TMC Crisis 2026: क्या बाबुल सुप्रियो भी छोड़ने वाले हैं पार्टी? BJP जाने के अफवाहों पर सांसद ने बता दी सच्चाई
Babul Supriyo On TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी उथल-पुथल और बगावत की खबरों के बीच पार्टी के राज्यसभा सांसद बाबुल सुप्रियो ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि वह न तो किसी बागी गुट में शामिल होने जा रहे हैं और न ही किसी अन्य राजनीतिक दल का दामन थामने वाले हैं।
बाबुल सुप्रियो ने कहा कि जब कोई जहाज मुश्किल दौर से गुजर रहा हो, तब उसे छोड़कर जाना उचित नहीं होता।

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब TMC के भीतर बड़े पैमाने पर असंतोष और टूट की चर्चाएं तेज हैं। कई सांसदों और विधायकों के पार्टी नेतृत्व से नाराज होने तथा अलग गुट बनाने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
अफवाहों के बीच बाबुल सुप्रियो ने तोड़ी चुप्पी
राज्यसभा सांसद बाबुल सुप्रियो ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कहा कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में कई तरह की अफवाहें और भ्रम फैलाए जा रहे हैं। ऐसे में वह स्पष्ट करना चाहते हैं कि उनका किसी भी गुटबाजी से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा,"इन सभी अफवाहों और भ्रम की स्थिति के बीच मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं न तो किसी गुट में शामिल हो रहा हूं और न ही किसी दूसरी पार्टी में जा रहा हूं। मेरा मानना है कि जब कोई जहाज कठिन परिस्थितियों में हो, तब उसे छोड़ देना उचित नहीं है। उनके इस बयान को TMC नेतृत्व के प्रति समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।
TMC में क्यों मचा है सियासी घमासान?
गौरतलब है कि हालिया विधानसभा चुनावों में क्षेत्रीय दलों को मिली हार के बाद से ही टीएमसी के भीतर असंतोष की चिंगारी सुलग रही थी। बागी गुट का दावा है कि उनके पास 64 विधायकों और 20 लोकसभा सांसदों का समर्थन है, जिन्होंने संसद में अलग बैठने की व्यवस्था भी मांगी है। बागी नेताओं का सीधा निशाना पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली और संगठन पर उनकी पकड़ को लेकर है। इस बीच, तेजतर्रार सांसद महुआ मोइत्रा ने भी हाल ही में दिए अपने इंटरव्यू में बागियों को 'अवसरवादी' बताते हुए कहा था कि पार्टी का 'शुद्धिकरण' हो रहा है।
ममता बनर्जी के लिए राहत भरा संदेश
ऐसे समय में बाबुल सुप्रियो का यह बयान मुख्यमंत्री और TMC प्रमुख ममता बनर्जी के लिए राहत की खबर माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी में जारी अस्थिरता के बीच वरिष्ठ नेताओं का खुलकर नेतृत्व के साथ खड़ा होना संगठन को मजबूत संदेश देता है। बाबुल सुप्रियो उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने भाजपा छोड़कर TMC का दामन थामा था। पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी मिलीं और वह ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं।
विपक्ष और भाजपा की नजर
पश्चिम बंगाल में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम पर भाजपा और विपक्षी दल भी नजर बनाए हुए हैं। भाजपा का दावा है कि TMC के भीतर असंतोष बढ़ रहा है, जबकि तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि पार्टी मजबूत है और कुछ नेताओं के जाने से संगठन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। इस बीच बाबुल सुप्रियो के बयान ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि TMC के सभी नेता पार्टी छोड़ने के मूड में नहीं हैं और कई नेता अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भरोसा जता रहे हैं।
बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल
राज्य में विधानसभा चुनावों के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों और TMC के भीतर चल रही खींचतान ने बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे दी है। ऐसे में बाबुल सुप्रियो का यह बयान आने वाले दिनों में पार्टी की रणनीति और आंतरिक स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल उन्होंने साफ कर दिया है कि तमाम अटकलों के बावजूद वह तृणमूल कांग्रेस के साथ हैं और कठिन समय में पार्टी का साथ छोड़ने के पक्ष में नहीं हैं।














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