NEET 2026: पेपर लीक-परीक्षा रद्द होने का क्या होता है स्टूडेंट्स के मेंटल हेल्थ पर असर? साइकेट्रिस्ट से समझिए

NEET UG 2026 Paper Leak Effect on Student Mental Health: देश में लाखों छात्र हर साल डॉक्टर बनने का सपना लेकर NEET परीक्षा की तैयारी करते हैं। इस परीक्षा को पास करने के लिए छात्र महीनों नहीं बल्कि कई-कई साल तक दिन-रात मेहनत करते हैं। कोचिंग, टेस्ट सीरीज, लंबे स्टडी घंटे और लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच छात्रों की जिंदगी पूरी तरह परीक्षा के इर्द-गिर्द घूमने लगती है। लेकिन जब परीक्षा के बाद पेपर लीक, धांधली और परीक्षा रद्द होने जैसी खबरें सामने आती हैं, तो इसका असर सिर्फ रिजल्ट तक सीमित नहीं रहता। इसका सबसे गहरा असर छात्रों की मानसिक स्थिति पर पड़ता है।

NEET-UG 2026 विवाद के बाद बड़ी संख्या में छात्र सोशल मीडिया पर चिंता, गुस्सा, डर और निराशा जाहिर कर रहे हैं। कई छात्रों का कहना है कि अब उन्हें सिस्टम पर भरोसा कम होने लगा है और भविष्य को लेकर असुरक्षा महसूस हो रही है। NEET देश की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में गिनी जाती है। हर साल लाखों छात्र इसमें शामिल होते हैं, जबकि सीटें सीमित होती हैं। इसी वजह से छात्र काफी कम उम्र से ही तैयारी शुरू कर देते हैं। कई छात्र स्कूल के साथ कोचिंग संभालते हैं तो कई ड्रॉप लेकर सिर्फ NEET पर फोकस करते हैं।

NEET UG 2026 Paper Leak

मनोचिकित्सक ने क्या कहा?

हमने NEET पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द होने को लेकर मनोचिकित्सक डॉ समीर कालरा से विशेष बातचित की। हमने ये समझने की कोशिश की कि ऐसे पेपर लीक होना और फिर परीक्षा रद्द होना, इन सब का असर एक स्टूडेंट के मानसिक स्वास्थ्य पर किस तरह और किस हद तक पड़ सकता है।

डॉ कालरा ने बताया कि NEET की परीक्षा केवल एक स्टूडेंट की परीक्षा नहीं होती है बल्कि इसमें उसका पूरा परिवार जुड़ा होता है। परीक्षा को लेकर महीनों-सालों से तैयारी चलती है, कब परीक्षा होगी, किस मौसम में होगी, कैसे तैयारी करनी है, उस दौरान ट्रिप प्लान ना हो, घर-परिवार में शादियां तक इस दौरान नहीं रखी जाती हैं।

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इस दौरान छात्रों की दिनचर्या पूरी तरह बदल जाती है। सुबह से देर रात तक पढ़ाई, लगातार टेस्ट और अच्छे नंबर लाने का दबाव मानसिक थकान बढ़ाने लगता है। मनोवैज्ञानिक डॉ समीर कालरा ने बताया कि ऐसी स्थिति में अगर परीक्षा रद्द हो जाए तो छात्रों पर उसका असर कई गुना ज्यादा पड़ता है।

उनका दिल टूट जाता है और उन्हें ऐसा लगने लगता है कि अब उनकी दुनिया खत्म हो गई है। उन्होंने बताया, "परीक्षा देने के बाद जब स्टूडेंट को पता लगता है कि पेपर पहले से लीक हो गया था और एग्जाम कैंसिल कर दिया गया है तब ज्यादातर स्टूडेंट्स का दिल टूट जाता है, वो काफी निराश हो जाते हैं।"

उन्होंने आगे कहा,"पेपर लीक के बाद एग्जाम कैंसिल होने के साथ छात्रों की परेशानियां खत्म नहीं होती। उसके बाद री-एग्जाम की तैयारी, दोबारा से परफॉरमेंस प्रेशर और इस तैयारी के लिए वक्त भी कम मिलता है। ऐसे में बहुत से स्टूडेंट इस प्रेशर को हैंडल नहीं कर पाते और डिप्रेशन-एंग्जायटी के शिकार हो सकते हैं। कई स्टूडेंट तो आत्महत्या जैसे गंभीर कदम भी उठा लेते हैं। गोवा से एक ऐसा ही मामला देखने को मिला है जो कि बहुत ही दुखद है।"

पेपर लीक की खबरों से टूटता है भरोसा

NEET-UG 2026 को लेकर सामने आए विवाद ने कई छात्रों को मानसिक रूप से परेशान कर दिया है। छात्रों का कहना है कि जब परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं तो उन्हें लगता है कि मेहनत का सही मूल्य नहीं मिल पाएगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई छात्रों ने लिखा कि पेपर लीक जैसी खबरों के बाद उनका पढ़ाई में मन नहीं लग रहा। कुछ छात्रों ने कहा कि उन्हें हर परीक्षा से पहले अब डर महसूस होता है कि कहीं फिर कोई गड़बड़ी न हो जाए।

मनोचिकित्सक के अनुसार, लगातार ऐसी खबरें आने से छात्रों के अंदर असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है। इससे आत्मविश्वास कमजोर पड़ता है और कई बार छात्र खुद को दूसरों से पीछे समझने लगते हैं। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र पहले से ही हाई प्रेशर माहौल में रहते हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द होने या दोबारा परीक्षा की स्थिति उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है।

तनाव बढ़ने पर छात्रों में कई तरह की समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। इनमें नींद की कमी, घबराहट, गुस्सा, अकेलापन, आत्मविश्वास में गिरावट और लगातार चिंता शामिल हैं। कुछ छात्र सोशल मीडिया से दूरी बनाने लगते हैं, जबकि कुछ पढ़ाई से ही मन हटाने लगते हैं। डॉक्टर ने यह भी बताया कि कई छात्र अपनी पहचान और भविष्य को सिर्फ एक परीक्षा से जोड़ लेते हैं। ऐसे में परीक्षा को लेकर किसी भी तरह का विवाद उन्हें अंदर से तोड़ सकता है।

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