Yashasvi Jaiswal के शतक के साथ पूरा हुआ वर्षों पुराना सपना, Mumbai में नए 5 BHK फ्लैट में शिफ्ट हुआ परिवार
Yashasvi Jaiswal: टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज यशस्वी जयसवाल ने अपने डेब्यू टेस्ट में (171) एक अमिट छाप छोड़ दी है। एक तरफ जायसवाल डोमिनिका के विंडसर पार्क में वेस्टइंडीज के खिलाफ पदार्पण मैच में शतक जड़कर सुर्खियों में बने हुए हैं, तो दूसरी ओर उनका परिवार अपने नए पांच बेडरूम वाले फ्लैट में शिफ्ट हो चुका है।
पिता कांवड़ यात्रा पर की बेटे की सफलता की प्रार्थना
इस बीच यशस्वी जायसवाल के पिता कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) पर हैं, जोकि उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड तक पैदल यात्रा कर रहे थे। हालांकि, उन्हें फोन पर अपने बेटे की नई उड़ान की जानकारी मिल चुकी थी। जायसवाल के पिता कांवड़ यात्रा के दौरान लगातार बेटे की सफलता के लिए भोलेनाथ से प्रार्थना कर रहे थे।

जायसवाल ने कभी पानीपूरी बेची तो कभी तंबू में रात गुजारी
आज जायसवाल का परिवार ही नहीं बल्कि देशभर के क्रिकेट प्रेमी 21 वर्षीय खिलाड़ी की एक नई शुरुआत को देखकर बेहद खुश हैं, क्योंकि ये वही लड़का जिसने कभी तंबू में रात गुजारी तो कभी गुजारा करने के लिए पानीपूरी बेची, एक समय ऐसा भी आया, जब उसे आजाद मैदान के नेट में प्रवेश से भी मना कर दिया गया था।
किराए के मकान में वापस नहीं लौटना चाहते जायसवाल
यहां तक कि जब वह डोमिनिका में अपने टेस्ट डेब्यू की तैयारी कर रहे थे, जहां उन्होंने 171 रन बनाए और भारत को 141 रन से टेस्ट मैच जीतने में मदद की, तब भी उनका दिमाग मुंबई में था। यशस्वी सांता क्रूज में किराए के दो-बेडरूम के मकान में वापस नहीं लौटना चाहते थे, जहां उनका परिवार पिछले दो वर्षों से रह रहा है।
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए जायसवाल के भाई तेजस्वी ने कहा कि 'वह हमसे कहते रहे कि 'कृपया जल्द ही शिफ्ट हो जाएं, मैं इस घर में नहीं रहना चाहता।' यहां तक कि टेस्ट मैच के दौरान भी वह हमारी शिफ्टिंग योजनाओं के बारे में पूछते थे।' जीवन भर उनकी एक ही इच्छा रही, अपना खुद का घर हो। आप जानते हैं कि वह कैसे आगे बढ़े हैं, वह अपने सिर पर छत के महत्व को समझते हैं, खासकर मुंबई में।'
यशस्वी का क्रिकेटर करियर शानदार रहा है। साल 2019 में प्रथम श्रेणी में पदार्पण करने से लेकर तीन साल बाद अपना पहला आईपीएल खेलने तक। उन्होंने 2023 में सबसे तेज आईपीएल 50 रन बनाने के बाद अब डेब्यू टेस्ट में शतक लगाकर एक नई उड़ान को रफ्तार दी है।
यशस्वी की यह यात्रा तब शुरू हुई जब वह सिर्फ 12 वर्ष के थे, और बिना किसी गॉडफादर के उत्तर प्रदेश के भदोही से मुंबई चले गए। बाद में वह किशोरावस्था की खुशियों से दूर रहकर अपने कोच ज्वाला सिंह की अकादमी में नेट्स पर बल्लेबाजी करते हुए अनगिनत घंटे बिताते थे ताकि वह अपने सपने को साकार करने के लिए अतिरिक्त मेहनत कर सकें। यह सिर्फ इच्छा नहीं थी जिसने उन्हें ऊर्जा दी, बल्कि अपनी कला के प्रति अटूट समर्पण और अपने ब्रेक का सर्वोत्तम उपयोग करने का सर्वोच्च दृढ़ संकल्प था।












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