टीम फोटो के दौरान जर्मन खिलाड़ियों ने मुंह पर रखा हाथ, FIFA की इस धमकी के विरोध में उठाया कदम
वर्ल्ड कप फुटबॉल इतने देशों के बीच होता है कि वहां खेल से हटकर भी बहुत सारी चीजें चलती रहती हैं। दुनिया की विभिन्न कल्चर और सोच को एक वर्ल्ड कप में समझने का भी मौका मिल जाता है। ऐसा ही एक मामला तब देखने को मिला जब जर्मन खिलाड़ियों ने फोटो क्लिक कराते हुए अपने मुंह पर हाथ रख लिया। ये खिलाड़ी एक आर्मबैंड बांधकर खेलना चाहते हैं लेकिन फीफा इसको सपोर्ट नहीं करता है। ऐसे में इन खिलाड़ियों ने बुधवार को अपने विश्व कप ग्रुप ई के लिए जापान के खिलाफ अपने खेल से पहले अपने मुंह पर हाथ रखकर टीम फोटो क्लिक कराई। ये विवाद "वनलव" आर्मबैंड पर फीफा के प्रतिबंधों की धमकी का है। (Photo Courtesy- @DFB_Team_EN Twitter)

फीफा ऐसे आर्मबैंड पहनने पर सात यूरोपीय टीमों को प्रतिबंधों की धमकी दी है। ये बैंड डायवर्सिटी और टॉलरेंस के भाव को बढ़ावा देता है। इस धमकी के बाद जर्मनी के सभी खिलाड़ियों ने जापान के खिलाफ किकऑफ से पहले पिच पर दर्जनों फोटोग्राफरों के सामने मुंह पर हाथ रखकर अपना विरोध जताया।
जर्मनी की इंटिरियर मिनिस्टर नैन्सी फेजर, स्टैंड में फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो के बगल में बैठी थीं। उन्होंने भी फुटबॉल प्रशासक के साथ बातचीत के दौरान आर्मबैंड को स्पोर्ट किया।
इससे पहले मिनिस्टर ने फीफा की आलोचना करते हुए कहा था कि प्रतिबंधों की धमकी देना गलत बात है और ऐसे बर्ताव को स्वीकार नहीं जा सकता है।
फेजर ने खेल से पहले दोहा में एक जर्मन एफए कार्यक्रम की यात्रा के दौरान कहा, "यह ठीक नहीं है, फेडरेशनों को कैसे दबाव में रखा जा रहा है।"
यह राजनीतिक बयान देने के बारे में नहीं था बल्कि मानवअधिकारों पर किंतु-परंतु का सवाल नहीं उठना चाहिए। यह संदेश हमारे लिए इतना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, "आज के समय में यह समझ से बाहर है कि फीफा नहीं चाहता कि लोग खुले तौर पर सहिष्णुता और भेदभाव के खिलाफ खड़े हों। यह हमारे समय में फिट नहीं होता है और यह लोगों के लिए उचित नहीं है।"
ऐसा लगता है दुनिया के कई देशों में फुटबॉल को नियंत्रित करने वाला फीफा किसी राजनीतिक पचड़े में पड़कर खेल पर से अपना फोकस करने का मुख्य काम गंवाना नहीं चाहता। यह ठीक है कि यूरोपीय देशों में इंसान के अधिकारों को लेकर बहुत ज्यादा जागरुकता और खुलापन हैं लेकिन दूसरा पक्ष यह भी है कि फीफा के अंडर में कतर जैसे मेजबान देश भी आते हैं जहां पर समलैंगिकता अवैध है।












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