'सचिन और मैंने पहले पिच को देखा फिर..' सहवाग ने सुनाई 2011 विश्वकप फाइनल की अनसुनी कहानी
नई दिल्ली। मुंबई के वानखेड़े मैदान पर भारतीय टीम को 2011 विश्वकप फाइनल में मिली जीत आज भी फैन्स के मन में ताजा है, जिसमें भारतीय टीम ने श्रीलंका को 6 विकेट से मात देकर खिताब अपने नाम किया था। 275 रनों का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को इस मैच के शुरुआती दौर में परेशानी का सामना करना पड़ा था, हालांकि महेला जयवर्धने की कप्तानी वाली टीम के खिलाफ महेंद्र सिंह धोनी ने अंत में छक्का लगाकर अपनी टीम को दूसरा विश्वकप जिताया और फैन्स को खुश कर दिया।

श्रीलंका की टीम ने 275 रनों का पीछा करने उतरी भारतीय टीम के दोनों सलामी बल्लेबाज वीरेंदर सहवाग और सचिन तेंदुलकर को जल्दी आउट कर मुश्किलें खड़ी कर दी थी। इस फाइनल मैच में लसिथ मलिंगा ने पारी के पहले ही ओवर में वीरेंदर सहवाग को जीरो पर वापस पवेलियन भेज दिया था, तो वहीं पर सचिन तेंदुलकर 7वें ओवर में मलिंगा का शिकार बने थे।
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सहवाग ने सुनाया अनसुना किस्सा
भारतीय टीम को मिली इस ऐतिहासिक जीत के 11 साल बाद पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंदर सहवाग ने बताया है कि कैसे गेंदबाजी के दौरान उस पिच को देखने के बाद यह जोड़ी उत्साहित हो गई थी और वो अनसुनी बातचीत की कहानी सुनाई जिसके बारे में कम लोग ही जानते हैं।
क्रिकबज के साथ बात करते हुए सहवाग ने कहा,'मैं आपको 2011 विश्वकप फाइनल की एक कहानी सुनाता हूं। सचिन तेंदुलकर मिडविकेट पर खड़े थे और मैं डीप स्क्वॉयर लेग पर फील्डिंग कर रहा था। जैसे-जैसे सूरज ढल रहा था हमने पिच पर बहुत ज्यादा चमक महसूस की। हम दोनों ने पिच को देखा और फिर एक दूसरे को देखा और एक दूसरे को इशारा किया कि इस पर बल्लेबाजी करना काफी शानदार होगा। हालांकि हम दोनों में से किसी ने भी बात में रन नहीं बनाये।'

खराब दौर में हों तो नहीं बनते रन
सहवाग ने यह किस्सा उस वक्त सुनाया जब क्रिकेट एक्सपर्टस के पैनल विराट कोहली को लेकर फॉर्म और रन न बना पाने पर बात कर रहे थे। सहवाग ने आगे बात करते हुए कहा कि मैच से पहले जो भी बातें हो रही थी कि वहां पर गर्मी थी, पिच सपाट थी और आपको टॉस जीतकर बल्लेबाजी करनी चाहिये थी, सब बेकार हैं, क्योंकि अगर आप उस खराब दौर से गुजर रहे होते हैं जहां पर आपके बल्ले से रन नहीं निकल रहे होते तो आप वहां पर भी रन नहीं बना पायेंगे। यह बिल्कुल साफ है।

गंभीर-धोनी ने जिताया विश्वकप
गौरतलब है कि 2011 विश्वकप फाइनल मैच में 275 रनों का पीछा करते हुए जब भारतीय टीम ने अपने पहले दो विकेट जल्दी गंवा दिये थे लेकिन यहां से गौतम गंभीर (97) और विराट कोहली (35) ने 83 रनों की साझेदारी कर भारतीय टीम को मुश्किल से बाहर निकाला। वहीं कोहली के आउट होने के बाद धोनी ने खुद को बल्लेबाजी में प्रमोट किया और पहले गंभीर के साथ अहम साझेदारी की और फिर युवराज सिंह के साथ नाबाद 91 रनों की पारी खेलकर भारत को दूसरा विश्वकप खिताब जिताया।












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