आगरा में ‘Love Jihad’ रैकेट का खुलासा: ISI‑कनेक्शन, पाकिस्तान-गाजा से फंडिंग, गेम्स से लड़कियों का ब्रेनवॉश!
Agra Police Expose Love Jihad Racket : आगरा में एक सनसनीखेज धर्मांतरण रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जिसके तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और गाजा तक जुड़े हैं। आगरा पुलिस ने 26 जुलाई 2025 को खुलासा किया कि यह रैकेट ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स, सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड ऐप्स और डार्क वेब के जरिए नाबालिग लड़कियों को निशाना बनाकर स्लीपर सेल्स तैयार करने की साजिश रच रहा था।
इस रैकेट में 14 लोग गिरफ्तार किए गए हैं, और एक 21 वर्षीय युवती मुख्य गवाह बनी है। जांच में सामने आया कि पाकिस्तानी हैंडलर्स और कश्मीरी महिलाएं लड़कियों को कट्टरपंथी बनाने और जिहाद के लिए उकसाने में शामिल थीं।

रैकेट का खतरनाक मॉडस ऑपरेंडी
पुलिस जांच में पता चला कि यह नेटवर्क पबजी, फ्री फायर जैसे ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करता था। नाबालिग लड़कियों को पहले गेमिंग के जरिए दोस्ती के जाल में फंसाया जाता था, फिर टेलीग्राम, सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स पर धार्मिक सामग्री भेजकर कट्टरपंथी बनाया जाता था। कश्मीर की कुछ महिलाएं हिंदू धर्म की आलोचना करती थीं और इस्लाम अपनाने के लिए उकसाती थीं। जूम के जरिए नमाज और इस्लामी विचारधारा की क्लासेस आयोजित की जाती थीं, जिनमें धर्मांतरित लड़कियों को 'रिवर्टी' कहा जाता था।
आगरा के पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने बताया, 'यह रैकेट सुनियोजित तरीके से लड़कियों को कट्टरपंथी बनाने और जिहाद के लिए तैयार करने की साजिश रच रहा था। पाकिस्तान और गाजा से फंडिंग के साथ-साथ कश्मीर की कुछ महिलाएं भी इसमें शामिल थीं। हमने 14 लोगों को गिरफ्तार किया है और कई पीड़ित लड़कियों को ऑपरेशन 'अस्मिता' के तहत बचाया है।'
पाकिस्तान और गाजा का कनेक्शन
जांच में दो पाकिस्तानी हैंडलर्स-तनवीर अहमद और साहिल अदीम-का नाम सामने आया है, जो ISI के लिए काम करते थे। ये दोनों यूट्यूब और सोशल मीडिया के जरिए लड़कियों को इस्लाम अपनाने की ऑनलाइन ट्रेनिंग देते थे। कश्मीर के हैरिस को इस रैकेट का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जिसकी तलाश जारी है।
रैकेट को गाजा, कनाडा, और इंग्लैंड से क्रिप्टोकरेंसी और क्राउडफंडिंग के जरिए फंडिंग मिल रही थी। एक आरोपी, रहमान कुरैशी, ने फिलिस्तीन के लिए क्राउडफंडिंग के नाम पर लाखों रुपये जुटाए, जो डार्क पूल ट्रांजैक्शंस के जरिए गाजा पहुंचे। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि फिलीपींस के एक NGO के जरिए इस रैकेट को फंडिंग दी जा रही थी।
पुलिस ने पाया कि नेटवर्क के तीन सदस्य डार्क वेब में माहिर थे और कोडेड भाषा में संवाद करते थे। दिल्ली में भी इस रैकेट का एक व्हाट्सएप विंग सक्रिय था, जो लड़कियों को जिहाद के लिए प्रेरित करता था।
मुख्य आरोपी: रहमान चाचा और आयशा
रैकेट के दो मास्टरमाइंड्स-अब्दुल रहमान उर्फ रहमान चाचा (पूर्व में महेंद्र पाल) और आयशा (पूर्व में एसबी कृष्णा)-धर्मांतरित लोग हैं। दिल्ली से गिरफ्तार रहमान चाचा और गोवा से पकड़ी गई आयशा ने तनवीर अहमद के साथ मिलकर रैकेट को ऑपरेट किया। रहमान धार्मिक आयोजनों के जरिए लड़कियों को फंसाता था, जबकि आयशा भावनात्मक रूप से उन्हें जोड़कर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करती थी।
पुलिस ने 12 अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है, जिन्होंने पूछताछ में रैकेट का हिस्सा होने की बात कबूल की। तीन हिंदू लड़कियों के मोबाइल से तनवीर के वीडियो बरामद हुए, जिन्हें दिल्ली और फिर कोलकाता भेजकर खाड़ी देशों में ले जाने की साजिश थी।
मुख्य गवाह और ऑपरेशन 'अस्मिता'
उत्तराखंड की एक 21 वर्षीय युवती, जिसे इस रैकेट से बचाया गया, ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 183 के तहत बयान दर्ज कराया। उसने बताया कि उसे गेमिंग ऐप्स के जरिए निशाना बनाया गया और धीरे-धीरे कट्टरपंथी बनाया गया। वह अब इस मामले की मुख्य गवाह है।
ऑपरेशन अस्मिता के तहत पुलिस ने देहरादून, बरेली, अलीगढ़, झज्जर, और रोहतक से कई पीड़ित लड़कियों को बचाया है। इनमें से कई इतनी कट्टरपंथी हो चुकी थीं कि काउंसलिंग का भी उन पर असर नहीं हो रहा। पुलिस कमिश्नर ने बताया, 'कई परिवारों को अपनी बेटियों के धर्मांतरण का अंदाजा तक नहीं था। यह रैकेट बेहद खतरनाक ढंग से काम कर रहा था।'
पिछले मामले और ISI का इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब ISI से जुड़े धर्मांतरण रैकेट सामने आए हैं। 2023 में NIA ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश में कई रैकेट्स का भंडाफोड़ किया था, जिनमें बांग्लादेश और पाकिस्तान से फंडिंग के सबूत मिले थे। मई 2025 में मेरठ में एक समान रैकेट में 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जो डेटिंग ऐप्स के जरिए युवतियों को फंसाते थे।
ISI का इतिहास भारत में अस्थिरता फैलाने का रहा है। 2024 में पंजाब और हरियाणा में खालिस्तानी आतंकी मॉड्यूल्स के साथ ISI के लिंक सामने आए थे, और अब धर्मांतरण की आड़ में स्लीपर सेल्स तैयार करने की साजिश ने खतरे की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।
NIA की जांच और अगला कदम
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दिया गया है। NIA अब ISI, गाजा, और कनाडा से जुड़े फंडिंग नेटवर्क और डार्क वेब के इस्तेमाल की गहन जांच कर रही है। पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने कहा, 'हम इस साजिश के हर पहलू को उजागर करेंगे। कोई भी दोषी नहीं बचेगा।'
बचाई गई लड़कियों को काउंसलिंग दी जा रही है, और उनके बयानों के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। कश्मीर के हैरिस और अन्य हैंडलर्स की तलाश में छापेमारी तेज कर दी गई है।
क्या होगा आगे?
यह रैकेट न केवल धर्मांतरण की साजिश को उजागर करता है, बल्कि डिजिटल युग में ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया के दुरुपयोग को भी सामने लाता है। ISI की स्लीपर सेल्स तैयार करने की साजिश ने भारत की सुरक्षा के लिए नए खतरे की घंटी बजा दी है। क्या NIA इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर पाएगी? क्या सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी के लिए सख्त कानून बनाएगी? ये सवाल अभी अनुत्तरित हैं।
फिलहाल, आगरा पुलिस और NIA की कार्रवाई ने इस रैकेट को बड़ा झटका दिया है, लेकिन यह भारत में बढ़ते साइबर क्राइम और आतंकी साजिशों की गंभीरता को रेखांकित करता है।
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