महिला को तीन तलाक देकर बोला पति- ये सुप्रीम कोर्ट का नहीं मेरा फैसला है

मेरठ। कुछ दिनों पूर्व देश में तीन तलाक के मुद्दे को लेकर जबरदस्त बहस हुई जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक के मुद्दे पर अपना फैसला सुनाते हुए उसे असंवैधानिक करार दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ घंटों बाद ही सरधना में तीन बच्चो की मां को तलाक देने का मामला सामने आगया है। तलाक देने वाले युवक ने पंचायत के बीच ही कह डाला तलाक तलाक तलाक। लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला याद दिलाया तो युवक ने दबंगई दिखाते हुई कहा, वह सुप्रीम कोर्ट का फैसला है और यह मेरा फैसला है।

दहेज न मिलने पर दिया तलाक

दहेज न मिलने पर दिया तलाक

जानकारी के मुताबिक नगर के मोहल्ला कमरा नवाबान निवासी साबरीन पुत्र यामीन ने 6 वर्ष पूर्व अपनी पुत्री अरशी निदा का निकाह मौहल्ले के ही सिराज खान पुत्र रियाज खान के साथ किया था। अरशी निदा के मुताबिक निकाह के बाद से ही उसके ससुरालियों ने दहेज़ की खातिर उसका उत्पीड़न करना शुरू कर दिया था। इस बीच उसने तीन बच्चो को जन्म दिया कुछ माह पूर्व उसके पुत्री पैदा हुई थी। जिसकी छटी के नाम पर उसके ससुरालियों ने सेंट्रो कार के साथ एक लाख की नगदी भी मांगी।

सुप्रीम कोर्ट का उड़ाया मजाक

सुप्रीम कोर्ट का उड़ाया मजाक

मांगे पूरी न होते देख उसके ससुरालियों ने मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया था। इस संबंध में उसने अपने ससुरियों के खिलाफ थाने में तहरीर देकर कार्यवाई की मांग की थी। इसका पता चलने पर उसके ससुराल वाले उसके मायके में आए और तहरीर देने को लेकर उसके साथ मारपीट की उसी बीच मौहल्ले के लोगो नें एकत्रित होकर पंचायत की। वहीं लोगो नें उसे और ससुरालियों को समझाने का प्रयास किया। उसी समय उसके पति सिराज खान ने उसे तलाक तलाक तलाक बोल दिया लोगों ने जब सिराज को बताया की अभी कुछ देर पहले ही तलाक को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है और इसे असंवैधानिक करार दिया है तो सिराज ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को उसका और इस फैसले को अपना फैसला बताकर सुप्रीम कोर्ट का मजाक उड़ाया।

गर्भ से है पीड़िता

पीड़िता ने अपने पिता व भाई के साथ थाने पहुंचकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पीड़िता ने पति सिराज, ससुर रियाज, सास मोइना, नन्द जीनत, दरक्शा व रिजवाना को नामजद किया है। पीड़िता अरशी निदा ने बताया की वह गर्भ से भी है। उसका पिता आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। ऐसे में उसके सामने अपने बच्चों का पालन करने के लिए संकट खड़ा हो गया है। हमारी सरकार व कानून उसके ससुरालियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही के साथ उसकी जीवनी के लिए भी कदम उठाए उसके ससुराल वालों से उसे खर्च दिलाने का भी कदम उठाए।

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