'बुरे दाैर में KKR ने नहीं दिया था कुलदीप का साथ', पूर्व भारतीय क्रिकेट ने लगाया आरोप

Kuldeep

नई दिल्ली। आईपीएल 2022 में जैसे ही कुलदीप यादव की दिल्ली कैपिटल्स में एंट्री हुई तो उनकी चमक फिर से बिखरती दिखी। कुलदीप ने अभी तक खेले 7 मैचों में 13 विकेट ले लिए हैं। कुलदीप ने पिछला सीजन कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के लिए खेला था, लेकिन उन्हें 1 भी मैच खेलने को नहीं मिला। वहीं पूर्व भारतीय क्रिकेटर निखिल चोपड़ा ने माना कि केकेआर टीम प्रबंधन और अनुभवी खिलाड़ियों ने कुलदीप के बुरे दौर में उनका साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा कि कुलदीप को दिल्ली के मुख्य कोच रिकी पोंटिंग और कप्तान ऋषभ पंत से समर्थन मिला है।

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दिल्ली की टीम में चीजें धीरे-धीरे बदल गई हैं

दिल्ली की टीम में चीजें धीरे-धीरे बदल गई हैं

क्रिकट्रैकर पर 'नॉट जस्ट क्रिकेट शो' पर बात करते हुए निखिल ने कहा, "पिछले सीजन में केकेआर ने जो व्यवहार किया था, उससे कुलदीप खुश नहीं थे और वह एक मैच के दौरान भी भावुक हो गए थे। एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी को अपनी टीम से सपोर्ट मिलने की जरूरत होती है लेकिन केकेआर की तरफ से ऐसा दिखाई नहीं देता था। दिल्ली की टीम में चीजें धीरे-धीरे बदल गई हैं, जब वह विकेट लेते हैं, तो वह तुरंत अपने कप्तान पंत को गले लगाते हैं। वह टीम प्रबंधन से समर्थन मिलने के कारण विकेट लेने और टीम को जीत दिलाने का काम कर रहे हैं।''

बताई अपनी कहानी

बताई अपनी कहानी

चोपड़ा ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 1999 में अपनी कहानी को याद किया। पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने खुलासा किया कि वह चोट के कारण टोरंटो क्रिकेट महोत्सव सीरीज में वेस्टइंडीज के खिलाफ अंतिम वनडे मैच के लिए बाहर होने वाले थे। हालांकि, सौरव गांगुली ने उन्हें आत्मविश्वास प्रदान किया और उन्हें अपने मुख्य गेंदबाज के रूप में बताया और परिणाम यह रहा कि चोपड़ा ने 21 रन देकर 5 विकेट लेते हुए अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन से टीम को 2-1 से सीरीज जीतने में मदद मिली।

खेलने के लिए पेन किलर ली थी

खेलने के लिए पेन किलर ली थी

चोपड़ा ने कहा, "वेस्टइंडीज के खिलाफ 1999 के मैच में सौरव गांगुली ने पहली बार कप्तानी की। मैंने वनडे सीरीज के पहले दो मैचों में पहले ही तीन विकेट ले लिए थे और यह सीरीज का निर्णायक मैच था। मैच से पहले मुझे चोट की थोड़ी चिंता थी और फिजियो मुझे बता रहा था कि मैं दौड़ नहीं सकता और ब्रेक नहीं ले सकता। मैंने इसकी जानकारी दादा [सौरव गांगुली] को दी, लेकिन उन्होंने कहा कि आप मेरे लिए 10 ओवर फेंको, तुम मेरे मुख्य गेंदबाज हो। फिर मैंने पेन किलर लीं और भगवान की कृपा से मैंने पांच विकेट लिए। कप्तान के आत्मविश्वास ने मुझे अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिखाने का माैका मिला।''

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