फीफा का बैन कठोर फैसला, साथ ही भारतीय फुटबॉल में सुधार का भी ये अवसर है- बाइचुंग भूटिया
नई दिल्ली, 16 अगस्त: भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया ने मंगलवार को अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) पर प्रतिबंध लगाने के फीफा के फैसले को कठोर करार दिया है। फीफा ने यह कदम उठाकर भारत में होने जा रहे अंडर 17 महिला विश्व कप की मेजबानी पर भी तलवार भांज दी है। पूर्व कप्तान ने फैसले को कठोर बताते हुए इसको एक मौका भी बताया है। भूटिया का कहना है कि यह देश के लिए चीजों को व्यवस्थित करने का एक बड़ा अवसर है।

फीफा का कहना था कि भारतीय फुटबॉल बॉडी में तीसरे पक्ष का अनुचित प्रभाव है जिसके कारण वो इस बॉडी को दी गई मान्यता जारी नहीं रख सकता। इसके चलते 16 अगस्त की तड़के फीफा द्वारा भारत को निलंबित कर दिया गया था।
अंडर -17 महिला विश्व कप 2022 संस्करण 11-30 अक्टूबर से होने वाला था।
फीफा ने कहा कि निलंबन तत्काल था और यह फीफा के नियमों का गंभीर उल्लंघन था। 85 साल के इतिहास में यह पहली बार है जब फीफा ने भारतीय फुटबॉल संघ यानी एआईएफएफ पर प्रतिबंध लगाया है।
ऑल इंडिया फुटबॉल संघ के पूर्व प्रेसीडेंट प्रफुल्ल पटेल ने अपने कार्यकाल को पूरा करने के बाद भी अपने कार्यालय को नहीं छोड़ा था जिसके बाद भारतीय फुटबॉल के लिए नियमों का उल्लंघन करने की मुश्किलें खड़ी हो गई। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस कार्यकाल को अमान्य कर दिया और उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया। फिर इस संगठन को प्रशासकों की एक समिति (सीओए) के तहत रखा गया था। जैसे क्रिकेट को कुछ समय के लिए भी प्रशासकों की समिति के अधीन रखा गया था जिसके अध्यक्ष विनोद राय थे।
पीटीआई से बात करते हुए, भुटिया ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण था कि भारत पर प्रतिबंध लगा और उन्हें लगा कि यह एक कठोर निर्णय था। हालांकि, पूर्व भारतीय कप्तान ने कहा कि खेल के लिए सिस्टम को सही करने का यह एक शानदार मौका है।
भारतीय दिग्गज ने यह कहते हुए निष्कर्ष निकाला कि यह महत्वपूर्ण है कि सभी हितधारक एक साथ आएं और भारतीय फुटबॉल की बेहतरी के लिए सिस्टम को सही करें।
उन्होंने कहा, "बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि फीफा ने भारतीय फुटबॉल पर प्रतिबंध लगा दिया है और साथ ही, मुझे लगता है कि भारतीय फुटबॉल पर प्रतिबंध लगाना फीफा का बहुत कठोर निर्णय है।"
"लेकिन साथ ही, मुझे लगता है कि यह हमारे लिए हमारे सिस्टम को ठीक करने का एक बड़ा अवसर है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि सभी हितधारक - फेडरेशन, राज्य संघ, एक साथ आएं और सिस्टम को सही करें और हर कोई भारतीय फुटबॉल की बेहतरी के लिए काम करे।"












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