यूनिवर्सिटी बवाल: सेंट्रल जेल में आमरण अनशन पर बैठे 22 छात्र
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में बवाल के बाद जेल भेजे गए 22 छात्रोंं ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। उन्होंने विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांच की मांंग की है।
इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शुक्रवार से चल रहे बवाल के बढ़ने के आसार हैं। गिरफ्तार कर जेल भेजे गये यूनिवर्सिटी के 22 छात्रों ने जेल में ही आमरण अनशन शुरू कर दिया है। छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र के साथ-साथ 22 छात्रों ने शनिवार की रात से कुछ नहीं खाया और अनशन शुरू कर दिया है। छात्रों ने अपनी मांग सामने रख दी है और उनका कहना है कि जब तक मांग नहीं पूरी होगी वह आमरण अनशन पर रहेंगे।

क्या मांग कर रहे छात्र
छात्रों ने मांग की है कि विश्वविद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार की केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) अपने स्तर से जांच कराये। जांच के दौरान कुलपति को लंबी छुट्टी पर भेज दिया जाए और छात्रों पर लाठीचार्ज के लिए प्रशासन एवं पुलिस के जिम्मेदार अफसरों को निलंबित किया जाय। हिंसक तत्वों की पहचान कार्रवाई किए जाने की मांग भी की जा रही है।
छात्रों ने लगाये कई आरोप
आमरण अनशन पर बैठे छात्रसंघअध्यक्ष रोहित मिश्र ने कहा कि शुक्रवार को विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार और कुलपति के रवैये से कार्यपरिषद के सदस्यों को अवगत कराने के लिए विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में ज्ञापन देने पहुंचे थे। वहां शांतिपूर्वक धरना चल रहा था, लेकिन इविवि प्रशासन ने तानाशाही रवैया अपनाया और पुलिस ने लाठीचार्ज कर छात्रनेताओं को गिरफ्तार कर लिया।
छात्रों का आरोप है कि जिन छात्रों को पकड़कर पुलिस लाइन ले जाया गया, वहां उनसे मिलने पहुंचे साथी छात्रों पर भी पुलिस ने लाठियां बरसाई।
जिन्होंने बवाल किया उनपर करें कार्रवाई
छात्रों का कहना है कि जिन्होंने बवाल किया, उनकी पहचान कर कार्रवाई की जाये। इस बवाल के पीछे शिक्षकों के दो गुटों से जुड़े अराजक तत्वों का हाथ है। शांतिपूर्ण ढंग से अनशन कर रहे छात्रों का इसमे कोई रोल नहीं है। गौरतलब है कि इस समय जेल में 22 छात्र बंद किये गये हैं।












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