Mahakal को चढ़े गुलाब के फूलों से बनेगा इत्र, कुछ इस तरह पूरी होगी प्रोसेस
धार्मिक नगरी उज्जैन में प्रशासनिक संकुल भवन के सभाकक्ष में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सदस्य अफरोज़ अहमद ने बैठक की। बैठक में कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम, पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा, डीएफओ, एडीएम अनुकूल जैन, नगर निगम आयुक्त रोशन कुमार सिंह, सीईओ जिला पंचायत अंकिता धाकरे, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी, सीएमएचओ, उप संचालक कृषि एवं अन्य सम्बन्धित विभागों के अधिकारीगण मौजूद थे।
बैठक में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की समीक्षा के दौरान अहमद ने पूछा कि, उज्जैन शहर में कुल कितना सॉलिड वेस्ट निकलता है। इस पर जानकारी दी गई कि प्रतिदिन 350 मैट्रिक टन सॉलिड वेस्ट निकलता है। गोंदिया में वेस्ट ट्रिटमेंट का प्लांट स्थित है। वहां स्थित प्रोसेसिंग सेंटर पूर्ण रूप से सेंट्रलाईज्ड है। इसके अतिरिक्त सब्जी मंडी से भी काफी अपशिष्ट निकलता है। महाकाल मन्दिर से निकलने वाले फूलों के अपशिष्ट से अगरबत्ती बनाई जा रही है।

फूलों से इत्र का निर्माण
अहमद ने कहा कि, इसके अतिरिक्त गुलाब के फूलों से इत्र का निर्माण भी उज्जैन में किया जाये। इसकी ब्राण्डिंग महाकालेश्वर मन्दिर की ओर से की जा सकती है। बैठक में जानकारी दी गई कि उज्जैन में कचरे का सेग्रीगेशन किया जा रहा है। उसकी प्रक्रिया अलग होती है। अहमद ने कहा कि बायो-डिग्रेडेबल वेस्ट की बायो-कंपोस्टिंग कर इसका उपयोग फर्टिलाइजर की तरह किया जा सकता है। उज्जैन में काफी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिये आते हैं। उनके छोटे-मोटे सामान रखने के लिये कपड़े के थैले निर्मित कराये जायें। उसमें नगर पालिक निगम अथवा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का लोगो लगाया जाये। ये थैले हर पूजन सामग्री की दुकान पर विक्रय किये जायें।
कई महत्वपूर्ण निर्णय हुए
अहमद ने कहा कि, उज्जैन में स्थानीय बिल्डर्स के साथ समय-समय पर बैठक की जाये तथा उन्हें कॉलोनी में अनिवार्य रूप से कुछ स्थान पौधारोपण के लिये आरक्षित रखने के निर्देश दिये जायें। बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट की समीक्षा के दौरान अहमद ने निर्देश दिये कि अस्पतालों से निकलने वाले अपशिष्ट प्रबंधन के लिये अलग-अलग एजेन्सी नियुक्ति की जाये। हर जिले में बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम होना चाहिये। इनका इनसेरीनेटर डबल चैंबर का होना चाहिये। बैठक में जानकारी दी गई कि ग्राम पंचायतों में भी कचरा कलेक्शन के लिये वाहन संचालित किये जा रहे हैं, जो घर-घर जाकर कचरा संग्रहित करते हैं। अहमद के द्वारा गांव में वर्मी कम्पोस्टिंग कराने और फसल काटने के बाद पराली का उपयोग खाद बनाने तथा एनर्जी पैलेट के रूप में करने के निर्देश दिये गये।
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