T20 की तूफान-आंधियों से पहले शारजाह में दिखा था सचिन का 'डेजर्ट स्टॉर्म', सब उड़ गए थे
नई दिल्ली, 22 फरवरी: आज ही के दिन 1998 में भारत के दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने वनडे इंटरनेशनल के इतिहास की सबसे बेहतरीन पारियों में से एक खेली थी। यह परी शारजाह के मैदान पर आस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई थी और उसको आज भी रेगिस्तान के तूफान यानी डेजर्ट स्टॉर्म के नाम से याद किया जाता है क्योंकि सचिन ने तब खतरनाक ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी की धज्जियां उड़ाते हुए 143 रनों की पारी खेली थी। ऑस्ट्रेलिया की बल्लेबाजी गेंदबाजी लाइन अप में शेन वार्न डेमियन फ्लेमिंग और माइकल कास्प्रोविच जैसे धुरंधर शामिल थे।

1998 में शारजाह में रेगिस्तान का तूफान
आईसीसी ने इस मौके पर ट्वीट किया और कहा कि आज ही के दिन 1998 में शारजाह में रेगिस्तान का तूफान यानी डेजर्ट स्टॉर्म आया था जो सचिन तेंदुलकर की सबसे महान पारियों में से एक है जो उन्होंने आस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्वसनीय 143 रनों के तौर पर खेली थी। यह मैच कोको कोला के ट्रॉफी के हिस्से के तौर पर खेला गया था। तीन टीमें शामिल थी जिसमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और इंडिया थे। भारत ने अपने 3 में से केवल एक ही मैच में जीतने में कामयाबी हासिल की थी जबकि न्यूजीलैंड की टीम चार में से एक ही मैच जीत पाई थी और वे प्रतियोगिता से बाहर होते होने की कगार पर थे।

तब तेज शतक बड़े दुर्लभ थे-
ऑस्ट्रेलिया की टीम तीनों में जीत चुकी थी और विजेता के तौर पर उभर रही थी। यह मुकाबला भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण था। अगर भारत यह मैच हार जाता तो न्यूजीलैंड की टीम बेहतर रन रेट के आधार पर फाइनल में पहुंच सकती थी। पहले बल्लेबाजी चुनते हुए आस्ट्रेलिया की टीम ने 50 ओवर में सात विकेट पर 284 रनों का जबरदस्त स्कोर खड़ा किया। तब यह स्कोर मैच विजेता माने जाते थे। भारत की ओर से वेंकटेश प्रसाद ने 41 रन देकर दो विकेट लिए थे। हरविंदर सिंह, अनिल कुंबले, हरभजन सिंह और सचिन तेंदुलकर को एक-एक विकेट मिला था।

रेतीली आंधी आई फिर सचिन का तूफान शुरू हुआ-
285 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की टीम ने सौरव गांगुली को नौवें ओवर में ही खो दिया। उसके बाद विकेटकीपर नयन मोंगिया आए और 22 ओवर में 35 रन बनाकर आउट हो गए। तब तक सचिन क्रीज पर खड़े थे और 22 ओवर में भारत का स्कोर 2 विकेट के नुकसान पर 107 रन बन चुका था। तभी इस मैदान पर रेतीली आंधी आई जिसके चलते 25 मिनट तक खेल रुका रहा और भारत को जीत के लिए 40 ओवर में 276 रनों का टारगेट दिया गया। जब मैच शुरू हुआ तो सचिन तेंदुलकर ने अपना तूफान चलाया ।

किसी भी गेंदबाज को बख्शा नहीं गया-
किसी भी गेंदबाज को बख्शा नहीं गया और माइकल कास्प्रोविच की जिस तरीके से पिटाई हुई थी वह आज भी 24 साल बाद लाखों लोगों को याद है। वार्न की भी जमकर पिटाई हुई। सचिन तेंदुलकर किसी भी स्तर पर रुकने के लिए तैयार नहीं थे और भारतीय टीम 42.5 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 242 रन बना चुकी थी और टीम को 29 रनों की दरकार थी। तभी एक चमत्कार हुआ और डेमियन फ्लेमिंग ने इस ओवर की अंतिम गेंद पर सचिन तेंदुलकर का विकेट गिरा दिया जिसके चलते भारत 40 ओवर में 242 रन पर पांच विकेट के तौर पर खड़ा था और अब उनको जीत के लिए अंतिम 3 ओवर में 34 रनों की दरकार थी।

किसी और हार की चर्चा इतने फख्र से नहीं होती-
सचिन तेंदुलकर ने 131 गेंदों पर 9 छक्के लगाकर एक महान पारी खेली और 143 रन बनाए। लेकिन तब भारतीय पारी सचिन के कंधों पर ही टिकी रहती थी इसी के चलते अजय जडेजा, वीवीएस लक्ष्मण, ऋषिकेश कानितकर जैसे खिलाड़ी सचिन की लय को आगे बरकरार नहीं रख पाए और टीम इंडिया 26 रनों से यह मुकाबला हार गई। भले ही भारत यह मुकाबला हार गया लेकिन सचिन की पारी ने टीम इंडिया का रन रेट इतना बेहतर कर दिया कि कीवी अपने आप प्रतियोगिता से बाहर हो गए और भारतीय टीम ने बाद में फाइनल मुकाबला खेला जो सचिन तेंदुलकर के जन्मदिन पर हुआ था।

फिर अपने 25वें बर्थडे पर रही-सही कसर भी पूरी कर दी
वह उनका 25 वा जन्मदिन था और 24 अप्रैल का दिन था। इस बार भी आस्ट्रेलिया ने बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 9 विकेट के नुकसान पर 272 रन बना लिए थे लेकिन सचिन तेंदुलकर ने इस बार 134 रनों की पारी 131 गेंदों में खेली और भारतीय टीम को 48.3 ओवर में जीत दिला दी और भारत ने शारजाह में कोको कोला कप जीत गया। आज भी सचिन तेंदुलकर के उस समय में लगाए गए शॉट क्रिकेट के फैंस को रोमांचित कर देते हैं। आज भी उस दौरान सचिन के शॉर्ट्स पर कहीं गई कमेंट्री फैंस के कानों में अलग ही झंकार पैदा करती है।












Click it and Unblock the Notifications