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सरफराज ही नहीं बल्कि इन बल्लेबाजों ने तो 8 से 12 साल बाद लगाई है सेंचुरी

पाकिस्तान के विकेटकीपर बल्लेबाज सरफराज अहमद ने टेस्ट क्रिकेट में 4 साल बाद वापसी की और 8 साल बाद उन्होंने टेस्ट करियर का शतक लगाया। सरफराज ने न्यूजीलैंड के खिलाफ 118 रन की पारी खेली थी।

sarfaraz ahmed

किसी कामयाबी के लिए मेहनत और योग्यता सबसे जरूरी है। लेकिन किस्मत भी कम मायने नहीं रखती। कभी कभी किस्मत ऐसे अवसर प्रदान करती है जिसके बारे में इंसान सोचता भी नहीं। अगर कोई खिलाड़ी 8 साल बाद, 11 साल बाद और 12 साल बाद टेस्ट मैचों में शतक लगा दे, तो इसे क्या कहेंगे ? योग्यता या किस्मत ? शायद दोनों। किसी भी खिलाड़ी को अपनी क्षमता साबित करने के लिए जरूरी है कि उसे मौका मिले। कई बार यह मौका किस्मत से मिलता है।

रिजवान टेस्ट में नाकाम हुए तो सरफराज आये

अब पाकिस्तान के विकेटकीपर सरफराज अहमद की ही बात ले लीजिए। कुछ महीने पहले तक वे पाकिस्तान की राष्ट्रीय टीम में आने के बारे में सोचते भी नहीं थे। लेकिन पाकिस्तान में जब अचानक क्रिकेट प्रबंधन का हुलिया बदला तो सरफराज अहमद की किस्मत के दरवाजे खुल गये। संयोग देखिए जो रिजवान पाकिस्तान के लिए रनों का अंबार लगाये जा रहे थे वे अचानक इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में नाकाम हो गये। पिछले दो साल से यह कहा जा रहा था कि मोहम्मद रिजवान के रहते अब पाकिस्तान की टीम में किसी नये नये विकेटकीपर के लिए जगह नहीं। लेकिन समय बदला। मुख्य चयनकर्ता शाहिद आफरीदी ने खुद सरफराज अहमद को फोन किया। इसे ही मौका कहते हैं। पाकिस्तान बोर्ड ने करीब 4 साल बाद सऱफराज को याद किया। उन्होंने पाकिस्तान की घरेलू श्रृंखला कायदे आजम ट्राफी में अच्छा प्रदर्शन किया था। इसके बावजूद 35 साल के इस विकेटकीपर बल्लेबाज को टीम में वापसी की उम्मीद नहीं थी।

सरफराज की यूं बदली किस्मत

शाहिद अफरीदी के एक कॉल ने सरफराज अहमद की जिंदगी बदल दी। वे टीम में आये और छा गये। मिले मौके को उन्होंने दोनों हाथों से लपका। न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट की पहली पारी में 86, दूसरी पारी में 53 रन बनाये। दूसरे टेस्ट मैच की पहली पारी में 78 रनों का योगदान दिया। चौथी पारी में जब पाकिस्तान पर हार का खतरा मंडरा रहा था तब सरफराज ने शतक (118) लगा कर टीम को एक और श्रृंखला हारने से बचाया। सरफराज जब बैटिंग के लिए मैदान पर उतरे थे तब पाकिस्तान 80 रन पर 5 विकेट गंवा चुका था। ऐसे में सरफराज ने शकील के साथ मिल 123 रनों की साझेदारी की। फिर आगा सलमान के साथ 70 रनों की साझेदारी की। इन दो साझेदारियों के दम पर पाकिस्तान मैच में वापस आया। सरफराज 118 रन बना कर नवें विकेट के रूप में 287 के स्कोर पर आउट हुए। इसके बाद नसीम शाह और अबरार अहमद ने मैच ड्रा करा लिया।

8 साल बाद सरफराज का टेस्ट शतक

सरफराज अहमद का ये शतक कई मायनों में यादगार है। पहला तो ये कि उन्होंने चौथी पारी में ये शतक बना कर पाकिस्तान की हार टाल दी और दूसरा ये कि 8 साल बाद उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाया। इसके पहले उन्होंने 2014 में न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में शतक (112) लगाया था। यह टेस्ट श्रृंखला संयुक्त अरब आमिरात में खेली गयी थी। 2019 के बाद उन्होंने कोई टेस्ट नहीं खेला था। 2023 में उन्होंने 35 साल की उम्र में हैरतअंगेज वापसी की। तीन अर्धशतक और एक शतक लगा कर उन्होंने इस टेस्ट श्रृंखला में सबसे अधिक रन बनाये। वे मैन ऑफ द सीरीज भी चुने गये।

टेस्ट क्रिकेट में 11 साल बाद शतक

पाकिस्तान के एक और ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने 11 साल के बाद टेस्ट मैच में शतक लगाया था। इनका नाम है फवाद आलम। 2009 में अपने डेब्यू टेस्ट मैच में ही 168 रनों की पारी खेल कर उन्होंने कमाल कर दिया था। यह टेस्ट मैच श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में खेला गया था। इसके बाद वे केवल 6 टेस्ट मैच और खेले। फिर 2020 में अचानक उनकी टेस्ट टीम में वापसी हुई। पाकिस्तान की टीम न्यूजीलैंड के दौरे पर गयी थी। पहले टेस्ट की दूसरी पारी में फवाद ने 102 रन बनाये थे। उन्होंने 6 घंटे से अधिक समय तक न्यूजीलैंड के गेंदबाजों का सामना किया। पाकिस्तान को चौथी पारी में जीत के लिए 373 रनों का टारगेट मिला था। इस टेस्ट मैच की कप्तानी विकेटकीपर मोहम्मद रिजवान कर रहे थे। लेकिन रिजवान कप्तानी पारी नहीं खेल पाये। वे 60 रन बना कर आउट हो गये। पाकिस्तान यह टेस्ट मैच 101 रनों से हार गया। लेकिन फवाद आलम ने 11 साल 203 दिनों के बाद टेस्ट शतक लगा कर सबको हैरान कर दिया था।

भारत के मुश्ताक अली का 12 साल बाद टेस्ट शतक

इस मामले में भारत के मुश्ताक अली का रिकॉर्ड और भी अनोखा है। उन्होंने 12 साल 123 दिनों के बाद टेस्ट शतक लगाया था। आजादी से पहले 1936 में भारत की टीम इंग्लैंड के दौरे पर गयी थी। ओल्डट्रैफर्ड टेस्ट मैच में मुश्ताक अली ने 112 रनों की पारी खेली थी। वे विदेशी जमीन पर टेस्ट शतक बनाने वाले पहले भारतीय थे। उसके बाद उन्होंने 1948 में वेस्टइंडीज के खिलाफ कोलकाता के तीसरे टेस्ट मैच में 106 रन बनाये थे। उनकी बल्लेबाजी की वजह से भारत इस टेस्ट मैच को ड्रा कर सका था। पहली पारी में भी उन्होंने 54 रन बनाये थे। 1948 मे वेस्ट इंडीज की टीम भारत के दौर पर आयी थी। पांच टेस्ट मैचों की इस श्रृंखला को वेस्टइंडीज ने 1-0 से जीता था।

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