Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

OI Exclusive: भारत में दिखेगा आर्म रेसलिंग का जलवा, परवीन डबास ने बताया प्लान, देश को मिलेगी नई पहचान

OI Exclusive Interview With Parvin Dabas: बॉलीवुड में कई ऐसे कलाकार हैं, जिनकी फिल्मी पारी पर्दे पर लंबी भले न रही हो, लेकिन अपनी मेहनत और विजन के दम पर उन्होंने दूसरी फील्ड में नया इतिहास रचा है। 12 जुलाई 1974 को दिल्ली के कंझावला में जन्मे परवीन डबास की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। परवीन डबास की शिक्षा दिल्ली के प्रतिष्ठित मॉडर्न स्कूल और हंसराज कॉलेज से हुई। 'मॉनसून वेडिंग', 'खोसला का घोसला' और 'माई नेम इज खान' जैसी बड़ी फिल्मों में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाने के बावजूद, परवीन को लगा कि उनकी असली मंजिल कहीं और है।

परवीन ने की वनइंडिया हिंदी से खास बातचीत (OI Exclusive Interview With Parvin Dabas)

हाल ही में वनइंडिया हिंदी से खास बातचीत में परवीन ने अपने इस रोमांचक सफर के राज खोले। एक्टिंग की दुनिया से निकलकर आज वे एक सफल स्पोर्ट्स एंटरप्रेन्योर बन चुके हैं। उन्होंने अपनी पत्नी और एक्ट्रेस प्रीति झंगियानी के साथ मिलकर 'प्रो पंजा लीग' की शुरुआत की। जिस खेल को हम गलियों का खेल समझते थे, उसे परवीन ने 250 मिलियन व्यूज वाला एक प्रोफेशनल स्पोर्ट्स ब्रांड बना दिया है। आइए जानते हैं परवीन डबास ने हमसे बात करते हुए किन चीजों के बारे में बात की है।

OI Exclusive

1. प्रो पंजा लीग को शुरू करने का आइडिया कब और कैसे आया?

प्रो पंजा लीग को शुरू करने का विचार पहली बार साल 2017 में आया। हम स्पोर्ट्स प्रमोशन के क्षेत्र में कदम रखना चाहते थे और हमारी तलाश एक ऐसे खेल की थी जहां हमारे आने से वास्तव में कोई बदलाव आए। हम ऐसे खेल में नहीं जाना चाहते थे जहां पहले से ही बहुत भीड़ हो। जब हमने सोचना शुरू किया, तो हमारे दिमाग में यह बात स्पष्ट थी कि खेल ऐसा हो जो पूरे भारत का लगे और जिसमें हर वर्ग का बच्चा भाग ले सके। तब हमें अहसास हुआ कि बचपन में हम सबने कभी न कभी पंजा लड़ाया है। हालांकि इस पर पहले किसी ने ध्यान नहीं दिया था, लेकिन हमें यकीन था कि अगर इसे सही तरीके से मार्केट और प्रमोट किया जाए, तो यह एक बहुत बड़ा खेल बन सकता है। इसी विजन के साथ हमने इसकी शुरुआत की।

2. सीजन 2 के 250 मिलियन व्यूज-क्या ये आपके लिए सबसे बड़ी जीत है?

बिल्कुल! किसी भी खेल की सफलता और उसकी पहचान उसकी 'व्यूअरशिप' (दर्शक संख्या) से ही होती है। इस सीजन में हमें 250 मिलियन (25 करोड़) की कवरेज मिली, जो बेहद शानदार है। इसका मतलब है कि लोग इस खेल को पसंद कर रहे हैं। जब लोग, बच्चे और परिवार मिलकर किसी खेल को देखते हैं, तो एक स्पोर्ट्स प्रमोटर के तौर पर वह हमारी सबसे बड़ी जीत होती है।

OI Exclusive

3. भारत में आर्म रेसलिंग को मेनस्ट्रीम बनाने में सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?

सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि लोगों को यह अंदाजा नहीं था कि पेशेवर आर्म रेसलिंग कैसी दिखेगी। जब आईपीएल शुरू हुआ, तब लोग 50 ओवर के क्रिकेट से परिचित थे, लेकिन पंजा सबको पता होने के बावजूद एक 'प्रोफेशनल स्पोर्ट' के रूप में नया था। न ही टीवी चैनलों को और न ही दर्शकों को इसके रोमांच का पता था। इसे लोगों को समझाना मुश्किल था। हमने वर्ल्ड क्लास प्रोडक्शन और एक बड़े प्लेटफॉर्म के जरिए इसे पेश किया। पहले सीजन के पहले दिन के बाद ही लोगों को समझ आ गया कि यह एक बेहतरीन मेनस्ट्रीम स्पोर्ट बनने वाला है।

4. प्रो पंजा लीग को IPL या PKL जैसा ब्रांड बनाने का अगला प्लान क्या है?

हमारा प्लान इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का है। सीजन 3 में हम दुनिया के बेहतरीन इंटरनेशनल प्लेयर्स को लेकर आ रहे हैं। उससे पहले हम भारत में वर्ल्ड चैंपियनशिप भी आयोजित कर रहे हैं। हालांकि, मैं इसकी तुलना आईपीएल से नहीं करना चाहूंगा, क्योंकि क्रिकेट का अपना एक अलग मुकाम है। लेकिन हम दर्शकों को वही 'मसाला' और 'एंटरटेनमेंट' देना चाहते हैं जो वे आईपीएल में देखते हैं। हमारा लक्ष्य खेल के स्तर को लगातार ऊंचा उठाना है।

5. एक्टर से स्पोर्ट्स एंटरप्रेन्योर बनने का सफर कितना मुश्किल रहा?

मैं खुद को सिर्फ स्पोर्ट्स एंटरप्रेन्योर नहीं कहूंगा, क्योंकि मैं और प्रीति अभी भी एक्टिंग कर रहे हैं। कलाकार होने का फायदा यह मिलता है कि मीडिया का ध्यान जल्दी मिल जाता है। लेकिन चुनौती यह आती है कि लोग कई बार सोचते हैं कि "ये तो एक्टर हैं, इन्हें बिजनेस या स्पोर्ट्स की क्या समझ होगी?" इसलिए हमने इस लीग को 'हैंड्स ऑन' रखा है। हम इसके विजन और काम में पूरी तरह डूबे रहते हैं। हम कलाकारों की तरह नहीं, बल्कि एक स्पोर्ट्स पर्सन के दिमाग से काम करते हैं।

6. आपके मुताबिक एक एथलीट की असली ताकत-शरीर या दिमाग?

असली ताकत सिर्फ शरीर या सिर्फ दिमाग में नहीं है, बल्कि दोनों का तालमेल है। हर खेल में 'रणनीति' की जरूरत होती है। चाहे क्रिकेट हो, कबड्डी हो या पंजा, आपको दिमाग का इस्तेमाल करके ही अपनी शारीरिक शक्ति को सही दिशा में लगाना पड़ता है।

OI Exclusive

7. आज के युवाओं में स्ट्रेस और मेंटल प्रेशर बड़ा मुद्दा बन चुका है, आप इसे कैसे देखते हैं?

मुझे लगता है कि आजकल 'स्ट्रेस' और 'मेंटल प्रेशर' जैसे शब्दों को जरूरत से ज्यादा बढ़ावा दिया जा रहा है। आप जितना इन शब्दों को दोहराएंगे, उतना ही दबाव महसूस करेंगे। यह काफी हद तक दिमाग का खेल है। प्रेशर हर खेल में होता है, लेकिन एक अच्छा खिलाड़ी वही है जो इसे स्ट्रेस में नहीं बदलने देता। वह उस दबाव को एक चुनौती की तरह इस्तेमाल करता है और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता है।

8. खुद प्रवीन डबास स्ट्रेस को कैसे मैनेज करते हैं?

मैं स्ट्रेस नहीं लेता। काम का दबाव जरूर आता है, लेकिन मैंने सीखा है कि स्ट्रेस लेने का कोई फायदा नहीं है। स्ट्रेस अक्सर उन लोगों को होता है जिनकी तैयारी पूरी नहीं होती। तैयारी जितनी मजबूत होगी, तनाव उतना ही कम होगा। हम हर टूर्नामेंट से पहले इतनी गहरी तैयारी करते हैं कि स्ट्रेस की गुंजाइश ही नहीं बचती।

OI Exclusive

9. क्या आप मानते हैं कि मेंटल फिटनेस पर अभी भी भारत में खुलकर बात नहीं होती?

मेंटल फिटनेस पर बात होनी चाहिए और एथलीट्स की मदद भी की जानी चाहिए, लेकिन यह एक दोधारी तलवार है। अगर हम इसे जरूरत से ज्यादा तूल देंगे, तो जिन लोगों को समस्या नहीं भी है, वे भी खुद को स्ट्रेस्ड महसूस करने लगेंगे। असली मदद यह है कि एथलीट को मजबूत बनाया जाए और उसका ध्यान समस्या से हटाकर समाधान और तैयारी की ओर लगाया जाए। तैयारी ही मेंटल फिटनेस को मजबूत करने का सबसे कारगर तरीका है।

10. इंटरनेशनल इवेंट्स और 2026 वर्ल्ड चैंपियनशिप भारत के लिए कितने अहम हैं?

इंटरनेशनल इवेंट्स बहुत अहम हैं क्योंकि इनसे भारतीय एथलीट्स को विश्व स्तरीय प्रतिस्पर्धा मिलती है। हमने 2024 में एशियन कप और 2025 में एशियन चैंपियनशिप करवाई। अब सबसे बड़ी खबर यह है कि 2026 में वर्ल्ड आर्म रेसलिंग चैंपियनशिप के राइट्स हमें मिले हैं। इसमें 75 से ज्यादा देशों के 2000 खिलाड़ी आएंगे। यह भारतीय खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा तोहफा है कि दुनिया का सबसे बड़ा आर्म रेसलिंग इवेंट उनके अपने देश में होगा। इससे देश में इस खेल का स्तर बहुत ऊपर जाएगा।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+