FIFA World Cup Final: चेला गुरु से कहता है, “दौड़िए मत, मैं लाता हूं बॉल, फिर मारिए गोल”

फीफा वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना का मुकाबला फाइनल में फ़्रांस से होगा। अर्जेंटीना के जूलियन अल्वारेज टीम में मेसी को गुरु की तरह मानते हैं।

Julian-Messi

FIFA World Cup: विश्वकप फुटबॉल प्रतियोगिता में गुरु और चेला ने धूम मचा दी है। फुटबॉल में ऐसी गुरुभक्ति शायद की पहले कभी दिखी हो। चेला (जूलियन अल्वारेज) गुरु (लियोनेल मेसी) से कहता है, “आप दौड़िये मत, मैं लाता हूं न बॉल, फिर आप नेट में डाल देना।” अर्जेंटीना के पूर्व फुटबॉलर पाब्लो जेबेलेटा कहते हैं, आधुनिक फुटबॉल में अगर कोई युवा खिलाड़ी अपने सीनियर के लिए ऐसा कहता है तो यह बहुत बड़ी बात है। इसके लिए बड़ा दिल होना चाहिए। पाब्लो की ये बात सच भी है। आज की गलाकाट प्रतियोगिता में किसी वरिष्ठ खिलाड़ी के लिए सम्मान की भावना एक दुर्लभ चीज है। मेसी 35 साल के हैं तो अल्वारेज 22 साल के। अल्वारेज अगर मेसी की दिल से इज्जत करते हैं तो इसकी वजह भी है। मेसी उनके बचपन के हीरो हैं। उनका एक ही सपना था कि मेसी जैसा खेलें। मैच के बाद मेसी से मिलना, उनका ऑटोग्राफ लेना उनकी आदत थी। फुटबॉल खेलना अल्वारेज का जुनून था। उनकी मेहनत रंग लायी। आज वे मेसी के साथ अर्जेंटीना के लिए खेल रहे हैं। मेसी ने भी अपने इस समर्पित और प्रतिभावान प्रशंसक की दिल से मदद की। अपने अनुभव से उनके खेल को निखारा। अब अल्वारेज अर्जेंटीना के सबसे मूल्यवान खिलाड़ी बन चुके हैं।

अर्जेंटीना का 1-3-5-2 का फॉर्मेशन

अर्जेंटीना का 1-3-5-2 का फॉर्मेशन

अर्जेंटीना 1-3-5-2 के फॉरमेट में खेलता है। फुटबॉल में इस पद्धति को शुरू करने का श्रेय अर्जेंटीना के पूर्व कोच कार्लोस बिलार्डो को जाता है। यानी 1 गोलकीपर, 3 फुलबैक, 5 मिडफील्डर (हाफ बैक) और 2 फॉरवर्ड मैदान संभालते हैं। अर्जेंटीना ने इसी फॉरमेट में खेल कर 1986 का विश्वकप जीता था। पाब्लो उस समय टीम क कोच थे। कहा जाता है कि पाब्लो ने माराडोना की असाधारण खेल क्षमता को भुनाने के लिए ये पद्धति इजाद की थी। इस फॉरमेशन में हाफबैक विंगर की भूमिका निभाते हैं। उनका काम होता है दोनों फॉरवर्ड को अधिक से अधिक पास देना। इसकी वजह से ज्यादातर पास माराडोना को मिलते थे जिस पर वे गोल दागते थे। उस समय माराडोना के अलावे दूसरे फॉरवर्ड वाल्डानो थे। यह पद्धति तब अपनायी जाती है जब किसी टीम के पास करिश्माई फॉरवर्ड होता है। वर्ना इसमें जोखिम भी है। अर्जेंटीना के पास तब माराडोना थे तो अब लियोनेल मेसी हैं। वाल्डानो की भूमिका अल्वारेज निभा रहे हैं।

बहुत भरोसा है मेसी को

बहुत भरोसा है मेसी को

अल्वारेज ने अपनी क्षमता और काबिलियत से यह जगह बनायी है। वे अचानक टीम के अहम खिलाड़ी नहीं बने हैं। बहुत समय उन्होंने बेंच पर गुजारा। इस विश्वकप के पहले दो मैचों में वे स्थानापन्न खिलाड़ी के रूप में उतरे। तीसरे मैच में उन्हें स्टार्ट टाइम के साथ शुरू में मौका दिया गया। फिर तो उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित कर दी। उन्होंने अपने गुरु मेसी के साथ ऐसी युगलबंदी कायम की कि टीम की किस्मत ही बदल गयी। पहला मैच हारने के बाद अगर अर्जेंटीना आज फाइनल खेल रहा है तो इसमें अल्वारेज का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने विश्वकप में अभी तक 4 गोल किये हैं। मेसी से एक कम। अल्वारेज कप्तान मेसी के सबसे भरोसेमंद सहयोगी हैं। दोनों के बीच गजब का तालमेल है। उनका पूर्वानुमान सटीक है। दोनों जानते हैं कि गेंद को कब और किस जगह पास देना है। तभी तो दोनों ने मिल कर 6 मैचों में 9 गोल कर दिये हैं।

अल्वारेज का जुनून

अल्वारेज का जुनून

फुटबॉल अर्जेंटीना के लिए केवल एक खेल नहीं बल्कि जीवन पद्धति है। जूलियन अल्वारेज में फुटबॉल खेलने की नैसर्गिक प्रतिभा थी। वे टेलीविजन पर मेसी को फुटबॉल खेलते देख कर बड़े हुए थे। बचपन से ही वे अर्जेंटीना की जर्सी पहनने का सपना देखते थे। 16 साल की उम्र में वे रिवर प्लेट क्लब से जुड़े। रिवर प्लेट क्लब न केवल अर्जेंटीना का बल्कि दक्षिण अमेरिका दूसरा सबसे बड़ा फुटबॉल क्लब है। यहां आने के बाद अल्वारेज के खेल में और निखार आया। फिर वे इंग्लैंड के मैनचेस्टर सिटी क्लब से जुड़े। उन्होंने अर्जेंटीना की लीग चैम्पियनशिप (प्रीमेरा डिविजन) में अपना सिक्का जमाया। 2021 में वे 20 गोलों के साथ प्रीमेरा डिविजन के टॉप स्कोरर रहे। उन्होंने 35 मैचों में 20 गोल किये थे। पिछले साल वे दक्षिण अमेरिका के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर चुने गये थे। उनके खेल से अर्जेंटीना के कप्तान मेसी और कोच भी बहुत प्रभावित हुए। इसके बाद कोपा अमेरिका कप के लिए उनका चयन अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम में हो गया। यहां आने के बाद अल्वारेज का सपना सच हो गया। उन्हें अपने हीरो मेसी के साथ खेलने का मौका मिला। फिर मेसी ने इस नगीने को अपनी अंगूठी में सजा लिया। अल्वारेज को इस विश्वकप में स्टार्ट इलेवन में रखने का फैसला कप्तान मेसी ने ही लिया था। इसका नतीजा सबके सामने है।फुटबॉल अर्जेंटीना के लिए केवल एक खेल नहीं बल्कि जीवन पद्धति है। जूलियन अल्वारेज में फुटबॉल खेलने की नैसर्गिक प्रतिभा थी। वे टेलीविजन पर मेसी को फुटबॉल खेलते देख कर बड़े हुए थे। बचपन से ही वे अर्जेंटीना की जर्सी पहनने का सपना देखते थे। 16 साल की उम्र में वे रिवर प्लेट क्लब से जुड़े। रिवर प्लेट क्लब न केवल अर्जेंटीना का बल्कि दक्षिण अमेरिका दूसरा सबसे बड़ा फुटबॉल क्लब है। यहां आने के बाद अल्वारेज के खेल में और निखार आया। फिर वे इंग्लैंड के मैनचेस्टर सिटी क्लब से जुड़े। उन्होंने अर्जेंटीना की लीग चैम्पियनशिप (प्रीमेरा डिविजन) में अपना सिक्का जमाया। 2021 में वे 20 गोलों के साथ प्रीमेरा डिविजन के टॉप स्कोरर रहे। उन्होंने 35 मैचों में 20 गोल किये थे। पिछले साल वे दक्षिण अमेरिका के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर चुने गये थे। उनके खेल से अर्जेंटीना के कप्तान मेसी और कोच भी बहुत प्रभावित हुए। इसके बाद कोपा अमेरिका कप के लिए उनका चयन अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम में हो गया। यहां आने के बाद अल्वारेज का सपना सच हो गया। उन्हें अपने हीरो मेसी के साथ खेलने का मौका मिला। फिर मेसी ने इस नगीने को अपनी अंगूठी में सजा लिया। अल्वारेज को इस विश्वकप में स्टार्ट इलेवन में रखने का फैसला कप्तान मेसी ने ही लिया था। इसका नतीजा सबके सामने है।

अल्वारेज की बहुमुखी प्रतिभा

अल्वारेज की बहुमुखी प्रतिभा

जूलियन अल्वारेज बहुमुखी प्रतिभा वाले फॉरवर्ड हैं। वे अग्रिम पंक्ति में किसी पोजिशन पर खेल सकते हैं। अगर कभी हालात के मुताबिक चार फॉरवर्ड के फॉरमेट में खेलना पड़े तो वे विंगर भी बन जाते हैं। दूरदृष्टि, जल्द पास देने की तकनीक और वन टच शॉट क्षमता के कारण वे एक अच्छे लिंकअप खिलाड़ी हैं। जब विपक्षी खिलाड़ी रफ गेम खेलते हैं या चोट पहुंचाने के ख्याल से टेकल करते हैं तो अल्वारेज अपना स्टाइल चेंज कर लेते हैं। फिर वे मेसी की तरह ड्रिब्लिंग कर गेंद को विपक्षी जमघट से बाहर निकाल लेते हैं। विश्वकप फुटबॉल प्रतियोगिता 2022 के फाइनल में जूलियन अल्वारेज आकर्षण का केन्द्र होंगे। मेसी और अल्वारेज की जोड़ी इतिहास रचने के बिल्कुल नजदीक है।

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