MS Dhoni चैंपियन विथ गोल्डन हार्ट हैं, IPL विनर ट्रॉफी के लिए रायुडू को बुलाया, यूजर्स बोले- Mahi Way
चेन्नई सुपरकिंग्स धोनी की कप्तानी में पांचवीं बार आईपीएल चैंपियन बन चुकी है। लीजेंड बन चुके थाला यानी धोनी क्यों इतने खास हैं, इसका पता उनके व्यक्तित्व से लगता है। बनावटीपन न होना सबसे अहम तत्व है।

MS Dhoni क्रिकेट की दुनिया में किवदंती बन चुके हैं। कभी इंटरनेशनल क्रिकेट में सचिन सरीखे सितारों से सजी टीम की कप्तानी का दारोमदार भी धोनी के कंधे पर रहा। इसे अवसर बनाते हुए धोनी ने बतौर कप्तान आईसीसी के तीनों बड़े इवेंट्स में टीम इंडिया को सिरमौर बनाया।
15 साल पहले जब दुनिया की सबसे बड़ी टी20 लीग क्रिकेट- इंडियन प्रीमियर लीग के मुकाबलों की शुरुआत हुई, उस समय भी धोनी के कंधे पर करोड़ों इंडियंस और इससे भी बढ़कर क्रिकेट प्रेमियों की उम्मीदों का भार था।
2007 में टीम इंडिया को आईसीसी की टी20 ट्रॉफी दिला चुके धोनी ने 2008 में शुरू हुए आईपीएल में भले ही बतौर विजेता शुरू नहीं की, लेकिन उनकी कप्तानी में कई हीरे तराशे गए। कैप्टन कूल धोनी की कप्तानी के मुरीद फैंस अनेक कारणों से माही को आदर्श मानते हैं।
खुद धोनी ने आईपीएल 2023 के बाद देश-दुनिया से मिल रही इतनी मोहब्बत के पीछे खुद के अंदर बनावटीपन का न होना माना है। उन्होंने कहा, लोगों को शायद उनसे अधिक जुड़ाव लगता है। फैंस को लगता है कि वे भी धोनी की तरह क्रिकेट खेल सकते हैं।
जेंटमैन गेम में शानदार इंसानियत
कैप्टन की इसी सादगी की मिसाल मिलती है जब पूरे स्टेडिम में लोग सिलेब्रेट कर रहे हैं, माही ग्राउंड्समैन और स्टेडियम में काम करने वाले लोगों के साथ उनके पास जाकर फोटो क्लिक कराना उन्हें और खास बना देता है।
धोनी एक मेंटॉर के रूप में कैसे हैं? इस सवाल पर सबसे कॉमन जवाब मिलता है। तमाम साथी खिलाड़ी बिना झिझके इस बात को स्वीकार करते हैं कि 41 साल के धोनी 20-25 साल के युवाओं को अपनी नैचुरल गेम के लिए प्रोत्साहित करते हैं, परेशानी होने पर काफी मदद भी करते हैं।
पीली जर्सी के पीछे छिपा है सोने का दिल!
IPL 2023 में मिली जीत में सीनियर खिलाड़ी अंबाती रायुडू का भी अहम रोल रहा। चेन्नई समेत कई टीमों के साथ खेल चुके अंबाती टीम के लिए कितने अहम हैं, खुद माही ने इसका जवाब दिया। माही ने कहा, अंबाती शानदार खिलाड़ी हैं।
हालांकि, रायुडू के इमोशंस को लेकर माही ने कहा, शायद उनके जल्दी रिएक्ट करने के कारण ही उन्हें फेयर प्ले जैसे अवॉर्ड नहीं मिले। शुरुआती दिनों को याद कर धोनी ने बताया कि वे अंबाती को इंडिया ए के दिनों से जानते हैं रायुडू। हमेशा योगदान के लिए तत्पर रहने वाला खिलाड़ी हैं।
शायद कैप्टन के इसी भरोसा का नतीजा रहा कि आईपीएल फाइनल जैसे मुकाबले में उन्होंने बेहद नाजुक मोड़ पर 8 गेंदों में दो छक्के और एक चौके की मदद से 19 रनों की शानदार पारी खेली। इससे पहले रहाणे ने भी उपयोगी पारी खेली।
फैंस की नजरों में माही का मैजिक
संन्यास का ऐलान कर चुके रायुडू के लिए आईपीएल फाइनल इसलिए भी यादगार बन गया जब ट्रॉफी कलेक्शन के लिए धोनी ने रायूडू को इन्वाइट किया। यही बात धोनी को बाकी लोगों से अलग करती है। फैंस इसे माही का मैजिक कहते हैं। जीत का क्रेडिट पूरी टीम को देते हुए माही जश्न वाली तस्वीरों में सबके किनारे दिखते हैं।

हारने वाली टीम के खिलाड़ी का हौसला न टूटे इस बात को भी कैप्टन कूल बखूबी समझते हैं। कभी मोहित शर्मा माही की टीम में खेल चुके हैं, लेकिन इस बार गुजरात टाइटंस की टीम में मोहित ने लगातार दो मैच में माही को जीरो पर पवेलियन की राह दिखाई। इसके बाद भी जब दोनों एक दूसरे से मिले तो धोनी ने उनका हौसला बढ़ाया।
250 टी20 मुकाबले खेल चुके माही क्रिकेट की फील्ड पर न जाने ऐसे कितने लम्हे जी चुके हैं जो किसी का ख्वाब होता है। जमीन से जुड़े रहने और हमेशा वर्तमान को ईमानदारी से जीने की इसी शैली से महेंद्र सिंह धोनी जैसे किरदार गढ़े जाते हैं।

शायद इसी रियलिस्टिक अप्रोच के कारण धोनी ने रिटायरमेंट के बारे में सात-आठ महीने बाद सोचने की बात कही है। जिस तरह इंटरनेशनल क्रिकेट से धोनी ने 15 अगस्त 2020 को इंस्टाग्राम वीडियो पोस्ट कर रिटायरमेंट का ऐलान किया इससे भी लाइफ के प्रति उनकी एप्रोच का पता लगता है।
दार्शनिक अंदाज में विदाई
खास बात ये कि धोनी की रिटायरमेंट का ऐलान अंतिम मैच (10 जुलाई, 2019) के एक साल, एक महीने और पांच दिन बाद लिया था। हकीकत को स्वीकार करने, खुद से बेहतर मौजूद होने या आने वाले दिनों में इसकी संभावना को स्वीकारने का संदेश देने वाले माही ने साहिर लुधियानवी का लिखा गाना- 'मैं पल-दो-पल का शायर हूँ...' चुना। इसकी एक पंक्ति
कल और आएंगे नगमों की खिलती कलियां चुनने वाले
मुझसे बेहतर कहने वाले तुमसे बेहतर सुनने वाले
कैप्टन महेंद्र सिंह धोनी को सीनियर्स के साथ-साथ युवाओं के साथ तालमेल बिठाने में गाइड करती है। यानी हमेशा आने वाली नस्ल को पॉजिटिव और आशा भरी नजरों से देखना। सचिन, सहवाग, गांगुली, द्रविड़, कुंबले और जहीर खान सरीखे सीनियर्स को भी धोनी की कप्तानी में खेलने में कोई परेशानी नहीं हुई। क्रिकेटर्स की नई पौध तैयार करने में भी उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया।
न्यूजीलैंड के खिलाफ आखिरी इंटरनेशनल मैच में रन आउट होने वाले धोनी ने हमेशा यही संदेश दिया है कि शारीरिक सेहत हकीकत है, इससे नजरें नहीं चुरा सकते। आईपीएल फाइनल जीतने पर भी उन्होंने यही बात दोहराई। माही के मैजिक के बारे में बातें अनवरत चलती रहेंगी।
फिलहाल विराम के लिए हार्दिक पांड्या से बेहतर कोई बयान नहीं। उन्होंने कहा, "कोई शैतान ही होगा जो धोनी से नफरत करे।" धोनी का होना इसी पॉजिटिविटी और खेल भावना का प्रसार है जिसमें गुजरात टाइटंस के कप्तान हारने के बाद भी मायूस नहीं, सीनियर की कामयाबी पर खुश होते हैं। शायद इसलिए क्योंकि धोनी व्यक्तित्व से बढ़कर इमोशंस बन चुके हैं।












Click it and Unblock the Notifications