं है। उन्होंने एक 'अति शुभ मुहूर्त' निकाला और शपथ ग्रहण को सुबह 10 बजे करवा दिया। पंडित का दावा था कि विजय की कुंडली में 'सुनामी' जैसी ताकत है और अगर सही समय पर कदम उठाए गए, तो उन्हें कोई नहीं रोक सकता। विजय ने उनकी बात मानी और आज पंडित जी खुद मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में एक आधिकारिक पद पर बैठ चुके हैं।
▶️विजय की पार्टी में पंडित जी का 'न्यूमरोलॉजी' कनेक्शन
विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्रि कड़गम' (TVK) के नाम से लेकर इसके लोगो (Logo) के लॉन्च होने तक, हर चीज के पीछे राधन पंडित का दिमाग रहा है।
🔹'V' अक्षर का जादू: पंडित ने ही विजय को सलाह दी थी कि वे ऐसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ें जिसका नाम 'V' अक्षर से शुरू होता हो।
🔹पार्टी का नाम: टीवीके (TVK) के नाम के अक्षरों का चयन न्यूमरोलॉजी (अंक ज्योतिष) के हिसाब से किया गया ताकि पार्टी को 'मैजिक नंबर' मिल सके।
🔹एग्जिट पोल और भविष्यवाणी: जब बड़े-बड़े पोलस्टर्स विजय की जीत को लेकर संशय में थे, तब वेट्रिवेल ने यूट्यूब इंटरव्यूज में पहले ही दावा कर दिया था कि विजय की जीत पक्की है। चुनाव में टीवीके ने 234 में से 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया।
▶️OSD नियुक्ति पर क्यों उठ रहे सवाल?
राधन पंडित वेट्रिवेल को मुख्यमंत्री का OSD बनाए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। आलोचकों का कहना है कि किसी ज्योतिषी को सीधे सत्ता के भीतर आधिकारिक भूमिका देना असामान्य कदम है। वहीं विजय समर्थकों का कहना है कि यह उनका निजी भरोसा और राजनीतिक टीम का हिस्सा है।
तमिलनाडु की राजनीति में नेताओं द्वारा निजी तौर पर ज्योतिषियों से सलाह लेना नई बात नहीं है, लेकिन किसी ज्योतिषी को सरकारी ढांचे में इतनी औपचारिक भूमिका मिलना दुर्लभ माना जा रहा है।
▶️क्या वाकई असरदार है वेट्रिवेल का दांव?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय के लिए वेट्रिवेल सिर्फ एक ज्योतिषी नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक सहारा भी हैं। एक फिल्मी बैकग्राउंड से आने वाले नेता के लिए राजनीति के ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर आत्मविश्वास बनाए रखना जरूरी होता है। वेट्रिवेल की भविष्यवाणियों ने विजय के समर्थकों के बीच यह संदेश दिया कि "विजय का उदय दैवीय है"।
हालांकि, प्रशासन में उनकी नियुक्ति एक जोखिम भरा कदम हो सकती है। यदि भविष्य में कोई बड़ा फैसला गलत होता है, तो विपक्ष इसका सारा ठीकरा 'ज्योतिष आधारित शासन' पर फोड़ने में देर नहीं लगाएगा। फिलहाल तो तमिलनाडु में 'सितारों की चाल' और 'सरकार की चाल' एक ही लय में चलती दिख रही है।














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