'यह घर नहीं मंदिर है', राबड़ी देवी का बंगला खाली होने पर रो पड़ा समर्थक, जमीन की मिट्टी उठाकर साथ ले गया!

Rabri Devi Bungalow Controversy: बिहार की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का सरकारी आवास इन दिनों चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। राज्य सरकार की ओर से आवास खाली करने का नोटिस दिए जाने के बाद मामला लगातार सुर्खियों में है। इसी बीच, जब बंगला खाली होने की प्रक्रिया चल रही थी, तब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का एक समर्थक आवास के बाहर पहुंचा और भावुक हो गया। उसने जमीन की मिट्टी उठाकर अपने साथ ले ली और कहा कि यह जगह उसके लिए सिर्फ एक सरकारी मकान नहीं, बल्कि आस्था और यादों का प्रतीक है।

मीडिया से बातचीत के दौरान उसने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाया। समर्थक का कहना था कि सरकारी बंगला वापस लिया जा सकता है, लेकिन लोगों के दिलों से लालू परिवार की पहचान नहीं मिटाई जा सकती। उसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

Rabri Devi Bungalow

नोटिस से शुरू हुआ पूरा मामला

दरअसल, बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 10, सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने का नोटिस जारी किया था। विभाग का कहना था कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद तय नियमों के अनुसार यह सरकारी आवास खाली किया जाना चाहिए। नोटिस में निर्धारित समय के भीतर बंगला खाली करने को कहा गया था। इसके बाद आवास खाली कराने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई।

मिट्टी को बताया यादों की निशानी

इसी दौरान एक आरजेडी समर्थक आवास के बाहर पहुंचा और भावुक होकर जमीन की मिट्टी अपने हाथों में भरने लगा। उसने कहा कि इस घर से लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और मीसा भारती की अनगिनत यादें जुड़ी हुई हैं।

उसके मुताबिक, यहां गरीब और जरूरतमंद लोग अपनी समस्याएं लेकर आते थे और उनकी बातें सुनी जाती थीं। उसने कहा कि वह इस मिट्टी को अपने घर ले जाएगा ताकि यह याद हमेशा उसके साथ बनी रहे।

सम्राट चौधरी पर साधा निशाना

समर्थक ने मीडिया से बातचीत में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर सीधा हमला बोला। उसने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक भावना से प्रेरित है। उसका कहना था कि सत्ता के बल पर किसी से सरकारी मकान खाली कराया जा सकता है, लेकिन जनता के मन से किसी नेता की जगह नहीं छीनी जा सकती। उसने यह भी साफ किया कि उसका चुनाव लड़ने या राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है और वह सिर्फ लालू यादव की विचारधारा का समर्थक है।

कविता सुनाकर कही यह बात

बातचीत के आखिर में समर्थक ने एक मशहूर कविता की पंक्तियां भी सुनाईं। उसने कहा, "जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है।" इसके बाद उसने कहा कि सत्ता हमेशा एक जैसी नहीं रहती और समय बदलते देर नहीं लगती। उसके अनुसार, आज जो लोग ताकत में हैं, उन्हें भी भविष्य में ऐसे हालात का सामना करना पड़ सकता है।

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