बिहार MLC चुनाव में NDA का दबदबा, नीतीश के बेटे निशांत और पवन सिंह समेत सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध जीते

Bihar MLC Polls: बिहार की राजनीति में गुरुवार का दिन कई मायनों में अहम रहा। राज्य विधान परिषद (MLC) की 10 सीटों, जिनमें एक उपचुनाव वाली सीट भी शामिल थी, पर सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए। नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख खत्म होने के बाद चुनाव की जरूरत नहीं पड़ी और सभी प्रत्याशियों की जीत तय हो गई।

इस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने 10 में से 9 सीटों पर कब्जा जमाकर अपनी मजबूत स्थिति दिखाई, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को केवल एक सीट मिली। इस चुनाव की सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार और भोजपुरी फिल्म जगत के चर्चित अभिनेता-गायक पवन सिंह की जीत को लेकर रही, जिनकी एंट्री ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाएं शुरू कर दी हैं।

Bihar MLC Polls

NDA ने जीतीं 9 सीटें

विधान परिषद की 10 सीटों में से 9 सीटें एनडीए के खाते में गईं। इनमें जनता दल यूनाइटेड (JDU) को 4, भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 4 और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 1 सीट मिली। वहीं राजद को केवल एक सीट से संतोष करना पड़ा।

ये भी पढ़ें: JDU दफ्तर में नीतीश कुमार का सरप्राइज विजिट, दफ्तर से गायब मिले मंत्री और बेटा निशांत, खुद सुनीं फरियादें

JDU से ये उम्मीदवार बने MLC

जेडीयू की ओर से निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद निर्विरोध चुने गए। इनमें ललन प्रसाद ने उस सीट पर जीत दर्ज की, जो नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी।

BJP के खाते में चार सीटें

भाजपा से भोजपुरी अभिनेता और गायक पवन सिंह, संजय प्रकाश मयूख, अनिल ठाकुर और शीला पंडित एमएलसी निर्वाचित हुए। पवन सिंह की जीत को राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के वर्षों में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ी है।

LJP और RJD को मिली एक-एक सीट

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अशरफ अंसारी और राष्ट्रीय जनता दल के सुनील सिंह भी निर्विरोध एमएलसी चुने गए। राजद इस चुनाव में केवल एक सीट हासिल कर सका।

नवनिर्वाचित एमएलसी की पूरी सूची

  • निशांत कुमार (जेडीयू)
  • भारती मेहता (जेडीयू)
  • शिवानी देवी प्रजापति (जेडीयू)
  • ललन प्रसाद (जेडीयू)
  • पवन सिंह (भाजपा)
  • संजय प्रकाश मयूख (भाजपा)
  • अनिल ठाकुर (भाजपा)
  • शीला पंडित (भाजपा)
  • अशरफ अंसारी (एलजेपी-रामविलास)
  • सुनील सिंह (राजद)

दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर बढ़ी मुश्किल

दूसरी ओर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश को इस बार एमएलसी उम्मीदवार नहीं बनाया गया। ऐसे में उनका मंत्री पद अब खतरे में पड़ता नजर आ रहा है।

संविधान के अनुसार किसी व्यक्ति को मंत्री बनने के बाद छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी होता है। दीपक प्रकाश के लिए यह अवधि नवंबर में पूरी होने वाली है। चूंकि उन्हें एमएलसी नहीं बनाया गया, इसलिए उनका मंत्री पद बचाना मुश्किल हो सकता है।

बीजेपी और कुशवाहा के बीच क्या हुआ?

सूत्रों के अनुसार भाजपा ने एनडीए सहयोगियों को और मजबूत करने की रणनीति के तहत उपेंद्र कुशवाहा को अपनी पार्टी का भाजपा में विलय करने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन कुशवाहा ने इसे स्वीकार नहीं किया और अपनी पार्टी की अलग पहचान बनाए रखने का फैसला किया।

बताया जा रहा है कि नवंबर 2025 में जब दीपक प्रकाश को पहली बार मंत्री बनाया गया था, तब भी ऐसा ही प्रस्ताव सामने आया था। उस समय भी कुशवाहा ने पार्टी के विलय से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद भाजपा ने दीपक प्रकाश को मंत्रिमंडल में जगह दी थी।

अपने फैसले पर कायम हैं उपेंद्र कुशवाहा

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि उपेंद्र कुशवाहा अब भी अपने पुराने रुख पर कायम हैं और उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी भाजपा में शामिल नहीं होगी। हालांकि वे एनडीए का हिस्सा बने रहेंगे। ऐसे हालात में दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर बने रहने की संभावना केवल उस समय तक मानी जा रही है, जब तक उनकी छह महीने की संवैधानिक अवधि पूरी नहीं हो जाती।

ये भी पढ़ें: Nishant Kumar Degree: इंजीनियर नहीं सिर्फ 12वीं पास हैं नीतीश कुमार के बेटे निशांत? हलफनामे में खुली पोल

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+