सभी नेता अपनी विधानसभा में लगा रहे जोर, जानिए लखनऊ में बैठी ब्यूरोक्रेसी किसकी बनवा रही सरकार ?
लखनऊ, 5 मार्च: उत्तर प्रदेश में अंतिम चरण के चुनाव प्रचार का शोर आज समाप्त हो जाएगा। एक तरफ जहां सभी दल और नेता अंतिम चरण में ताकत झोंके हुए हैं वहीं दूसरी ओर नौकरशाही भी अब नई सरकार को लेकर सक्रिय हो गई है। कहा जाता है कि नौकरशाही को समय से पता चल जाता है कि सरकार किसकी आ रही है। इसके संकेत मिलने लगते हैं। कुछ ऐसी ही अटकलें आने वाली नई सरकार को लेकर लगाई जा रही है। इस बीच सपा-बीजेपी दोनों तरफ से दावे किए जा रहे हैं कि उनकी पूर्ण बहुमत की सरकार बन रही है। हालांकि ये तो EVM मशीनों की गिनती के बाद पता चलेगा लेकिन हर जगह नई सरकार को लेकर उत्सुकता जरूर दिखायी दे रही है।

नई सरकार को लेकर ब्यूरोक्रेसी में क्यों मची हलचल
यूपी में लगभग एक सप्ताह बात नई सरकार आ जाएगी। इस बात को ऐलान हो जाएगा कि सरकार किसकी बन रही है। लेकिन यूपी की ब्यूरोक्रेसी अभी से सक्रिय नजर आ रही है। कभी अयोध्या में नेम प्लेट का रंग बदला जा रहा है तो इसे सत्ता के बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं लखनऊ में कई बड़े अधिकारी अखिलेश के सम्पर्क में बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि अब नई सरकार में अपनी सेटिंग को लेकर ये सरकार बेचैन हैं। लिहाजा अखिलेश के चहेते अधिकारी रहे पूर्व आईएएस आलोक रंजन के यहां अफसरों की काफी भीड़ देखी जा रही है। हालांकि बहुत सारे अधिकारी ऐसे भी हैं जो ये भी कह रहे हैं कि सत्ता का रुझान अभी किसी की तरफ नहीं है लिहाजा यह कहना कि किसकी सरकार आ रही है अभी गलत होगा।

मुख्तार के बेटे पर क्यों गिरी चुनाव आयोग की गाज
पूर्वांचल के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी तो जेल में हैं लेकिन उनके बेटे अब्बास अंसारी अब उन्हीं के नक्शे कदम पर चलते हुए दिखायी दे रहे हैं। अब्बास मऊ सदर से इस बार चुनाव लड़ रहे हैं। शुक्रवार को उनका एक विवादित वीडिया तेजी से वायरल हुआ जिसमें वह अधिकारियों से हिसाब किताब करने की बात कह रहे हैं। जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ चुनाव आयोग ने उनके प्रचार पर प्रतिबंध लगा दिया। हालांकि सूत्रों की माने तो अब्बास के इस वीडिया का नुकसान अखिलेश को ही झेलना पड़ेगा। वीडियो में एक पक्ष का ध्रुवीकरण होने का अंदाजा लगाया जा रहा है। ऐसा हुआ तो इसका असर पूर्वांचल की कई सीटों पर साफतौर पर दिखायी देगा।

गाजीपुर में मंदिर मंदिर जाकर क्यों मत्था टेक रहे राज्यपाल मनोज सिन्हा
पूर्वांचल के कद्दावर बीजेपी नेता रहे और वर्तमान में जम्मू कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा इस समय गाजीपुर में डेरा डाले हुए हैं। बताया जा रहा है कि वह गाजीपुर की कई विधानसभाओं में जा रहे हैं लेकिन प्रचार की बजाए मंदिर में दर्शन पूजन करते नजर आ रहे हैं। यह भी सियासत का ही एक रंग है जिसके सहारे हर नेता आगे बढ़ना चाहता है। गाजीपुर में कई सीटों मनोज सिन्हा के कहने पर ही दी गई हैं लिहाजा अब मनोज सिन्हा ने अपने नजदीकीयों से संपर्क करने का ये नया तरीका इजाद किया है जिसका जिक्र उनके विरोधी भी कर रहे हैं। हालांकि कोई यह खुलकर नहीं कह रहा है कि वह बीजेपी का प्रचार कर रहे हैं।

सीटों को लेकर क्यों हैं बीजेपी और सपा के दावे
यूपी में दस मार्च को मतगणना होनी है लेकिन सभी सपा और बीजेपी ने अभी से सीटों को लेकर दावे शुरू कर दिए हैं। सपा के एक नेता का दावा है कि उनकी पार्टी ने एक अंदरूनी सर्वे कराया है जिसके तहत सपा यूपी में 251 सीटें जीतने जा रही है यानी सपा और उनके गठबंधन को इस चुनाव में बहुमत मिल जाएगा लेकिन बीजेपी भी अपने दावे कर रही है। बीजेपी के नेता हमेशा से ही 300 प्लस का नारा दे रहे हैं लेकिन चुनाव समाप्त होते होते वह 240 से 275 के बीच आ गया है। कहने का अर्थ यह है कि सबके अपने अपने दावे हैं लेकिन इन दावों की सच्चाई तो दस मार्च को ही पता चलेगी।












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