सुप्रीम कोर्ट का फैसला अपने पक्ष में आने पर सौरव गांगुली ने किया कमेंट करने से इंकार
नई दिल्ली, 15 सितंबर: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष सौरव गांगुली बुधवार को बीसीसीआई संशोधनों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में फिलहाल कुछ नहीं बोल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के संविधान में संशोधन की इजाजत दी है जिसके चलते सौरव गांगुली और सचिव जय के लिए आगे का रास्ता खुला है। ये दोनों अनिवार्य कूलिंग-ऑफ अवधि पूरी किए बिना भी अपने पद पर बरकरार रह सकते हैं।
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गांगुली ने ईडन गार्डन्स में इंडिया टुडे से कहा, "मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी नहीं करना चाहता।"
यह पूछे जाने पर कि यह बीसीसीआई की जीत है या नहीं? उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट पर है।
गांगुली ने कहा, "यह सुप्रीम कोर्ट का फैसला है, उन्होंने जो अच्छा सोचा है, वह आदेश दिया है। मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करता।"
भले ही भारत के पूर्व कप्तान ने शब्दों के माध्यम से ज्यादा नहीं बोला लेकिन दादा को ईडन गार्डन में पूरे दिन अपने हंसमुख स्वभाव में देखा गया। यहां पर आगामी लीजेंड्स लीग मैच होना है। इस दौरान मौजूद लोगों ने बीसीसीआई के अध्यक्ष को बधाई दी, जो तीन और वर्षों तक इस पद पर बने रहने के लिए तैयार हैं।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ ने कहा कि एक पदाधिकारी का लगातार 12 साल का कार्यकाल हो सकता है, जिसमें स्टेट एसोसिएशन में छह साल और बीसीसीआई में तीन साल की कूलिंग-ऑफ अवधि शुरू होने से पहले छह साल शामिल हैं।
पीठ ने कहा कि एक पदाधिकारी बीसीसीआई और स्टेट एसोसिएशन दोनों लेवल पर लगातार दो कार्यकाल के लिए एक विशेष पद पर काम कर सकता है, जिसके बाद उसे तीन साल की कूलिंग-ऑफ अवधि पूरी करनी होगी।












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