Jhansi Medical College Fire: 10 बच्चों की मौत, 16 जिंदगी की जंग लड़ रहे, तीन स्तरों पर होगी जांच
Jhansi Medical College Fire: उत्तर प्रदेश के झांसी में स्थित महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष (NICU) में शुक्रवार रात शॉर्ट सर्किट के कारण लगी भीषण आग में 10 नवजात बच्चों की मौत हो गई।
आग के कारण 16 बच्चों की हालत गंभीर हो गई है और वे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हैं। राज्य सरकार ने इस घटना की गहरी जांच का आदेश दिया है और जांच रिपोर्ट शनिवार शाम तक मांगी गई है।

आग की वजह सुरक्षा खामियां
मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबोर्न केयर यूनिट) में आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी थी। अस्पताल के फायर एक्सटिंगुइशर (आग बुझाने के उपकरण) खराब पाए गए और सुरक्षा अलार्म भी काम नहीं कर रहे थे। इन खामियों के कारण हादसे को और बढ़ावा मिला। मृतकों के परिजनों का आरोप है कि यदि आग बुझाने के उपकरण सही स्थिति में होते, तो बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
अस्पताल में 18 बिस्तर थे, जिनमें से अधिकांश बिस्तरों में छह-छह बच्चे सो रहे थे। आग के कारण हुई अफरातफरी और धुएं के कारण बच्चों के परिजन बच्चों को गोद में उठाकर भागने लगे। घटनास्थल पर पुलिस और राहत दल की मदद से कई बच्चों को बचाया गया।
उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक का दौरा और जांच का आदेश
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, जो स्वास्थ्य मंत्री भी हैं, शनिवार सुबह 5 बजे मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने आग से झुलसकर मरे 10 नवजातों के शवों का निरीक्षण किया और बचाए गए बच्चों का हाल लिया। इसके बाद उन्होंने घटनास्थल पर मौजूद अस्पताल कर्मियों से पूछताछ की और तीन स्तरों पर जांच का आदेश दिया।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि इस त्रिस्तरीय जांच में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगने की वजह का पता लगाया जाएगा, और अगर लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मृतक नवजातों के शवों को डीएनए टेस्ट के बाद उनके परिजनों को सौंपा जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी थी और इस हादसे में 10 नवजातों की मौत हो गई। बाकी बच्चों की हालत में सुधार हो रहा है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की मदद देने का ऐलान किया है।
तीन स्तरों पर जांच का आदेश
उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि इस हादसे की तीन जांच की जा रही हैं:
1. स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा शासन स्तर से जांच
2. पुलिस और फायर ब्रिगेड द्वारा जांच
3. मजिस्ट्रेट द्वारा एक स्वतंत्र जांच
इन जांचों का मुख्य उद्देश्य आग लगने की वजह का पता लगाना है और अगर कोई लापरवाही पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फायर सेफ्टी की खामियां सामने आईं
इस घटना से पहले, फरवरी में मेडिकल कॉलेज की फायर सेफ्टी ऑडिट हुई थी और जून में सरकार के आदेश पर मॉक ड्रिल भी किया गया था। इसके बावजूद इस हादसे ने अस्पताल की फायर सेफ्टी व्यवस्था की खामियां उजागर की हैं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटना लापरवाही का परिणाम है और खामी को सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
बचाए गए नवजातों का इलाज जारी
घटना के बाद, बचाए गए नवजातों और उनकी माताओं को अस्पताल में बेहतर इलाज दिया जा रहा है। मृतकों में से 7 बच्चों की शिनाख्त हो चुकी है, जबकि अन्य बच्चों की शिनाख्त के प्रयास जारी हैं।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौरा
समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने इस घटना के लिए प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि यह स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति और प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से चुनाव प्रचार छोड़कर राज्य के स्वास्थ्य संकट पर ध्यान देने की अपील की।
इस पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने जवाब दिया कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी थी और यह अस्पताल का ऑक्सीजन-समृद्ध वार्ड था, जिससे आग ने जल्दी फैलने में मदद की।
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