IND vs WI: निखिल चोपड़ा को कमेंट्री बॉक्स में देखा होगा, वे भी जीत के हीरो हैं
आपने निखिल चोपड़ा को कमेंट्री बॉक्स में जरूर देखा होगा। वेस्टइंडीज के खिलाफ भारतीय जीत के वे भी नायक रहे हैं। एक दिवसीय मैचों में वे बॉलिंग ऑलराउंडर की हैसियत से खेलते थे।
स्पोर्ट्स डेस्क, जुलाई 27: आपने निखिल चोपड़ा को कमेंट्री बॉक्स में जरूर देखा होगा। वेस्टइंडीज के खिलाफ भारतीय जीत के वे भी नायक रहे हैं। एकदिवसीय मैचों में वे बॉलिंग ऑलराउंडर की हैसियत से खेलते थे। अच्छे स्पिनर थे और लोअर ऑर्डर में लंबे हिट्स लगाते थे। एक अर्धशतक भी लगाया था। उनकी जबर्दस्त बॉलिंग के कारण वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी बालू की भीत की तरह ढह गयी और करारी हार हुई थी। विदेशी जमीन पर वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्होंने भारत की तरफ से सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी की है। मालूम हो कि यह एकदिवसीय मैच कनाडा के टोरंटो शहर में खेला गया था। ये मैच टोरंटो में क्यों खेला गया था? इसकी भी दिलचस्प कहानी है।
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टोरंटो में एकदिवसीय सीरीज
भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट बोर्ड ने 1996 में इंटरनेशनल मैनेजमेंट ग्रुप के साथ पांच साल के लिए एक करार किया था कि वे पांच साल तक टोरंटो में हर साल द्विपक्षीय वनडे क्रिकेट श्रृंखला खेलेंगे। इसका एक मकसद कनाडा में क्रिकेट को प्रोत्साहित करना था। टोरंटो के स्केटिंग एंड कलरिंग क्लब ग्राउंड पर क्रिकेट मैदान बनाया गया। 1996 में भारत-पाकिस्तान के बीच फ्रैंडशिप कप के नाम टोरंटो में वनडे सीरीज का आयोजन हुआ। पहली सीरीज पाकिस्तान ने 3-2 से जीत ली। 1997 में दूसरी सीरीज हुई। भारत ने इस वनडे श्रृंखला में पाकिस्तान को 4-1 से हरा दिया। 1998 के सीरीज में पाकिस्तान को 4-1 से जीत मिली।

भारत-वेस्टइंडीज के बीच टोरंटो में वनडे मैच
लेकिन 1999 में भारत और पाकिस्तान के राजनीतिक संबंध बहुत खराब हो गये। पाकिस्तान ने धोखे से कारगिल युद्ध शुरु कर दिया था। इसकी वजह से 1999 में भारत ने पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने से इंकार कर दिया। लेकिन करार के मुताबिक अगर यह क्रिकेट सीरीज नहीं होती तो अनुबंधित कंपनी को आर्थिक नुकसान होता। तब वेस्टइंडीज की टीम को भारत के खिलाफ खेलने के लिए टोरंटो आमंत्रित किय गया। इस तरह कनाडा के टोरंटो में भारत और वेस्टइंडीज के बीच क्रिकेट मैच की शुरुआत हुई।

3 वनडे मैचों की सीरीज
टोरंटो में भारत-वेस्टइंडीज के बीच 11 सितम्बर से 14 सितम्बर 1999 के बीच वनडे सीरीज हुई। भारत के कप्तान सौरव गांगुली और वेस्टइंडीज के कप्तान ब्रायन लारा थे। पहला वनडे भारत ने 8 विकेट से जीता। वेस्टइंडीज केवल 163 रन ही बना सका था। इस मैच में रॉबिन सिंह ने 10 ओवर में 43 रन देकर 3 विकेट लिये थे। रॉबिन सिंह का जन्म त्रिनिदाद में हुआ था। वे वेस्टइंडीज के क्रिकेटर थे लेकिन भारत के लिए खेले थे। दूसरे वनडे में वेस्टइंडीज ने जबर्दस्त वापसी की और भारत को 70 रनों से हरा दिया। चूंकि बात हो रही है निखिल चोपड़ा की इसलिए तीसरे वनडे की तफ्सील से चर्चा जरूरी है। इसी मैच में निखिल ने यादगार बॉलिंग की थी।

द्रविड़ की शानदार बैटिंग
तीसरे वनडे में वेस्टइंडीज ने टॉस जीता और भारत को पहले बैटिंग के लिए बुलाया। सौरव गांगुली और विकेटकीपर एमएसके प्रसाद पारी शुरू करने के लिए क्रीज पर आये। प्रसाद को 2 रन पर ही वाल्श ने बोल्ड कर दिया। गांगुली ने 34 और जेकब मार्टिन ने 33 रन बनाये। लेकिन राहुल द्रविड़ ने कमाल की बैटिंग की। उन्होंने 87 गेंदों पर 77 रन बनाये जिसमें 6 चौके और 2 छक्के शामिल थे। द्रविड़ ने विनोद काम्बली (26) के साथ मिल कर भारत का स्कोर 197 कर पहुंचाया। तभी काम्बली पांचवें विकेट के रूप में आउट हो गये। कुल मिला कर भारत ने 50 ओवर में 7 विकेट पर 225 रन बनाये। तब वनडे क्रिकेट आज की तरह फास्ट न था। कोई- कोई खिलाड़ी ही सौ की स्ट्राइक रेट से खेलता था। वेस्टइंडीज की तरफ से तेज गेंदबाज मर्वन ढिल्लन ने 10 ओवर में 51 रन देकर 5 विकेट लिये थे।

निखिल की फिरकी का जादू
वेस्टइंडीज की पारी शुरू हुई। भारतीय तेज गेंदबाजी देवाशीष मोहंती, वैंकटेश प्रसाद के कंधों पर थी। मध्यम तेज गेंदबाज के रूप में कप्तान सौरव गांगुली और रॉबिन सिंह थे। स्पिन गेंदबाजी के मोर्चे पर निखिल चोपड़ा और सुनील जोशी थे। मोहंती ने सलामी बल्लेबाज कैम्पबेल को 0 पर बोल्ड कर भारत को बेहतरीन शुरुआत दिलायी। वैंकटेश प्रसाद ने दूसरे सलामी बल्लेबाज रिडली जैकब को भी 0 पर आउट कर दिया। वेस्टइंडीज को बड़ा झटका तब लगा जब वैंकटेश प्रसाद ने शिवनारायण चंद्रपाल को 12 पर कैच आउट करा दिया। वेस्टइंडीज के 20 रन पर 3 विकेट गिर चुके थे। इसी सीरीज में क्रिस गेल ने वनडे डेब्यू किया था।
वे अपना तीसरा वनडे खेल रहे थे। लेकिन मोहंती ने उन्हें केवल 7 रन पर चलता कर दिया। इसके बाद निखिल चोपड़ा ने आक्रमण की कमान संभाली। उन्होंने ब्रायन लारा के रूप में वेस्टइंडीज का सबसे कीमती विकेट लिया। कप्तान लारा 26 रन ही बना सके। लारा छठे विकेट के रूप में आउट हुए और उस समय वेस्टइंडीज का स्कोर था 6 विकेट पर 52 रन। वेस्टइंडीज की बैटिंग धराशायी हो चुकी थी।

निखिल चोपड़ा के पांच विकेट
लेकिन पांचवें नम्बर खेलने के लिए उतरे रिकार्डो पॉवेल ने अपनी आक्रामक बैटिंग से समां बांध दिया। उन्होंने चौकों-छक्कों की झड़ी लगा दी। वे खतरनाक हो रहे थे कि निखिल चोपड़ा ने पॉवेल को 76 रन पर आउट कर दिया। पॉवेल ने 73 गेंदों पर 3 चौकों और 7 छक्कों की मदद से ये रन बनाये थे। इसके बाद निखिल चोपड़ा की फिरकी का जादू चल पड़ा। फिर उन्होंने जिमी एडम्स, मर्वन ढिल्लन और कोरी कैलिमोर के विकेट चटकाये। इस तरह निखिल चोपड़ा ने 6.2 ओवर में 2 मेडन रखते हुए 21 रन देकर पांच विकेट लिये। निखिल चोपड़ा की इस लाजवाब बॉलिंग से वेस्टइंडीज की टीम 34.2 ओवर में सिर्फ 134 रन ही बना सकी।
भारत 88 रनों से यह मैच जीत लिया और सीरीज पर 2-1 से कब्जा जमा लिया। देवाशीष मोहंती और वैंकटेश प्रसाद को 2-2 विकेट मिले। एक विकेट रॉबिन सिंह को मिला। निखिल चोपड़ा की तरह राहुल द्रविड़ के लिए भी ये मैच यादगार है। द्रविड़ ने इस मैच में सबसे अधिक 77 रन बनाये थे और 4 कैच भी लिये थे।












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