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ujjain News: महाकाल मंदिर में BJP विधायक गोलू शुक्ला और बेटे रुद्राक्ष के गर्भगृह में अनधिकृत प्रवेश से विवाद

MP Ujjain News: उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में 21 जुलाई 2025 को एक नया विवाद सामने आया, जब इंदौर के भाजपा विधायक गोलू शुक्ला और उनके बेटे रुद्राक्ष शुक्ला ने मंदिर के गर्भगृह में बिना अनुमति प्रवेश किया। इस दौरान मंदिर कर्मचारी आशीष दुबे ने रुद्राक्ष को रोकने की कोशिश की, लेकिन रुद्राक्ष ने कथित तौर पर उन्हें धमकाया।

इस घटना ने मध्य प्रदेश में सियासी और सामाजिक हलचल पैदा कर दी है, जिसमें कांग्रेस ने इसे वीआईपी संस्कृति का उदाहरण बताते हुए सरकार और मंदिर प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। मंदिर प्रशासन ने इस अनधिकृत प्रवेश को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। यह घटना मंदिर में नियम तोड़ने की एक और कड़ी है, क्योंकि इससे पहले भी गोलू शुक्ला और उनके बेटे विवादों में रहे हैं।

Controversy in Mahakal temple BJP MLA Golu Shukla his son Rudraksh entered sanctum sanctorum

घटना का विवरण: भस्म आरती के दौरान गर्भगृह में प्रवेश

महाकालेश्वर मंदिर, जो भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, में गर्भगृह में प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध है। केवल पंडे-पुजारियों को ही भस्म आरती के दौरान गर्भगृह में जाने की अनुमति है। यह प्रतिबंध 4 जुलाई 2023 से लागू है, ताकि मंदिर की पवित्रता और नियमित भक्तों की सुविधा बनी रहे।

घटना रविवार, 20 जुलाई 2025 की रात को शुरू हुई बाणेश्वरी कांवड़ यात्रा के समापन के दौरान हुई। इंदौर-3 विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक गोलू शुक्ला अपनी कांवड़ यात्रा के साथ उज्जैन पहुंचे थे। सोमवार तड़के कर workmen2:30 बजे भस्मmental healthस्म आरती के पट खुलने के बाद, गोलू शुक्ला अपने समर्थकों और बेटे रुद्राक्ष शुक्ला के साथ महाकाल मंदिर पहुंचे। इस दौरान गोलू शुक्ला, उनके बेटे रुद्राक्ष, और एक अन्य व्यक्ति ने गर्भगृह में प्रवेश किया।

मंदिर कर्मचारी आशीष दुबे ने रुद्राक्ष को गर्भगृह में प्रवेश करने से रोकने की कोशिश की, लेकिन रुद्राक्ष ने कथित तौर पर उन्हें धमकाया और अपने पिता के साथ मिलकर करीब पांच मिनट तक गर्भगृह में पूजा-अर्चना की। इस दौरान भस्म आरती का लाइव प्रसारण भी बाधित हुआ, जिसे कथित तौर पर सच छिपाने के लिए हटाया गया।

गोलू शुक्ला और रुद्राक्ष का विवादों से पुराना नाता

यह पहली बार नहीं है जब गोलू शुक्ला और उनके बेटे रुद्राक्ष मंदिर नियम तोड़ने के लिए सुर्खियों में आए हैं। इससे पहले, 2021 में रुद्राक्ष ने महाकाल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर तस्वीरें खींची थीं और उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। इसके अलावा, 2023 में रंगपंचमी के दिन भस्म आरती के दौरान रुद्राक्ष ने फिर से गर्भगृह में प्रवेश किया था, जिसके बाद मंदिर प्रशासन को बिना सूचना के नियम तोड़े जाने का मामला सामने आया था।

हाल ही में अप्रैल 2025 में, रुद्राक्ष शुक्ला और उनके सहयोगियों पर देवास के चामुंडा माता टेकरी मंदिर में देर रात जबरन प्रवेश करने और पुजारी के साथ मारपीट करने का आरोप लगा था। इस घटना के बाद सीसीटीवी फुटेज के आधार पर रुद्राक्ष सहित नौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में, रुद्राक्ष ने मंदिर में पुजारी से माफी मांगी थी।

इन बार-बार की घटनाओं ने गोलू शुक्ला और उनके बेटे की छवि को "वीआईपी संस्कृति" के प्रतीक के रूप में प्रचारित किया है, जिसके खिलाफ कांग्रेस और सामाजिक संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है।

मंदिर प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच

महाकाल मंदिर समिति के अध्यक्ष और उज्जैन जिला कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने इस घटना को अनधिकृत प्रवेश करार देते हुए तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, "गर्भगृह में किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं है। यह एक अनधिकृत प्रवेश है और मैंने मंदिर प्रशासक को इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।" मंदिर प्रशासक गणेश धाकड़ ने पुष्टि की कि इस मामले की जांच शुरू कर दी गई है और गर्भगृह के प्रवेश और अन्य पहलुओं की देखरेख करने वाले इंस्पेक्टर और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पिछले अनधिकृत प्रवेश के मामलों में भी मंदिर प्रशासन ने कार्रवाई की थी। उदाहरण के लिए, 2024 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे के गर्भगृह में प्रवेश के बाद दर्शन व्यवस्था के प्रभारी विनोद चौकसे को उनके पद से हटा दिया गया था और तीन सुरक्षा कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

सियासी हलचल और कांग्रेस का हमला

इस घटना ने मध्य प्रदेश में सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने इसे भाजपा की वीआईपी संस्कृति का उदाहरण बताते हुए तीखा हमला बोला। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने कहा, "जब आम भक्तों को घंटों कतार में खड़े होकर दर्शन करना पड़ता है, तब वीआईपी को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति देना नियमों का उल्लंघन है। हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं।" कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर प्रशासन, जो सरकार के अधीन है, केवल भाजपा नेताओं और मशहूर हस्तियों को ही गर्भगृह में पूजा करने की अनुमति देता है, जो आम भक्तों के साथ भेदभाव है।

सोशल मीडिया पर भी इस घटना की तीखी आलोचना हो रही है। एक एक्स यूजर ने लिखा, "एक बार फिर विधायक गोलू शुक्ला और उनका बेटा रुद्राक्ष शुक्ला खुद को भगवान से भी ऊपर समझ बैठे! मंदिर कर्मचारियों को खुलेआम धमकाया गया और लाइव फीड डिलीट करवा दी गई, ताकि सच बाहर न आए।" एक अन्य यूजर ने कहा, "देवास में माता टेकरी मंदिर में पुजारी के साथ बदसलूकी के बाद अब महाकाल मंदिर में गर्भगृह में जबरन प्रवेश। यह सनातनी विधायक का बेटा बार-बार नियम क्यों तोड़ रहा है?"

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा ने गोलू शुक्ला और उनके बेटे को "कलियुग का हिंदू औरंगजेब" करार दिया और कहा कि भाजपा की गंदी राजनीति ने मंदिरों की पवित्रता को भी नहीं बख्शा।

गोलू शुक्ला और रुद्राक्ष की प्रतिक्रिया

इस घटना पर गोलू शुक्ला और रुद्राक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, अप्रैल 2025 में देवास के चामुंडा माता टेकरी मंदिर विवाद के बाद रुद्राक्ष ने पुलिस में आत्मसमर्पण किया था और मंदिर में पुजारी से माफी मांगी थी। उस समय भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने इस मामले को गंभीरता से लिया था और पार्टी की छवि को नुकसान से बचाने के लिए रुद्राक्ष को माफी मांगने का निर्देश दिया गया था।

इस बार भी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वी.डी. शर्मा ने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, पार्टी के कुछ नेताओं ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। जब राज्य प्रभारी महेंद्र सिंह से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा, "आप सभी बुद्धिजीवी हैं, आप सब जानते हैं।"

मंदिर नियमों और वीआईपी संस्कृति पर सवाल

यह घटना महाकाल मंदिर में बार-बार होने वाले नियम उल्लंघन की श्रृंखला में एक और कड़ी है। इससे पहले भी कई भाजपा नेताओं और उनके रिश्तेदारों पर गर्भगृह में अनधिकृत प्रवेश के आरोप लगे हैं। उदाहरण के लिए:

  • 2021 में, भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने गर्भगृह में प्रवेश किया था।
  • 2024 में, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे ने भी गर्भगृह में प्रवेश किया था, जिसके बाद जांच हुई थी।
  • 2024 में, भाजपा विधायक अनिल जैन पर भी नियम तोड़कर गर्भगृह में पूजा करने का आरोप लगा था।

इन घटनाओं ने मंदिर प्रशासन पर सवाल उठाए हैं कि आखिर क्यों वीआईपी लोगों को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति दी जाती है, जबकि आम भक्तों को लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है। कांग्रेस ने इसे "दोहरे मापदंड" का उदाहरण बताया है और मांग की है कि गोलू शुक्ला और उनके बेटे के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।

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