Fifa World Cup 2022 : फुटबॉल है इंग्लैंड और वेल्स में दुश्मनी की वजह !

फुटबॉल ही वह सबसे बड़ा उत्प्रेरक है जो वेल्स के निवासियों में राष्ट्रीयता की भावना जागृत करता है। इस खेल की वजह से ही उसे दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल मंच पर एक अलग देश के रूप में पहचान मिलती है।

इंग्लैंड से मिली 0-3 से हार के बाद वेल्स विश्वकप फुटबॉल प्रतियोगिता से बाहर हो गया। पहले हाफ तक वेल्स ने इंग्लैंड को कड़ी टक्कर दी। लेकिन हाफ टाइम के बाद उसका खेल बिखर गया। इंग्लैंड के लिए यह बहुत अहम मैच था। अगर वेल्स इंग्लैंड को चार गोल के अंतर से हरा देता तो इंग्लैंड प्रतियोगिता से बाहर हो जाता। लेकिन इंग्लैंड ने ऐसा होने नहीं दिया। वह 3-0 से जीत गया। एक ड्रॉ और दो हार के साथ वेल्स ग्रुप बी में चौथे स्थान पर रहा। इस मैच के पहले शुक्रवार को कतर में एक ऐसी घटना हुई जिससे इंग्लैंड और बेल्स के तनावपूर्ण रिश्ते जगजाहिर हो गये। हैरत की बात ये है कि इनके बीच दुश्मनी की वजह फुटबॉल है। इंग्लैंड और वेल्स यूनाइटेड किंगडम का हिस्सा हैं लेकिन फुटबॉल के चलते एक दूसरे के कट्टर विरोधी हैं।

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शराब के नशे में मारपीट

शुक्रवार की रात कतर के बीच सड़क पर इंग्लैंड और वेल्स के समर्थकों में जम कर मारपीट हुई। लात-घूंसे भी चले। उपद्रव करने वालों ने शराब पी रखी थी। कतर में शराब प्रतिबंधित है फिर भी ऐसा हुआ। इंग्लैंड के समर्थकों के भड़काऊ रवैये के कारण बात बढ़ी। वेल्स और इंग्लैंड यूनाइटेड किंगडम का हिस्सा हैं। फिर इनके बीच किस बात का विवाद ? एक देश होते हुए भी इंग्लैंड और वेल्स के समर्थक क्यों झगड़ गये ? आखिर ये एक दूसरे से घृणा क्यों करते हैं ? वैसे तो इस विवाद की जड़ इतिहास में निहित है लेकिन मौजूदा मारपीट फुटबॉल से जुड़ी है। 2018 में एक शोध के बाद HISTOTY (R) टीवी सीरीज में बताया गया था कि फुटबॉल की वजह से वेल्स के लोग इंग्लैंड के लोगों से घृणा करते हैं। उनका मानना है कि फुटबॉल को लेकर इंग्लैंड के लोग उपद्रवी हो जाते हैं और वेल्स के लोगों को हेय दृष्टि से देखते हैं। इंग्लैंड के लोगों की सोच अभी भी साम्राज्यवादी है और वे वेल्स को अपना उपनिवेश मानते हैं। इंग्लिश लोगों के इस अहंकारी सोच से वेल्स के लोग नाखुश रहते हैं। इसकी वजह से वे यूनाइटेड किंगडम से बाहर निकलने तक की बात भी सोचते हैं। वेल्स 64 साल बाद विश्वकप खेलने आया था। ये बात इंग्लैंड के लोगों को पसंद नहीं आ रही थी। इसलिए कतर में नोकझोंक के बाद मारपीट हो गयी।

वेल्स के लिए फुटबॉल राष्ट्रीयता का प्रतीक

फुटबॉल ही वह सबसे बड़ा उत्प्रेरक है जो वेल्स के निवासियों में राष्ट्रीयता की भावना जागृत करता है। इस खेल की वजह से ही उसे दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल मंच पर एक अलग देश के रूप में पहचान मिलती है। फुटबॉल एसोसिएशन ऑफ वेल्स दुनिया का तीसरा सबसे पुराना फुटबॉल संघ है। यह 146 साल पुराना है। जाहिर इस देश में फुटबॉल की जड़ें काफी गहरी हैं। वेल्स ने पहली बार 1958 में फीफा विश्वकप के लिए क्वालिफाई किया था। तब वह क्वार्टर फाइनल तक पहुंचा था। क्वार्टर फाइनल में ब्राजील ने उसे हरा दिया था। काफी समय बाद इसे फिर विश्वकप खेलने का मौका मिला। 2022 के विश्वकप में इसे संयोग से इंग्लैंड के साथ ग्रुप बी में जगह मिली। वेल्स की आबादी केवल 31 लाख 75 हजार है फिर भी वह विश्वकप फुटबॉल खेल रहा है। लेकिन करोड़ों की आबादी वाला भारत कभी नहीं खेल पाया। अगर भारत से तुलना करें तो वेल्स बनारस शहर से भी छोटा है। उत्तर प्रदेश के बनारस शहर की आबादी अभी अनुमानित रूप से 42 लाख है। क्या वेल्स एक देश है ? वेल्स एक देश तो है लेकिन इसकी संप्रभुता यूनाइटेड किंगडम के अधीन है। वेल्स की अपनी विधायिका है लेकिन विदेशनीति और सुरक्षा से जुड़े निर्णय यूनाइटेड किंगडम की संसद लेती है।

FIFA में वेल्स को कैसे मिली अगल टीम की मान्यता ?

FIFA- फेडरेशन इंटरनेशनल डी फुटबॉल एसोसिएशन- फ्रेंच उच्चारण। अंग्रेजी में इसे इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन फुटबॉल कहते हैं। इसका गठन 1904 में हुआ था। फीफा के गठन के पहले से यूनाइटेड किंगडम (UK) के चार हिस्से- इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड अलग- अलग टीम के रूप में फुटबॉल खेलते थे। 1882 से ये सिलसिला चल रहा था। जब फीफा बना तो इन चारों ने अलग-अलग टीम के रूप में सदस्यता के लिए आवेदन किया। इंग्लैंड ने वेल्स, स्कॉटलैंड और आयरलैंड की अलग सदस्यता का विरोध नहीं किया। इसकी वजह से फीफा ने इन्हें अलग-अलग टीम के रूप में मान लिया।

वेल्स की ऐतिहासिक पीड़ा

वेल्स पहले अलग देश था। इंग्लैंड ने 1282 में वेल्स पर कब्जा कर लिया था। स्कॉटलैंड ने 1707 में खुद इंग्लैंड में विलय कर लिया था। आयरलैंड भी इसका हिस्सा था। 1801 में इन चारों देशों का एकीकरण हुआ था जिसे यूनाइटड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड आयरलैंड का नाम दिया गया था। 1920 के बाद दक्षिणी आयरलैंड आजाद हो गया। इसके बाद इस देश का नाम है- यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड नॉर्दर्न आयरलैंड। वेल्स के लोगों के मन मे आज तक इस बात की पीड़ा है कि इंग्लैंड ने उनका स्वतंत्र अस्तित्व क्यों छीन लिया। हाल ही में महारानी एलिजबेथ द्वितीय का निधन हुआ था। इसके बाद प्रिंस चार्ल्स नये राजा बने। इसके पहले उनके पास प्रिंस ऑफ वेल्स की उपाधि थी। जब वे राजा बन गये तो उन्होंने अपने बेटे विलियम को प्रिंस ऑफ वेल्स बनाने की घोषणा कर दी। इस पर वेल्स के नेता लॉर्ड एलिस थॉमस ने प्रिंस ऑफ वेल्स ओहदे को जारी रखने पर सवाल उठाया और इसे रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह ओहदा वेल्स के प्रति अनादर का प्रतीक है। इससे वेल्स के एक राष्ट्र और एक देश के रूप में पहचान कमजोर होती है। वेल्स 1282 की पराधीनता को भूला नहीं है।

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