हरियाणा के स्कूलों में पढ़ाया जाएगा सिख गुरुओं का इतिहास, 8वीं कक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल
हरियाणा सरकार ने छात्रों को बलिदान, नेतृत्व, समानता और राष्ट्रीय सेवा के बारे में शिक्षित करने, नागरिक जागरूकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने के लिए 8वीं कक्षा के इतिहास पाठ्यक्रम में सिखों के गुरुओं और बंदा सिंह बहादुर के इतिहास को शामिल किया है।
हरियाणा सरकार ने राज्य के स्कूलों की 8वीं कक्षा के इतिहास पाठ्यक्रम में सिख गुरुओं और बाबा बंदा सिंह बहादुर के इतिहास को शामिल करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को सिख गुरुओं के त्याग, बलिदान, आदर्शों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान से परिचित कराना है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि गुरु तेगबहादुर जी के 350वें शहीदी समागम के दौरान उन्होंने यह घोषणा की थी कि सिख इतिहास और गुरुओं की शिक्षाओं को विद्यालयी शिक्षा का हिस्सा बनाया जाएगा। अब सरकार ने इस घोषणा को अमल में लाते हुए इसे पाठ्यक्रम में शामिल कर दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोबिंद सिंह जी तक सभी सिख गुरुओं ने मानवता, समानता, सेवा, करुणा और सामाजिक न्याय का संदेश दिया। उनकी शिक्षाएं आज भी समाज में सद्भाव, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की प्रेरणा देती हैं।
उन्होंने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर का जीवन भी साहस, नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति का प्रेरणादायक उदाहरण है। गुरु गोबिंद सिंह जी की प्रेरणा से उन्होंने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करते हुए समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को अपने गौरवशाली इतिहास और महान व्यक्तित्वों से जोड़ना बेहद जरूरी है। पाठ्यक्रम में शामिल किए गए ये अध्याय छात्रों में देशभक्ति, सेवा भावना, सामाजिक समरसता और जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित करने में मदद करेंगे।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार शिक्षा को केवल ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण का सशक्त साधन मानती है। इसी सोच के तहत ऐसे महापुरुषों के जीवन और शिक्षाओं को पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है, जिन्होंने समाज और राष्ट्र के लिए अनुकरणीय कार्य किए हैं।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह पहल विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें जागरूक और संवेदनशील नागरिक बनने की प्रेरणा देगी। मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. प्रभलीन सिंह ने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि सरकार ने सिख समुदाय की लंबे समय से जुड़ी भावनात्मक मांग को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला सरकार की समावेशी सोच और सभी वर्गों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।












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