Teachers Day: झगड़ा, जुदाई और फिर इतिहास, मनु-राणा की कहानी है असली गोल्ड
Teachers Day 2025, Manu Bhaker: भारतीय खेल जगत में गुरु और शिष्य की कुछ जोड़ियों का जिक्र किया जाता है, तो उसमें मेहनत, समर्पण और उत्साह दिखाई देता है। ऐसी ही एक जोड़ी शूटिंग में भारत को मिली, जिसने मिलकर पेरिस ओलंपिक में भारत के लिए सफलता का नया आयाम लिख डाला। हम बात कर रहे हैं मनु भाकर और उनके कोच जसपाल राणा की।
जसपाल राणा ने खुद 2006 के दोहा एशियाई खेलों में बुखार के बावजूद खेलते हुए तीन गोल्ड जीते थे। यह एक ऐसा कीर्तिमान है, जिसे आज तक कोई भारतीय शूटर नहीं तोड़ पाया है। शूटिंग को अलविदा कहने के बाद जसपाल राणा कोचिंग में आए।

कोचिंग में आने के बाद उन्होंने मनु भाकर और सौरभ चौधरी जैसी युवा प्रतिभाओं को तराशने का काम किया। इस दौरान दोनों ने मिलकर काम किया लेकिन किसी कारणवश हुए झगड़े के बाद राह अलग हो गई। मनु भाकर टोक्यो ओलंपिक से पहले जसपाल राणा से अलग हो गईं।
झगड़े के बाद अलग हुए और फिर आए साथ
टोक्यो ओलंपिक में मनु का प्रदर्शन बेहद खराब रहा, हर तरफ उनकी आलोचना की गई। मनु भाकर एकदम टूट गई थीं। उस समय जसपाल राणा ने एक बार फिर से मनु भाकर का हाथ थामा, दोनों एक साथ आए और पेरिस ओलंपिक की तैयारी में लग गए। साल 2024 आते ही दोनों ने मिलकर देश के लिए इतिहास रच दिया। एक ही ओलंपिक में मनु ने दो पदक जीत डाले। मनु के कोच ने इस सफलता का सपना देखा था और रात-दिन मेहनत की थी।
मनु भाकर ने भी दिया कोच को क्रेडिट
एक गुरु के मन में शिष्य के प्रति कोई मनमुटाव या भेदभाव नहीं होता। शुरू से ही जसपाल राणा ने मनु भाकर में वह स्पार्क देखा था। इस वजह से उन्होंने भी ठान लिया था कि कुछ भी हो जाए लेकिन ओलंपिक में पदक आना ही चाहिए। टोक्यो में हार के बाद आलोचना का सामना करने वाली मनु भाकर पर आज हर भारतीय गर्व करता है। इसमें उनके कोच जसपाल राणा का योगदान रहा है और मनु भाकर ने खुद उनको क्रेडिट दिया।












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