रॉस टेलर भी हुए नस्लभेद का शिकार, अपनी बुक में बताया न्यूजीलैंड क्रिकेट का स्याह पक्ष

नई दिल्ली, 11 अगस्त: न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर रॉस टेलर ने अपने देश की क्रिकेट संस्कृति में नस्लवाद के मुद्दे पर बात की है। अपनी टीम के लिए सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में शुमार रहे टेलर अपनी बुक, रॉस टेलर: ब्लैक एंड व्हाइट में, बताया कि कैसे खिलाड़ियों के साथ भेदभाव होता था।

Ross Taylor also became a victim of racism, in his book reveals dark side of New Zealand cricket

उनकी पुस्तक का एक अंश न्यूजीलैंड हेराल्ड द्वारा बताया गया कि, कई बार ऐसा होता है कि मेरे खराब शॉट को लेकर बहुत गंदे शब्द इस्तेमाल किए जाते थे जबकि उसी तरह के शॉट को लेकर बाकी बल्लेबाजों के लिए कुछ और शब्द इस्तेमाल होते हैं। जब मैं खराब खेलता तो उसको दिमाग फट गया, बुद्धु क्रिकेट जैसे शब्दों से किया गया।

जबकि यही शॉट अगर कोई अन्य बल्लेबाज खेलता तो उसको 'फोकस में कमी', 'खराब शॉट सेलेक्शन' कहा जाता है।

दरअसल टेलर खुद एक नेटिव न्यूजीलैंड बल्लेबाज नहीं हैं। वह जन्म से एक मल्टी-ऐथनिक (बहुजातीय) खिलाड़ी हैं।

टेलर ने आगे ड्रेसिंग रूम में नस्लवादी मजाक का उदाहरण दिया जिसमें वह हिस्सा था। उन्होंने इस बारे में थोड़ा खुलासा किया कि कैसे एक विशेष टीम के साथी ने उन्हें एक बिंदु समझाने की कोशिश करते हुए जातीयता को बीच में घुसाया।

टेलर ने कहा, "कई मायनों में, ड्रेसिंग-रूम का मजाक काफी कुछ कह जाता है। टीम का एक साथी मुझसे कहता था, "रॉस, तुम आधे अच्छे आदमी हो, लेकिन कौन सा आधा अच्छा है? ये बात आप नहीं जान सकते।" अन्य खिलाड़ियों को भी अपनी जातीयता पर आधारित टिप्पणियों के साथ आना पड़ा।

ऐसे लोग आपस में एक दूसरे को सही भी नहीं करते क्योंकि वे एक दूसरे के मजाक को सफेद चमड़ी वाले इंसान की तरह सुनते हैं जो उन पर नहीं होता।

समस्या तब आती है जब आप उनको सही करने की कोशिश करते हो लेकिन नहीं कर पाते क्योंकि ऐसा करने से आप बड़ी समस्या को दावत दे रहे हो। आप पर नस्लीय शिकार होने का कार्ड खेलने वाले इंसान का टैग लगाया जा सकता है। लोग कह सकते हैं कि ऐसे मजाक किसी नुकसान के नहीं होते, तो उनको बेवजह तूल क्यों देना? ठीक है आप अपनी ही चमड़ी को मोटा कर लो, जो हो रहा है, होने दे, लेकिन क्या ऐसा करना सही बात है?

बता दें कि, नस्लवाद के मुद्दे ने आम तौर पर क्रिकेट को हिलाकर रख दिया है, जिसमें वेस्टइंडीज के क्रिकेटर्स विरोध में सबसे आगे हैं। अजीम रफीक विवाद के बाद उनके काउंटी सेटअप को हिला देने के बाद इंग्लैंड ने भी अपनी प्रणाली में संस्थागत परिवर्तन करने की कोशिश की है।

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