समय से पहले ही हजारों प्रवासी पक्षी क्यों लौट गए?

हैदरपुर वेटलैंड क्षेत्र में जाड़ों में हजारों प्रवासी पक्षी पहुंचा करते हैं

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर और बिजनौर जिलों की सीमा पर स्थित हैदरपुर वेटलैंड क्षेत्र में सर्दियों के मौसम में हजारों विदेशी पक्षी कलरव करते हुए नजर आते हैं. इनमें कई दुर्लभ पक्षी भी शामिल हैं. लेकिन पिछले दिनों इस इलाके को पानी से खाली कर देने के कारण हजारों पक्षी यहां से वापस अपने देशों को चले गए.

हैदरपुर वेटलैंड को पिछले साल ही रामसर स्थल के रूप में मान्यता मिली थी. गंगा और सोनाली नदी के बीच करीब सात हजार हेक्टेअर में फैला यह इलाका जैव विविधता का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है. लेकिन सिंचाई विभाग ने वेटलैंड की झीलों के पानी को निकालकर गंगा नदी में डाल दिया, जिससे पूरा वेटलैंड ही खाली हो गया. इस वजह से न सिर्फ प्रवासी पक्षी चले गए बल्कि जलीय जीवों के सामने भी संकट आ गया है. बड़ी संख्या में मछलियां भी मर गई हैं. पक्षी प्रेमियों का कहना है कि झील का पानी गलत समय पर निकाला गया है.

आया पर्यावरण मंत्रालय का निर्देश

पानी निकालने की बात मीडिया में आने के बाद केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया और राज्य सरकार को जलनिकासी रोकने का निर्देश दिया है. पर्यावरण मंत्रालय ने यह भी निर्देश दिया है कि राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस संरक्षित स्थल से पानी तभी निकाला जाए जब प्रवासी पक्षी उस स्थान पर न रह रहे हों.

अंग्रेजी दैनिक हिन्दुस्तान ने पर्यावरण मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से लिखा है कि मंत्रालय ने राज्य सरकार को समय से पहले पानी न निकालने के निर्देश दिए हैं. सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि वेटलैंड से पानी की निकासी उन किसानों के दबाव में की गई थी जिन्होंने अपने खेतों में जल जमाव की शिकायत की थी. हालांकि इस बारे में वन विभाग की सहमत ली गई थी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं हो सका है. इस क्षेत्र का प्रबंधन सिंचाई विभाग और वन विभाग मिलकर करते हैं.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर और बिजनौर जिलों की सीमा पर स्थित है हैदरपुर वेटलैंड क्षेत्र

जैव विविधता की बानगी देता है इलाका

सर्दियों के मौसम में फरवरी के अंत या मध्य मार्च तक पक्षियों की 300 से ज्यादा प्रजातियां इस क्षेत्र में आती हैं. पर्यावरण मंत्रालय ने कहा है जल निकासी के लिए पक्षियों के प्रवासी पैटर्न के अनुरूप ही योजना बनाएं. वहीं उत्तर प्रदेश के जल शक्ति राज्य मंत्री दिनेश खटीक ने भी कहा है कि सिंचाई विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे वेटलैंड से पानी निकासी को रोकें ताकि प्रवासी पक्षियों के लिए आवश्यक पानी उपलब्ध हो सके.

हैदरपुर वेटलैंड मुजफ्फरनगर और बिजनौर जीलों की सीमा पर स्थित अंतरराष्ट्रीय महत्व का एक रामसर स्थल है. ईरान के शहर रामसर में दो फरवरी 1971 को एक सम्मेलन हुआ था जिसमें शामिल देशों के बीच वेटलैंड के संरक्षण से संबंधित एक समझौता हुआ था. यह समझौता 21 दिसंबर 1975 से प्रभाव में आ गया. रामसर स्थल की परिभाषा के मुताबिक, वेटलैंड ऐसा स्थान है, जहां साल में कम से कम आठ महीने पानी भरा रहता हो और जहां 200 से ज्यादा प्रजातियों के पक्षियों की मौजूदगी रहती हो.

हैदरपुर वेटलैंड हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य का एक हिस्सा होने के कारण पहले से ही संरक्षित श्रेणी में आता है. बिजनौर गंगा बैराज के करीब सात हजार हेक्टेयर क्षेत्र में स्थित हैदरपुर वेटलैंड एक मानव निर्मित झील है. साल 1984 में मध्य गंगा बैराज के निर्माण के दौरान यह बनाई गई थी ताकि बाढ़ आने पर ज्यादा पानी इस झील में चला जाए. यहां हिरन, डॉल्फिन, कछुए, घड़ियाल समेत कई जानवरों, पेड़-पौधों की दर्जनों प्रजातियां, पक्षियों की 300 से ज्यादा प्रजातियों के अलावा कई अन्य जलीय जीव-जंतु भी पाए जाते हैं.

पर्यटकों में लोकप्रिय

पर्यटकों को भी यह क्षेत्र काफी आकर्षित करता है. लेकिन विदेशी पक्षियों के वापस चले जाने के कारण यहां पर पहुंच रहे पर्यटकों को भी मायूसी हाथ लग रही है.

पक्षी प्रेमी आशीष लोया पिछले छह साल से इस इलाके में अक्सर आते हैं. आशीष लोया कहते हैं कि सिंचाई विभाग ने 10 जनवरी से दो दिनों में वेटलैंड का पानी निकाल दिया जिसकी वजह से प्रवासी और अन्य पक्षी उड़ गए. लोया बताते हैं आमतौर पर सिंचाई विभाग जनवरी और फरवरी के अंत में धीरे-धीरे पानी की निकासी करता है लेकिन इस बार जनवरी की शुरुआत में ही ऐसा कर दिया.

स्थानीय पत्रकार योगेश त्यागी बताते हैं, "दिल्ली और दूसरी जगहों के भी तमाम पक्षी प्रेमी हैदरपुर वेटलैंड का दौरा कर रहे थे क्योंकि यह एक शानदार पक्षी विहार है. दिल्ली-एनसीआर के आसपास के पक्षी विहार स्थलों की स्थिति प्रदूषण की वजह से खराब होती जा रही है. दिल्ली के पास एकमात्र अच्छी साइट हैदरपुर ही है. इसलिए यहां से पक्षियों का समय से पहले चले जाना सभी को हैरान कर रहा है."

पर्यावरण मंत्रालय ने कहा है जल निकासी के लिए पक्षियों के प्रवासी पैटर्न के अनुरूप ही योजना बनाएं

ईकोसिस्टम को छेड़ने से पहले गंभीरता से सोचने की जरूरत

पर्यावरणविदों का कहना है कि वन्यजीव अधिनियम और वेटलैंड अधिनियम के तहत वेटलैंड से पानी निकालने पर रोक लगाई गई है और ऐसा करने से पहले सिंचाई विभाग को वन विभाग के साथ समन्वय करना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. वन विभाग के अधिकारी भी इस बात से हैरान हैं कि कैसे बिना किसी से परामर्श किए और बिना किसी की अनुमति के पूरा वेटलैंड खाली कर दिया गया.

पर्यावरणविद डॉक्टर एके पाठक बताते हैं कि वेटलैंड का सूखा होना वहां की वनस्पतियों और जंतुओं के साथ ही समग्र पारिस्थितिकी पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालेगा. उनके मुताबिक, "हिरन जैसे कई अन्य जंतु भी इन परिस्थितियों में यहां से पलायन करने के लिए मजबूर हो सकते हैं. यही नहीं, इस तरह की गलतियों की वजह से यह भी हो सकता है कि प्रवासी पक्षी अगली बार यहां की बजाय किसी और वेटलैंड की ओर रुख कर लें."

Source: DW

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