कौन है मुरली श्रीशंकर? जिसने डायमंड लीग में भारत को दिलाया पहला मेडल, पीएम मोदी ने भी की प्रशंसा
Murali Sreeshankar: श्रीशंकर प्रतिष्ठित डायमंड लीग में लंबी कूद प्रतियोगिता में पदक जीतने वाले पहले भारतीय हैं। उन्होंने पहली बार इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में पोडियम हासिल किया है।
Murali Sreeshankar: लंबी कूद के खिलाड़ी मुरली श्रीशंकर ने पेरिस डायमंड लीग में कांस्य पदक जीतकर खेल जगत में भारत का नाम दुनियाभर में रोशन कर दिया है। मुरली श्रीशंकर 8.09 मीटर की छलांग के साथ पेरिस डायमंड लीग में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने पहली बार इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में पोडियम हासिल किया।
पेरिस डायमंड लीग में एम टेंटोग्लू ने लगाई सबसे लंबी छलांग
राष्ट्रमंडल खेलों के रजत पदक विजेता श्रीशंकर ने शुक्रवार रात अपने तीसरे प्रयास में दिन की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाई। ओलंपिक चैंपियन यूनान के एम टेंटोग्लू ने 8.13 मीटर और साइमन एहमर (स्विट्जरलैंड) ने 8.11 मीटर की छलांग के साथ श्रीशंकर से आगे रहे।

श्रीशंकर को पीएम मोदी ने दी बधाई
श्रीशंकर की इस उपलब्धि के लिए उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शुभकामनाएं दी हैं। पीएम मोदी ने ट्वीट कर लिखा, 'श्रीशंकर मुरली ने पेरिस डायमंड लीग में शानदार प्रदर्शन कर इतिहास रच दिया! उनकी असाधारण छलांग ने उन्हें प्रतिष्ठित कांस्य पदक दिलाया, जिससे भारत को डायमंड लीग में लंबी कूद में पहला पदक प्राप्त हुआ। उन्हें बधाई और उनके आगामी प्रयासों के लिए शुभकामनाएं।'
दरअसल, ये पहली बार नहीं है, जब युवा एथलीट ने इस क्षेत्र में भारत का नाम रोशन किया है। इससे पहले उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में भारत के लिए लंबी कूद स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता, ऐसा करने वाले वह पहले पुरुष खिलाड़ी थे। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में 8.08 मीटर लंबी छलांग लगाई।
कौन हैं मुरली श्रीशंकर
मुरली श्रीशंकर का जन्म 27 मार्च 1999 को केरल के पलक्कड (Palakkad) जिले में हुआ। परिवार में पहले से ही खेल को जबरदस्त जुनून था, क्योंकि श्रीशंकर के माता और पिता पूर्व एथलीट हैं, और दोनों ही देश के लिए मेडल ला चुके हैं। उनके पिता ने दक्षिण एशियाई खेलों में कांस्य पदक अपने नाम किया था। मुरली ने अपने पिता से ही लंबी कूद के दांव-पेंच सीखे, क्योंकि उनके पिता ही उनके कोच भी हैं। इसके अलावा मुरली की मां ने भी एशियाई जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 800 मीटर दौड़ में रजत पदक अपने नाम किया था। श्रीशंकर की बहन श्रीपारवती भी हैप्थेलॉन की प्लेयर हैं।
बचपन से खेल के प्रति मुरली में रहा जुनून
खेल के प्रति मुरली श्रीशंकर में गजब का जुनून है, और अपनी मेहनत और जुनून के दम पर ही उन्होंने इस बार कांस्य पदक अपने नाम किया है। इससे पहले वह अमेरिका में आयोजित विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय एथलीट बने थे। मुरली विश्व चैंपियनशिप में 7.96 मीटर दूरी तक की छलांग लगा चुके है।
मुरली ने खेल में की दमदार वापसी
मार्च 2018 में श्रीशंकर ने पटियाला में फेडरेशन कप में 7.99 मीटर की छलांग लगाई। उन्हें 2018 राष्ट्रमंडल खेलों के लिए भारतीय दल में शामिल किया गया था, लेकिन एक सर्जरी के लिए उन्हें 10 दिन पहले बाहर होना पड़ा। इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी की और गिफू में 2018 एशियाई जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग लिया और 7.47 मीटर की छलांग के साथ कांस्य पदक जीता।
मुरली जिस रफ्तार से खेल की दुनिया में आगे बढ़ रहे हैं वो दिन दूर नहीं जब इस फील्ड में उनकी एक बड़ी पहचान होगी। श्रीशंकर को बचपन से ही अपने पिता से ट्रेनिंग रूपी आशीर्वाद मिल रहा है। और श्रीशंकर भी माता-पिता के दिखाए रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं। श्रीशंकर पढ़ाई में भी काफी तेज रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीशंकर मेडिकल और इंजीनयरिंग के एंट्रेंस टेस्ट भी क्लियर कर चुके हैं, लेकिन उन्होंने सिर्फ खेल को चुना है।












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