सिर्फ एक रास्ता जो खत्म करेगा कोहली और गांगुली का विवाद, शास्त्री ने बताया

Ravi Shastri

नई दिल्ली। भारतीय टीम को जब साउथ अफ्रीका दाैरे पर रवाना होना था तो विराट कोहली और बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली के बीच के बीच ऐसा विवाद देखने को मिला जिसने क्रिकेट जगत को हिलाकर रख दिया। कोहली माैजूदा समय दुनिया के महान बल्लेबाजों में से एक हैं, लेकिन जिस तरीके से उनसे सीमित ओवरों की कप्तानी छीनी गई उसका उन्होंने खुद विरोध किया। बीसीसीआई का कहना है कि हमने कोहली को टी20आई कप्तानी ना छोड़ने की गुजारिश की थी तो वहीं कोहली ने उनके दावे को झूठ बताया। साथ ही कोहली ने यह भी आरोप लगाया कि वनडे कप्तानी को लेकर भी बीसीसीआई ने कोई स्पष्ट रूप से बात नहीं की थी। वहीं बीसीसीआई ने कोहली के बयान को झूठ बताया। दोनों के बीच टकराव ने सवाल खड़े कर दिए कि आखिरी कौन सच बोल रहा है। अब एक बार फिर इस मामले पर पूर्व भारतीय कोच रवि शास्त्री ने राय दी है और बताया कि कैसे इस मामले को खत्म किया जा सकता है।

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शास्त्री ने दी राय

शास्त्री ने दी राय

कोहली का बीसीसीआई से विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। ऐसे में शास्त्री ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में अपनी राय देते हुए बताया कि कैसे इस विवाद को खत्म किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "अच्छी बातचीत के साथ इस मामले को संभाला जा सकता था। अच्छा होता अगर बात पब्लिक के सामने ना आती बल्कि दोनों के बीत अगर सीधी बात होती तो सब बेहतर हो सकता था। कोहली ने तो अपना पक्ष सामने रख दिया है, लेकिन अब गांगुली को चाहिए कि वो इस पर अपनी राय दें और अपना पक्ष रखें। सवाल ये नहीं बनता कि कौन झूठ बोल रहा है? बल्कि सवाल यह है कि सच क्या है? हम सब सच्चाई जानना चाहते हैं और ये तभी संभव है जब दोनों तरह से कोई बातचीत हो। मामले में एक पक्ष ने अपनी बात कह दी है। अब गांगुली की बारी है, जिससे फिर सच सामने आएगा।"

विराट की हां में हां मिलाने की बात को नकारा

विराट की हां में हां मिलाने की बात को नकारा

कहा जाता था कि शास्त्री अपने कार्यकाल के दाैरान कोहली की हां में हां मिलाते थे। जब इससे जुड़ा उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, ''मैं ऐसी बातों को ज्यादा अहमियत नहीं देता हूं। लोगों को अपनी बात कहने, लिखने और अटकलें लगाने का अधिकार है, पर इसका मतलब ये नहीं कि मैं भी इसमें शामिल हो जाऊं। कोहली के साथ मेरा रिश्ता बहुत अच्छा था। दो समान विचारधारा वाले लोग पेशेवर तरीके से अपना काम कर रहे थे। मेरे और उसमें काफी समानता है। कोहली खेल को लेकर काफी आक्रामक सोच रखते हैं। जो मेरा शुरूआती क्रिकेट करियर था, उसमें मैं भी ऐसा था। मुझे कोहली में भी वैसा ही जुनून नजर आता है।"

दोनों हैं दिग्गज, विवाद बढ़ना सही संदेश नहीं

दोनों हैं दिग्गज, विवाद बढ़ना सही संदेश नहीं

बता दें कि कोहली-गांगुली दोनों ही क्रिकेट की दुनिया में दिग्गज नाम हैं। गांगुली ने अपनी कप्तानी के दाैरान टीम को विदेशी धरती पर जीत का स्वाद चखाने का काम किया था तो वहीं कोहली ने ना सिर्फ कप्तानी में बड़ी जीते दर्ज कीं, बल्कि बल्ले से भी खूब रन बनाए। ऐसे में दोनों के बीच विवाद बढ़ना क्रिकेट जगत के लिए सही संदेश नहीं है। इससे ना सिर्फ खिलाड़ियों का बीसीसीआई के प्रति खराब संदेश जाएगा, बल्कि किसी भी खिलाड़ी को यह डर रहेगा कि ना जाने कब उसे अचानक फैसला सुनने को मिल जाए। कुल मिलाकर बात यह है कि बीसीसीआई और खिलाड़ियों के बीच खेल के प्रति ध्यान देते हुए स्पष्ट बातचीत होनी चाहिए।

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