Fifa World Cup: गोल दागने के बाद ‘Captain America’ अस्पताल में, दर्द के बाद भी मोबाइल पर देखता रहा मैच

अमेरिका के मुख्य कोच ग्रेग बरहाल्टर ने कहा, क्रिश्चियन टीम में जोश भरने वाला खिलाड़ी है। वह इतना तेज मूव बनाता है कि विपक्षी डिफेंडरों को रोकना मुश्किल हो जाता है।

विश्वकप फुटबॉल 2022, दोहा का अल थुआमा स्टेडियम। खिलाड़ी हो तो ऐसा। उसने गोल किया। फिर जाना पड़ा अस्पताल। टीम मुश्किल में थी और जीत जरूरी थी। अंतिम 16 का टिकट इसी मैच के नतीजे से तय होना था। उसने एक गोल कर टीम को बढ़त दिला दी थी और खुद अस्पताल में दर्द से कराह रहा था। इस बात ने टीम के इरादों को मजबूत कर दिया। इस लीड को हर हाल में कायम रखना था। ये टीम और अपने साथी खिलाड़ी के सम्मान की बात थी। टीम ने किया भी ऐसा ही। रक्षक गोल एरिया में दीवार की तरह खड़े हो गये। विपक्षी टीम किला नही भेद सकी। एक गोल की बढ़त 38वें मिनट में मिली थी जो अंत तक कायम रही। जब मैच खत्म होने की आखिरी सीटी बजी, तो अस्पताल के बेड पर पड़ा 'कैप्टन अमेरिका' दर्द भूला कर खुशियों से उछल पड़ा। फिर उसने ट्वीट किया, मुझे अपने साथी खिलाड़ियों पर गर्व है। चिंता मत करो, मैं शनिवार के मैच के लिए पूरी तरह तैयार रहूंगा। ये कारनामा किया अमेरिकी फुटबॉल टीम विंगर क्रिश्चियन पुलिसिक ने। वे मिडफील्डर भी हैं और तेज हमला करने वाले विंगर भी। टीम के साथी खिलाड़ी इन्हें कैप्टन अमेरिका के नाम से बुलाते हैं। अमेरिका के लिए यह जीत इसलिए भी यादगार है क्यों कि उसने अपने सियासी दुश्मन ईरान को हराया।

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क्रिश्चियन पुलिसिक ने दिलायी यादगार जीत

क्रिश्चियन पुलिसिक ने सोशल मीडिया पर खुद एक तस्वीर पोस्ट की जिसमें वे अस्पताल के बेड पर खुशियों से चिल्ला रहे हैं। जब पुलिसिक ने गोल (38वें मिनट) किया तो वे ईरान के गोलकीपर अलीरजा के साथ बुरी तरह टकरा गये। उनके पेट की मांसपेसियों में गंभीर चोट लगी जिसके वे दर्द से कराहने लगे। दर्द बढ़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। पुलिसिक को बीच में मैच छोड़ने पर चिंता हो रही थी। अस्पताल जाते समय उन्होंने अपना मोबाइल फोन साथ रख लिया। मोबाइल पर ही उन्होंने मैच का नतीजा जाना। अमेरिका के निवासियों के लिए यह गोल एक बेशकीमती तोहफा है। वे आज भी उस घटना के भूले नहीं है जब ईरान ने 1979 में 52 अमेरिकियों को बंधक बना कर एक साल तक कब्जे में रखा था। ये महाशक्ति अमेरिकी के लिए तौहीन की बात थी। ईरान ने उसके जख्म को तब और हरा कर दिया था जब उसने 1998 के विश्व कप में अमेरिका का हरा दिया था। अमेरिका को ये बात कई साल से साल रही थी। 2022 में इस जीत से अमेरिका ने न केवल अपना पुराना हिसाब चुकता कर लिया बल्कि प्रीक्वार्टर फाइनल में जाने का टिकट भी कटा लिया।

"आगे की चिंता नहीं, हम अभी जीत का आनंद ले रहे हैं"

अमेरिका के मुख्य कोच ग्रेग बरहाल्टर ने कहा, क्रिश्चियन टीम में जोश भरने वाला खिलाड़ी है। वह इतना तेज मूव बनाता है कि विपक्षी डिफेंडरों को रोकना मुश्किल हो जाता है। हमें इस बात की खुशी है कि वह अस्पताल में बिल्कुल ठीक है। हमरा पहला लक्ष्य था इस मैच को जीत कर नॉक आऊट दौर में पहुंचना। यह बहुत अहम मैच था। कुछ भी हो सकता था। लेकिन हम लोगों ने आखिरकार लक्ष्य पा लिया। हम कितनी दूर तक जाएंगे, इस पर कुछ नहीं कह सकते। हमारा अगला मैच नीदरलैंड से है और अभी केवल इसके बारे में ही सोच रहे हैं। अंतिम 16 में पहुंचने पर बहुत अच्छा लग रहा है। हम अभी इसका आनंद ले रहे हैं।

टीम की हार पर ईरान में खुशी

ईरान की भी दिली तमन्ना यही रहती है कि वह कम से कम फुटबॉल के मैदान में अमेरिका को जरूर हरा दे। लेकिन इस बार विश्वकप में ईरान की टीम अपने देश की राजनीतिक अफरा-तफरी से बहुत प्रभावित रही। दरअसल ईरान में महिला अधिकारों के लिए एक सशक्त आंदोलन चल रहा है। ईरान की औरतें परिधानों की पाबंदी का विरोध कर रही हैं। इस आंदोलन के बीच जब ईरान की टीम अमेरिका से हार गयी तो आंदोलन समर्थक खुशी मनाने लगे। उनका मानना है कि विश्वकप में खेल रही ईरान की टीम सरकार का प्रतिनिधित्व करती है। टीम की हार सरकार की हार है। महिला अधिकारों के समर्थक सरकार की इस हार पर जश्न मनाने लगे। कतर में विश्वकप के दौरान कई फुटबॉल प्रशंसक ईरान की महिलाओं के समर्थन में टी-शर्ट पहने नजर आये। जब इंग्लैंड के खिलाफ पहले मैच में ईरान के खिलाड़ियों ने राष्ट्रगान गाने से इंकार कर दिया था तब वे आंदोनकारियों की नजर में हीरो बन गये थे। लेकिन जब ईरान के खिलाड़ी वेल्स के खिलाफ मैच में राष्ट्रगान गाते नजर आये तो आंदलनकारियों का उनसे भरोसा उठ गया। कोई देश अपनी टीम की हार पर जश्न मनाये, ये हैरान करने वाली बात है। यह सरकार और जनता के बीच बढ़ते मतभेद का परिचायक है।

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