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Explainer: उदयपुर ने मार्बल आयात बंद कर तुर्किये को कितने करोड़ का झटका दिया? भारत को क्‍या नुकसान?

Udaipur Turkey Marble Ban: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान का समर्थन करने वाले तुर्किये (तुर्की) के खिलाफ भारतीय व्यापारियों ने आर्थिक मोर्चा खोल दिया है। तुर्किये को सबसे बड़ा झटका राजस्थान के उदयपुर से मिला है, जहां मार्बल व्यापारियों ने तुर्की से संगमरमर का आयात पूरी तरह बंद कर दिया है।

आखिर उदयपुर के व्यापारी तुर्किये से इतना मार्बल क्यों मंगवाते थे? इस बैन से किसे और कितना नुकसान होगा? इसकी भरपाई कैसे होगी? इन तमाम सवालों के जवाब वनइंडिया हिंदी से बातचीत में उदयपुर मार्बल एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज गंगावत ने दिए हैं।

Udaipur Turkey Marble Ban

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1. Udaipur Marble Mandi: उदयपुर के व्यापारियों ने तुर्किये से मार्बल आयात बंद करने का फैसला क्यों लिया?

पहलगाम हमले का बदला लेने के लिए 6-7 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की। इसके जवाब में 8 मई 2025 को खबर आई कि पाकिस्तान की ओर से भारत पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया गया, जिनमें से कई ड्रोन मेड इन तुर्की बताए गए।

पंकज गंगावत कहते हैं, "तुर्किये भारत से मुनाफा कमा रहा है और उसी पैसे से पाकिस्तान को ड्रोन देकर हमारे खिलाफ इस्तेमाल करवा रहा है। इसलिए उदयपुर मार्बल व्‍यापारियों ने 8 मई को मार्बल चैंबर कार्यालय में बैठक बुलाकर निर्णय लिया कि तुर्की से अब कोई व्यापार नहीं करेंगे। हमें उसे आर्थिक चोट पहुंचानी है और भारत में इसकी शुरुआत उदयपुर से होनी चाहिए।"

Pankaj Gangawat President of Udaipur Marble Association

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2. उदयपुर हर साल तुर्किये से कितना मार्बल मंगवाता है?

राजस्थान की झीलों की नगरी उदयपुर का सुखेर औद्योगिक क्षेत्र एशिया की सबसे पुरानी और बड़ी मार्बल मंडी माना जाता है। यहां के करीब 50 बड़े व्यापारी हर साल तुर्किये से 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये का मार्बल (ब्लॉक और स्लैब) आयात करते हैं। इस मार्बल की प्रोसेसिंग और फिनिशिंग के बाद देशभर में इसकी आपूर्ति की जाती है।

3. भारत तुर्किये से कुल कितना मार्बल आयात करता है?

भारत हर साल लगभग 14 लाख मीट्रिक टन मार्बल आयात करता है, जिसमें से करीब 70% यानी 10 लाख मीट्रिक टन मार्बल सिर्फ तुर्की से आता है। इसकी कीमत करीब 2,000 से 2,500 करोड़ रुपये होती है। यदि भारत में तुर्की मार्बल का बहिष्कार होता है तो तुर्की की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है।

Udaipur Turkey Marble Ban

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4. जब मकराना और कोटा स्टोन हैं, तो उदयपुर तुर्की का मार्बल क्यों मंगवाता है?

राजस्थान का मकराना मार्बल और कोटा स्टोन पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं, लेकिन इसके बावजूद उदयपुर के व्यापारी तुर्की से मार्बल मंगवाते हैं। वजह है-उपभोक्ताओं की डिमांड। विदेशी मार्बल के नाम पर ग्राहकों की पहली पसंद तुर्की का स्टोन होता है। यह राजस्थान के मार्बल से चार गुना महंगा है, फिर भी इसकी मांग बनी रहती है। तुर्की के मार्बल की कीमत करीब 200-250 रुपये प्रति स्क्वायर फीट है, जबकि इसकी गुणवत्ता और सुंदरता कई बार राजस्थान के मार्बल से कमतर मानी जाती है।

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5. तुर्की का मार्बल उदयपुर तक कैसे पहुंचता है?

मार्बल के ब्लॉक और स्लैब काफी भारी और बड़े होते हैं, जिन्हें सड़क मार्ग से एक जगह से दूसरी जगह ले जाना काफी खर्चीला और समयसाध्य होता है, इसलिए तुर्की के इस्केंडरुन बंदरगाह (इस्देमीर) से समुद्री जहाजों के माध्यम से मार्बल सबसे पहले भारत के गुजरात राज्य स्थित अडानी पोर्ट, मुंद्रा तक लाया जाता है, जो कि समुद्री रास्ते से लगभग 3707 नॉटिकल मील (करीब 3933 किलोमीटर) की दूरी पर स्थित है।

इसके बाद मुंद्रा से ट्रकों के जरिए लगभग 578 किलोमीटर की दूरी तय करके यह मार्बल उदयपुर की मार्बल मंडी तक पहुंचता है, जहां इसकी प्रोसेसिंग, कटिंग और फिनिशिंग होती है, और फिर यहीं से पूरे देश में इसकी आपूर्ति की जाती है।

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6. बैन का असर किन-किन पर पड़ेगा?

तुर्की से मार्बल का आयात बंद करने का सीधा असर उदयपुर की मार्बल इंडस्ट्री में काम करने वाले करीब 15 हजार मजदूरों, कारीगरों, ड्राइवरों, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों, मशीन ऑपरेटरों, और पॉलिशिंग व कटिंग से जुड़े मजदूरों पर पड़ सकता है, क्योंकि तुर्की से आने वाला मार्बल उच्च मांग वाला उत्पाद था और इसकी प्रोसेसिंग में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रमिक लगे रहते थे। इसके अलावा, आयात बंद होने से ट्रांसपोर्ट और बंदरगाह आधारित सप्लाई चेन से जुड़े छोटे व्यापारियों, ठेकेदारों और हैंडलिंग यूनिट्स की आमदनी भी प्रभावित हो सकती है, जिससे इन सबके रोजगार और आर्थिक सुरक्षा पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

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7. इस नुकसान की भरपाई कैसे की जाएगी?

एसोसिएशन अध्यक्ष पंकज गंगावत का कहना है कि देशहित में लिया गया यह फैसला कुछ समय के लिए व्यापार में असर जरूर डालेगा, लेकिन इसका विकल्प तलाशा जा रहा है। उनका कहना है कि राजस्‍थान के राजसमंद, मकरान और मध्‍य प्रदेश के कटनी में अच्‍छी गुणवत्‍ता वाले देसी मार्बल खनन होता है, उसकी मांग को दोबारा जीवित किया जाएगा। अन्‍य विकल्‍प के बारे में स्थानीय सरकार और उद्योग मंत्रालय से सहयोग की मांग भी की जाएगी ताकि मजदूरों को रोजगार और व्यापारियों को स्थिरता मिल सके।

8. क्या तुर्की पर यह बैन स्थायी रहेगा?

एसोसिएशन का कहना है कि यह फैसला तब तक जारी रहेगा जब तक तुर्की पाकिस्तान जैसे आतंकवाद समर्थक देशों का खुला या छिपा समर्थन करता रहेगा और भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहेगा। यदि भविष्य में तुर्की की नीति में कोई बदलाव आता है और वह भारत के साथ मित्रवत व्यवहार करता है, तो उस स्थिति में एसोसिएशन इस बैन पर पुनर्विचार कर सकती है, लेकिन तब तक यह बैन जारी रहेगा और व्यापारियों को इससे पीछे हटने का कोई इरादा नहीं है।

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