शाही मस्जिद केस में इलाहाबाद HC ने फैसला रिजर्व किया, हिंदू पक्ष ने सनातन धर्म के चिह्न मिलने का किया था दावा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा, उत्तर प्रदेश के कृष्ण जन्मभूमि मंदिर परिसर से सटे शाही ईदगाह मस्जिद में कोर्ट कमिश्नर से सर्वे कराए जाने को लेकर फैसला सुरक्षित रख लिया है। हाईकोर्ट ने 14 दिसंबर को हुई पिछली सुनवाई पर श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से दाखिल अर्जी मंजूर कर ली थी।
मामले की सुनवाई जस्टिस मयंक कुमार जैन की सिंगल बेंच ने की। सुनवाई के दौरान एडवोकेट कमिश्नरों की तीन सदस्यीय टीम द्वारा सर्वे के स्वरूप को लेकर निर्णय नहीं लिया जा सका। मुस्लिम याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि कृष्ण जन्मभूमि मामले में उनकी याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

इसके बाद हाई कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रखने का फैसला किया। इस बीच, सीलबंद लिफाफे में एक एएसआई रिपोर्ट उच्च न्यायालय को सौंपी गई। 21 दिसंबर को याचिकाकर्ताओं को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी के साथ ASI रिपोर्ट की कॉपी भी दी जाएगी।
कुछ समय पहले हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि शाही मस्जिद ईदगाह में सनातन धर्म के चिह्न है। साल 1953 के दौरान ईदगाह के पास हुई खुदाई की कुछ तस्वीरें सामने आई थी। खुदाई के दौरान कई ग्रह-विग्रह भी मिले थे। फिलहाल कुछ तस्वीरें सामने आई है और हिंदू पक्ष उन तस्वीरों को लेकर ये दावा कर रहा है कि यह सभी तस्वीरें शाही ईदगाह के अंदर की है। मस्जिद की दीवारों पर ओम और कमल के निशान होने का दावा किया जा रहा है।
श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से हाईकोर्ट में ऑर्डर 26 रूल 9 में अर्जी दाखिल की गई थी। एडवोकेट कमिश्नर से सर्वे कराए जाने की मांग अर्जी में की गई थी। अर्जी पर सुनवाई के बाद जस्टिस मयंक कुमार जैन ने 16 नवंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। हाईकोर्ट में अर्जी पर श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने पक्ष रखा था।
मथुरा विवाद से जुड़ी सभी 18 याचिकाओं पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई की जा रही है। अयोध्या जन्मभूमि विवाद की तर्ज पर मथुरा विवाद का इलाहाबाद हाईकोर्ट में ही ट्रायल चल रहा है। हिंदू पक्ष की ओर से शाही ईदगाह परिसर के सर्वेक्षण के लिए अदालत की निगरानी में एक एडवोकेट कमिश्नर को नियुक्त करने की मांग की गई थी। इसे हाईकोर्ट ने मान लिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें कृष्ण जन्मभूमि मंदिर परिसर के बगल में शाही ईदगाह मस्जिद के प्राथमिक सर्वेक्षण की अनुमति दी गई थी।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अदालत की निगरानी में अधिवक्ता आयुक्तों की तीन सदस्यीय टीम द्वारा ईदगाह परिसर के प्राथमिक सर्वेक्षण की अनुमति दी थी। ईदगाह परिसर के संबंध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष एक दर्जन से अधिक याचिकाएं लंबित हैं, जिसमें हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद का निर्माण मुगल सम्राट औरंगजेब ने भगवान कृष्ण के जन्मस्थान के 13.37 एकड़ जमीन पर एक मंदिर को ध्वस्त करके किया था।












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