धर्म को खेल के बीच में लाना पड़ा भारी, जानिए झण्डे में क्या था जिसके कारण ईरान से छीना गया गोल्ड मेडल
Paralympics 2024: पैरालंपिक समाप्त होने से पहले विवाद देखने को मिला। एक एथलीट का मेडल भी वापस ले लिया गया। ईरान के एथलीट की हरकत से बड़ा घटनाक्रम हुआ और इसकी बदौलत भारत के एथलीट को गोल्ड मेडल मिल गया। भारतीय एथलीट के पास सिल्वर मेडल था।
जैवेलिन थ्रो के F41 इवेंट में ईरान ने गोल्ड मेडल हासिल किया था और भारत के नवदीप सिंह ने सिल्वर मेडल हासिल किया था जिसे बाद में अपग्रेड करते हुए गोल्ड मेडल में बदल दिया गया। ईरान के सयाह बेत को जश्न मनाना भारी पड़ गया और मेडल भी चला गया।

जीत के बाद बेत ने एक झण्डा लेकर जश्न मनाया, इसे इंटरनेशनल पैरालंपिक समिति ने नियमों के विरुद्ध माना और तत्काल कार्रवाई भी कर दी गई। इससे भारत के नवदीप का सिल्वर मेडल गोल्ड में बदल गया। सयाह ने जो झण्डा हाथ में लेकर लहराया था, उसमें ऊर्दू भाषा में कुछ लिखा हुआ था।
नियमों के अनुसार जीत दर्ज करने वाला खिलाड़ी सिर्फ अपने देश का झण्डा ही लहरा सकता है, अन्य किसी भी तरह के झण्डे को लहराना मना है। सयाह बेत ने यहाँ गलती की और यह झण्डा भी धर्म से जुड़ा हुआ था। काले रंग के इस झण्डे को आईएसआईएस का भी बताया गया लेकिन सच कुछ और ही निकला।
यह झण्डा धर्म से जुड़ा हुआ था और इसे लेकर ही उनके ऊपर कार्रवाई हुई और मेडल छीन लिया गया। इस्लाम ने शिया धर्म का प्रतीक लेकर वह लहरा रहे थे। यह झण्डा इस्लाम के शिया धर्म का था। उनको धर्म से जुड़ा यह कृत्य करना भारी पड़ गया और मेडल ले लिया गया।
खेल में अखण्डता, नैतिकता और आचरण के नियमों को आचार संहिता के नियम 8.1 में रखा गया है। इस दौरान किसी भी तरह का धार्मिक जश्न मनाने की इजाजत नहीं है। इस वजह से ईरानी एथलीट के ऊपर आचार संहिता उल्लंघन के चलते एक्शन लिया गया।












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