Khelo India Youth Games: बिहार में कर्नाटक का गौरव बनकर उभरीं मानवी वर्मा, जानिए उनके बारे में कुछ ख़ास

Khelo India Youth Games: युवा तैराकी सनसनी मानवी वर्मा ने बिहार में खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025 में कर्नाटक के दबदबे को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने BIPARD स्विमिंग पूल में तीन स्वर्ण और एक रजत पदक जीता, जिससे कर्नाटक के 17 स्वर्ण सहित कुल 33 पदक जीतने में महत्वपूर्ण योगदान मिला।

50 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में चौथा स्वर्ण जीतने से चूकने के बावजूद, मानवी ने संयम बनाए रखा। उन्होंने कहा, "हर कोई हर स्पर्धा में स्वर्ण जीतने का सपना देखता है, लेकिन मैं इस बारे में बहुत ज़्यादा नहीं सोचती। मैं बस हर रेस को अच्छी तरह से तैरने की कोशिश करती हूँ। अगर मैं जीत जाती हूँ, तो बहुत अच्छा है, अगर नहीं, तो भी कोई बात नहीं।"

Khelo India Youth Games

मानवी का सफर और उपलब्धियां: यह खेलो इंडिया यूथ गेम्स में मानवी की तीसरी उपस्थिति थी। 16 वर्षीय एथलीट ने हर साल लगातार सुधार दिखाया है। 2022 में, उसने 200 मीटर व्यक्तिगत मेडले में कांस्य पदक जीता। 2023 तक, उसने 200 मीटर मेडले और 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक दोनों में रजत पदक हासिल कर लिया था।

इस साल, उसने 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक, 50 मीटर बटरफ्लाई और 200 मीटर मेडले में स्वर्ण पदक के साथ-साथ 50 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में रजत पदक जीता। जब उनसे उनके निरंतर सुधार के बारे में पूछा गया, तो मानवी ने कहा कि, "ईमानदारी से कहूं तो यह सिर्फ ट्रेनिंग और अधिक ट्रेनिंग। जितना अधिक आप प्रशिक्षण लेंगे, उतना ही बेहतर होंगे।"

प्रशिक्षण और सहायता प्रणाली: मानवी बेंगलुरु में पादुकोण-द्रविड़ सेंटर फॉर स्पोर्ट्स एक्सीलेंस में स्थित डॉल्फिन एक्वेटिक्स अकादमी में प्रशिक्षण लेती हैं। यह अकादमी खेलो इंडिया द्वारा मान्यता प्राप्त है। उन्होंने 2023 में गोवा में होने वाले राष्ट्रीय खेलों में भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया, जिसमें 200 मीटर मेडले और 50 मीटर बटरफ्लाई दोनों स्पर्धाओं में रिकॉर्ड बनाए।

विश्व जूनियर चैंपियनशिप में उनकी भागीदारी ने उनके भविष्य की संभावनाओं को बढ़ा दिया है। उनके इस सफ़र में उनके परिवार का अहम योगदान रहा है। दस साल पहले, वे उनके करियर को सहारा देने के लिए दिल्ली से बेंगलुरु चले गए। उनकी माँ रमा वर्मा ने उनके रास्ते को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। र

परिवार की भूमिका और भविष्य की आकांक्षाएँ: मानवी की मां ने कहा, "मैंने अपने बच्चों को कभी टीवी देखने की अनुमति नहीं दी, मैं चाहती थी कि वे खेल खेलें।" तैराकी चुनने से पहले मानवी ने कई तरह के खेल आज़माए। मानवी ने अपने माता-पिता के योगदान पर खुलकर बात की।

मानवी ने कहा कि "बचपन में, आप ज़्यादा कुछ नहीं जानते, आप अपने माता-पिता पर निर्भर रहते हैं जो आपके हित के बारे में सोचते हैं। मैं अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए तैराकी में अपना करियर बनाना चाहती हूं, फ़िलहाल मेरा ध्यान तैराकी पर है।"

आपको बता दें कि खेलो इंडिया यूथ गेम्स 14 अक्टूबर, 2017 को शुरू किए गए खेलो इंडिया कार्यक्रम का हिस्सा हैं। इस पहल का उद्देश्य पूरे भारत में खेलों में व्यापक भागीदारी और उत्कृष्टता को बढ़ावा देना है। इस कार्यक्रम के कई एथलीटों ने ओलंपिक और एशियाई खेलों जैसे आयोजनों में वैश्विक स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

बिहार इन खेलों के सातवें संस्करण की मेज़बानी 4-15 मई तक पाँच शहरों और दिल्ली में कर रहा है। KIYG 2025 में 27 खेल विधाओं में प्रतियोगिताएँ होंगी, जिसमें पहली बार ईस्पोर्ट्स को एक प्रदर्शनी खेल के रूप में शामिल किया गया है।

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