PR Sreejesh Love Story: जब दुश्मन से हो गई बेइंतहा मोहब्बत, दिलचस्प है ओलंपिक चैंपियन श्रीजेश की प्रेम कहानी
PR Sreejesh Love Story: पेरिस ओलंपिक में देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल दिलाकर इंटरनेशनल हॉकी से रिटायर होने वाले गोलकीपर पीआर श्रीजेश के शानदार करियर की तरह ही उनकी प्रेम कहानी भी काफी दिलचस्प है। ये लव स्टोरी बेइंतहा नफरत से शुरू होती है और बेशुमार मोहब्बत पर खत्म होती है।
श्रीजेश को शुरुआत में अनीश्या से नफरत होती है- क्योंकि वह स्कूल में उससे बेहतर थी। लेकिन जैसा कि बॉलीवुड फिल्मों में होता है, "नफरत" के बाद प्यार होता है। इस तरह केरल के जीवीएन स्पोर्ट्स स्कूल में पी आर श्रीजेश और अनीश्या के बीच रोमांस की शुरुआत हुई।

श्रीजेश ने खुद बताया कैसे अनीश्या के प्यार में पड़ गए
आखिरकार, लॉन्ग जंपर ने भी भविष्य की राष्ट्रीय हॉकी गोलकीपर को अपना हमसफर मान लिया। पेरिस ओलंपिक के बाद राष्ट्रीय टीम से संन्यास लेने वाले श्रीजेश ने पीटीआई से बातचीत के दौरान अपनी प्रेम कहानी के बारे में खुलकर बताया कि कैसे वह अनीश्या के प्यार में पड़ गए। जब अनीश्या ने 2001 में दाखिला लिया था, तब वह कन्नूर स्थित स्पोर्ट्स स्कूल में पढ़ रहे थे।
श्रीजेश को अनीश्या से इसलिए हुई नफरत
श्रीजेश अपने स्कूल के दिनों में एक अव्वल दर्जे के छात्र थे, उनको हमेशा अच्छे नंबर मिलते थे। टीचर्स के पसंदीदा थे, लेकिन उनकी होशियारी तब धरी की धरी रह गई, जब स्कूल में अनीश्या नाम की एक लडकी ने दाखिला लिया, जोकि पढ़ाई में उनसे बेहतर थी और उनसे अच्छे नंबर लाकर आगे भी निकल गई।
जब नफरत मोहब्बत में बदलने लगी
बस यहीं से दोनों के बीच जान-पहचान कम और तकरार ज्यादा हो गई, लेकिन धीरे-धीरे समय बीता तो ये नफरत कम होने लगी और दोनों एक दूसरे को अच्छे से समझने लगे, और जितना एक दूसरे को समझा उतनी ही दोस्ती गहरी होती गई। श्रीजेश के दिलों दिमाग पर अब सिर्फ अनीश्या का कब्जा था, मतलब हॉकी का बादशाह प्यार में पड़ गया। एक दूसरे के साथ एक लंबा वक्त बिताने के बाद दोनों ने शादी करने का फैसला लिया।
दोनों के बीच की ये मोहब्बत कितनी गहरी है, इसका सबूत देखना हो तो उनकी हॉकी स्टिक पर नज़र डाल सकते हैं- जहां उनकी पत्नी अनीश्या का नाम एक कस्टमाइज़्ड स्टिक पर लिखा गया था, जिसका इस्तेमाल 36 वर्षीय करिश्माई गोलकीपर ने खेलों में किया, और ब्रॉन्ज मेडल के साथ अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत किया।
साल 2013 में दोनों शादी के बंधन में बंधे
अनीश्या, जो अब एक आयुर्वेद डॉक्टर हैं, उन्होंने 2013 में श्रीजेश से एक मंदिर में शादी की, जहां केवल करीबी परिवार और दोस्त ही मौजूद थे। श्रीजेश ने खुलासा किया कि जब उन्होंने हॉकी खेलना शुरू किया, तो उनका एकमात्र उद्देश्य एक अच्छी नौकरी पाना था, जो अनीश्या के माता-पिता को यह समझाने के लिए भी महत्वपूर्ण था कि वह उसकी लड़की के लिए योग्य हैं।
यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि उन्होंने जीवन में जीत हासिल की, जिस लड़की से वे प्यार करते थे उससे शादी करने में सफल रहे और फिर जिस खेल को उन्होंने चुना, उसमें युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए।
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श्रीजेश और अनीश्या के दो बच्चे हैं - बेटा श्रीयांश और बेटी अनुश्री। उनके नाम हॉकी स्टिक पर भी लिखे हैं, जिनका इस्तेमाल श्रीजेश ओलंपिक खेलों के मैचों में बारी-बारी से करते थे। श्रीजेश की कहानी खेल से परे है, जोकि उनके समर्पण, प्रेम और परिवार से भरे जीवन को दर्शाती है।












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