पति की हत्या कर बाथरूम में दफनाने वाली रूबी कौन? दृश्यम की तरह 45 दिम घुमाती रही, कबूलनामे से पुलिस भी दंग!
Agra Wife Ruby killed Husband: फिल्म 'दृश्यम' का वो डायलॉग तो आपको याद ही होगा कि लाश को ऐसी जगह छिपाओ जहां कोई सोच भी न सके। उत्तर प्रदेश के आगरा से एक ऐसा ही रूह कंपा देने वाला असली मामला सामने आया है, जिसने रील लाइफ के उस सस्पेंस को भी पीछे छोड़ दिया है। एक पत्नी रूबी शर्मा ने अपने ही पति 44 वर्षीय सुरेंद्र कुमार शर्मा की जान ली, लाश को कहीं दूर फेंकने के बजाय अपने ही घर के बाथरूम में गड्ढा खोदकर दफन कर दिया और ऊपर से नया पक्का फर्श बनवा दिया।
हैरानी की बात यह है कि वारदात के बाद वह शातिर महिला लगभग डेढ़ महीने (45 दिन) तक उसी बाथरूम को हर रोज इस्तेमाल करती रही, वहीं नहाती रही और बाहर आकर पुलिस के सामने अपने पति की गुमशुदगी पर घड़ियाली आंसू बहाती रही। जब पानी सिर से ऊपर चला गया और जेठ की एक चाल के आगे आरोपी पत्नी टूट गई, तब जाकर इस खौफनाक सच से पर्दा उठा। पुलिस ने जब खुदाई की तो नीचे का नजारा देखकर खुद अधिकारियों के पैर कांप गए। आइए जानें इस मर्डर प्लान की पूरी इनसाइड स्टोरी।

खीर में घोलीं 18 गोलियां और खत्म कर दिया सुरेंद्र कुमार शर्मा का खेल, कौन है कातिल पत्नी रूबी?
यह पूरी खौफनाक दास्तान राजस्थान के भरतपुर के रहने वाले 44 वर्षीय सुरेंद्र कुमार शर्मा की है। सुरेंद्र आगरा के सिकंदरा इलाके में स्थित रेणुका धाम कॉलोनी में अपनी पत्नी रूबी, दो बेटियों (13 साल की रिद्धि और 9 साल की सिद्धि) और बुजुर्ग मां कमला के साथ रहते थे। सुरेंद्र की शादी साल 2010 में इटावा की रहने वाली रूबी से हुई थी। बाहर से सामान्य दिखने वाले इस परिवार के भीतर घरेलू कलह का एक ज्वालामुखी धधक रहा था।
रूबी का कहना है कि सुरेंद्र को शराब की बेहद बुरी लत थी और वह कोई काम-धंधा नहीं करता था। घर का खर्च सुरेंद्र की मां को मिलने वाली पेंशन के भरोसे चल रहा था। रूबी ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया कि सुरेंद्र रोज रात को शराब के नशे में धुत होकर आता था और उसके साथ बेरहमी से मारपीट करता था।
इस रोज-रोज के टॉर्चर से तंग आकर रूबी ने सुरेंद्र को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का प्लान बना लिया। 17 मई की रात को रूबी ने सुरेंद्र के लिए खीर बनाई, लेकिन इस बार उसने उस खीर में नींद की 18 से ज्यादा गोलियां पीसकर मिला दीं। सुरेंद्र ने बड़े चाव से खीर खाई और सो गया। 18 मई की सुबह जब रूबी ने देखा, तो सुरेंद्र बिस्तर पर मृत पड़े थे।

सास और बच्चों को हटाया, फिर अकेले ही खोदा पति का 'कब्रिस्तान'
पति की मौत के बाद रूबी के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी लाश को ठिकाने लगाना और खुद को बचाना। इसके लिए उसने बेहद ठंडे दिमाग से काम लिया। 18 मई की सुबह करीब 9 बजे उसने राजस्थान में रहने वाले अपने जेठ अनिल शर्मा को फोन मिलाया।
रूबी ने घबराती हुई आवाज में कहा कि घर में पुलिस का कोई लफड़ा हो गया है, आप तुरंत आकर मम्मी और बच्चों को यहां से ले जाओ। उसने जेठ को सख्त हिदायत दी कि वह सीधे घर न आएं, बल्कि बच्चों और मां को उसने पास की एक दुकान पर बैठा दिया है, वहीं से ले जाएं।
सुरेंद्र की मां कमला को आंखों से बहुत कम दिखाई देता था, जिसका रूबी ने पूरा फायदा उठाया। वह दोनों बच्चियों और सास को घर से 100 मीटर दूर छोड़कर आई और जेठ के साथ राजस्थान भेज दिया। जैसे ही रास्ता साफ हुआ, रूबी वापस घर लौटी।
उसने सुरेंद्र की भारी-भरकम लाश को कमरे से घसीटकर बाथरूम तक पहुंचाया। इसके बाद एक फावड़ा उठाया और बाथरूम के अंदर ही एक गहरा गड्ढा खोदना शुरू कर दिया। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उसने अपने ही पति के शव को उस गड्ढे में डालकर मिट्टी भर दी।

जेठ अनिल शर्मा को सुनाई मनगढ़ंत कहानी और पुलिस के साथ रोने का नाटक
लाश को दफनाने के तुरंत बाद रूबी ने अपने जेठ अनिल शर्मा को दोबारा फोन किया। इस बार उसने नया झूठ बुना कि सुरेंद्र घर पर आए थे और जबरदस्ती ताला खुलवाकर लड़ाई-झगड़ा करने लगे। वे घर में रखे 5 हजार रुपये छीनकर भाग गए हैं और कह गए हैं कि दो-तीन दिन बाद फोन करके बताएंगे कि कहां हैं। अपनी इस कहानी को सच साबित करने के लिए रूबी अगले ही दिन यानी 19 मई को खुद भी बच्चों के पास राजस्थान चली गई।
वह करीब 7-8 दिन वहां रुकी ताकि किसी को कोई शक न हो। जब सुरेंद्र का कोई सुराग नहीं मिला, तो भाई अनिल शर्मा ने 26 मई को आगरा के सिकंदरा थाने में सुरेंद्र की गुमशुदगी (Missing Report) दर्ज करा दी। इसके बाद रूबी वापस आगरा आई और गुपचुप तरीके से कुछ मजदूर बुलाकर बाथरूम में नया पक्का फर्श और टाइल्स लगवा दीं।
पुलिस जब भी जांच के लिए घर आती, रूबी उनके साथ मिलकर सीसीटीवी फुटेज खंगालती, पुलिस को गुमराह करने के लिए नए-नए रास्ते बताती और बीच-बीच में बच्चों का हवाला देकर रोने का नाटक करने लगती। पुलिस भी उसकी इस अदाकारी को सच मानकर भटकती रही।

जेठ की एक सहानुभूति वाली ट्रिक और रूबी ने उगल दिया सारा सच
पुलिस की तफ्तीश में करीब 45 दिन बीत चुके थे। पुलिस कई बार रेणुका धाम वाले मकान में आई, उसी बाथरूम के आसपास खड़ी होकर पूछताछ की, लेकिन किसी को कानोकान भनक नहीं लगी कि पैर के ठीक नीचे सुरेंद्र की लाश गल रही है। हालांकि, जेठ अनिल शर्मा को रूबी के बदलते बयानों और उसके बर्ताव पर धीरे-धीरे शक होने लगा था। शुक्रवार की सुबह अनिल ने रूबी को सच उगलवाने के लिए एक इमोशनल जाल में फंसाया।
अनिल ने रूबी के पास बैठकर बेहद प्यार से कहा,
"देखो रोने से बात नहीं बनेगी। अगर कोई बात है तो मुझे खुलकर बता दो। अगर इस मामले में तू कहीं फंस रही है या तुझसे कोई गलती हुई है, तो मुझे बता। मैं तुझे बचा लूंगा, तेरे ऊपर आंच नहीं आने दूंगा।"
जेठ की मुंह से बचाव का यह भरोसा सुनते ही रूबी का हौसला टूट गया। वह फूट-फूटकर रोने लगी और उसने कबूल कर लिया कि सुरेंद्र कहीं बाहर नहीं गया है, बल्कि उसने ही सुरेंद्र को मारकर बाथरूम के नीचे दबा दिया है।

कुदाल-फावड़ा लेकर पहुंची पुलिस, 20 मिनट की खुदाई में निकला नरकंकाल
रूबी का कबूलनामा सुनते ही अनिल शर्मा के होश उड़ गए। उन्होंने बिना एक पल गंवाए शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे पुलिस को इस खौफनाक वारदात की जानकारी दी। एसीपी अमीषा सिंह के निर्देश पर सिकंदरा पुलिस की टीम आनन-फानन में भारी पुलिस बल और 5 मजदूरों को लेकर मौके पर पहुंची। मजदूरों ने बाथरूम का नया फर्श तोड़ना शुरू किया।
महज 20 मिनट की खुदाई के बाद जैसे ही मिट्टी हटाई गई, वहां खड़े पुलिसकर्मियों का कलेजा कांप उठा। 45 दिन बीत जाने की वजह से सुरेंद्र की लाश पूरी तरह से गल चुकी थी और वहां सिर्फ एक इंसानी नरकंकाल बचा था। पुलिस ने तुरंत फॉरेंसिक टीम को मौके पर बुलाया।
चूंकि शरीर पर कोई मांस नहीं बचा था, इसलिए शुक्रवार 03 जुलाई को शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका। शनिवार 04 जुलाई को 5 डॉक्टरों की एक स्पेशल फॉरेंसिक टीम बनाकर इस कंकाल की वैज्ञानिक जांच की जा रही है ताकि मौत के असली समय और जहर के अवशेषों का पता लगाया जा सके।
क्या रूबी ने अकेले रचा यह चक्रव्यूह? उठ रहे हैं कई बड़े सवाल
सिकंदरा पुलिस ने आरोपी पत्नी रूबी को हिरासत में ले लिया है और उस मकान को पूरी तरह सील कर दिया गया है। एसीपी अमीषा सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में महिला ने घरेलू हिंसा को हत्या की वजह बताया है। लेकिन इस मर्डर मिस्ट्री की कुछ कड़ियां अभी भी अधूरी लगती हैं, जिन पर पुलिस को गहराई से जांच करनी होगी।
अकेले दफनाना मुमकिन था?: सुरेंद्र शर्मा की उम्र 44 साल थी और उनका शरीर अच्छा-खासा था। क्या एक अकेली महिला के लिए यह मुमकिन है कि वह एक वयस्क पुरुष की लाश को कमरे से खींचकर बाथरूम तक ले जाए, अकेले ही गहरा गड्ढा खोदे और उसे दफन कर दे?
मजदूरों की भूमिका: वारदात के 8 दिन बाद जिन मजदूरों ने बाथरूम में नया फर्श और टाइल्स लगाईं, क्या उन्हें वहां की ताजा खोदी गई मिट्टी या किसी तरह की अजीब दुर्गंध का अहसास नहीं हुआ?
सीक्रेट फोन और कॉल डिटेल्स: पुलिस अब रूबी के मोबाइल की कॉल डिटेल्स (CDR) और उसकी लोकेशन खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि 17 और 18 मई को वह किन-किन लोगों के संपर्क में थी।
पुलिस रिमांड के दौरान रूबी से लगातार कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। आगरा का यह 'दृश्यम' मर्डर केस यह साबित करता है कि कोई मुल्जिम चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, वह कानून की नजरों से ज्यादा दिनों तक अपने गुनाह को छिपा नहीं सकता। फर्श के नीचे छिपा यह खौफनाक राज आज सलाखों के पीछे पहुंच चुका है।














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