क्या जसप्रीत बुमराह अभी भी दुनिया के No-1 फास्ट बॉलर हैं?
क्या जसप्रीत बुमराह अभी विश्व के नम्बर एक फास्ट बॉलर हैं? ओवल एकदिवसीय मैच के बाद बुमराह को नम्बर एक फास्ट बॉलर कहा जा रहा है।
स्पोर्ट्स डेस्क, 17 जुलाई: क्या जसप्रीत बुमराह अभी विश्व के नम्बर एक फास्ट बॉलर हैं? ओवल एकदिवसीय मैच के बाद बुमराह को नम्बर एक फास्ट बॉलर कहा जा रहा है। वनडे में उनकी रैंकिंग नम्बर एक है भी। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन बुमराह को क्रिकेट के सभी फॉर्मेट का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज मानते हैं। 90 मिल प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार, स्विंग, यॉर्कर, बाउंसर, स्लोअर सब कुछ है उनके पास। वॉन ने बुमराह को शाहीन आफरीदी और ट्रेंट बोल्ट से बेहतर तेज गेंदबाज माना है। वे अपने दौर के अन्य तेज गेंदबाजों से मिलों आगे हैं। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन और भारत के पूर्व क्रिकेटर और खेल विशेषज्ञ रवि शास्त्री ने भी बुमराह को मौजूदा समय का सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज माना है। ओवल एकदिवसीय मैच में बुमराह ने छह विकेट लिये थे जिसमें चार बल्लेबाजों को उन्होंने बोल्ड आउट किया था। दो बल्लेबाजों को विकेट के पीछे कैच कराया कराया था। इससे उनके यॉर्कर और स्विंग का अंदाजा लगाया जा सकता है। लसिथ मिलंगा के रिटायर होने के बाद जसप्रीत बुमराह को ही यॉर्कर किंग कहा जाता है।
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विश्व का सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज कौन?
क्रिकेट का इतिहास 145 साल पुराना है। तब से लेकर अब तक क्रिकेट के मौलिक स्वरूप में कई नयी चीजें जुड़ती चली गयीं। तेज गेंदबाजी के अंदाज और मिजाज में भी बहुत फर्क आया है। सबसे सफल तेज गेंदबाज इंग्लैंड के जॉर्ज लोहमान (1884-1896) को माना जाता है। उन्होंने केवल 16 टेस्ट मैच खेल कर 100 विकेट लिये थे। ये रिकॉर्ड उन्होंने 1896 के जोहांसबर्ग टेस्ट में बनाया था। इस टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के 9 विकेट लिये थे और सिर्फ 28 रन दिये थे। दूसरी पारी में उन्होंने 43 रन देकर 3 विकेट लिये थे। यानी इस टेस्ट में उन्हें 12 विकेट मिले थे।
जॉर्ज लोहमान की खासियत ये थी कि वे इस टेस्ट में बतौर ओपनर बैटिंग के लिए उतरे थे। उस समय स्पीडोमीटर नहीं था। इसलिए उनकी गेंदों की गति ज्ञात नहीं है। लेकिन माना जाता था कि उनकी गेंदें इतनी सटीक होती थीं कि उन्हें खेलना मुश्किल होता था। उनकी काबिलियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जो रिकॉर्ड (100/16) उन्होंने 126 साल पहले बनाया था वह आज तक नहीं टूट सका है।

फास्ट बॉलर का 126 साल से अटूट रिकॉर्ड
इसके बाद तेज गेंदबाजों की बात करें तो वेस्टइंडीज के एंडी रॉबर्ट्स, इंग्लैंड के इयान बॉथम और दक्षिण अफ्रीका के वेर्नन फिलेंडर ने 19 टेस्ट मैचों में 100 विकेट लिये। ये सभी मैच विजेता खिलाड़ी साबित हुए। दक्षिण अफ्रीका के डेल स्टेन और पाकिस्तान के वकार युनूस ने 20 टेस्ट मैचों में विकेटों का शतक पूरा किया और दुनिया में अपनी तेज गेंदबाजी का रुतबा बुलंद किया। ऐसा नहीं है कि कम टेस्ट में 100 वेकेट लेने वाले तेज गेंदबाज ही सर्वश्रेष्ठ हैं। कुछ असफल भी हुए। जैसे कि पाकिस्तान के मोहम्मद आसिफ ने केवल 20 टेस्ट में ही 100 विकेट लिये थे। लेकिन उनका करियर 106 विकेट लेने के बाद ही खत्म हो गया। वे सिर्फ 23 टेस्ट ही खेल सके थे। मतलब, प्रदर्शन में निरंतरता ही किसी गेंदबाज को आगे ले जाती है। जसप्रीत बुमराह ने 24 टेस्ट मैच खेल कर 100 पूरे किये हैं। बुमराह ने 100 विकेट लेने के लिए जरूर कुछ अधिक टेस्ट खेले लेकिन उनकी प्रतिभा उन्हें विशिष्ट खिलाड़ी बनाती है।

ज्यॉफ थॉम्पसन- हिंसक फास्ट बॉलिंग में यकीन
आस्ट्रेलिया के डेनिस लिली और ज्यॉफ थॉम्पसन को दुनिया की सबसे बर्बर और हिंसक तेज गेंदबाज जोड़ी माना जाता है। 1974-75 के दौर में इनका ऐसा आंतक था कि बड़े-बड़े बल्लेबाज भी इनका सामना नहीं करना चाहते थे। 1974 में इंग्लैंड की टीम आस्ट्रेलिया के दौरे पर गयी थी। पहले टेस्ट मैच के एक दिन पूर्व ज्यॉफ थॉम्पसन ने एक टेलीविजन इंटरव्यू में कहा था, मुझे विकेट लेने से अधिक बल्लेबाज को घायल करने में मजा आता है। मैं पिच पर खून बिखरा हुआ देखना चाहता हूं। उस समय थॉम्पसन को दुनिया का सबसे तेज और खतरनाक बॉलर माना जाता था। कहा जाता है कि वह मनोवैज्ञानिक रूप से कुंठित थे और बल्लेबाजों को अपना दुश्मन समझते थे।
कुछ लोग उसे सनकी और झक्की मानते थे। लेकिन इन कमियों के बावजूद वे विकेटटेकर बॉलर थे। आस्ट्रेलिया के कप्तान इयान चौपल ने थॉम्पसन के इसी जुनून का फायदा उठाया। ब्रिस्बेन के पहले टेस्ट में थॉम्पसन ने ऐसी हिंसक तेज गेंदबाजी का प्रदर्शन किया कि इंग्लैंड की टीम आतंकित हो गयी। आस्ट्रेलिया ने ये मैच 166 रनों से जीत लिया।

थॉम्पसन-लिली ने जब बल्लेबाजों को घायल कर डराया
थॉम्पसन ने पहली पारी में 3 और दूसरी पारी में 6 विकेट लेकर इंग्लैंड की कमर तोड़ दी। इंग्लैंड के तीन प्रमुख बल्लेबाजों डेनिस एमिस, जॉन एड्रिच और डेविड लॉयड के हाथ टूट गये। एक अन्य बल्लेबाज कीथ फ्लेचर की बांह चोट के कारण नीली पड़ गयी थी और उनसे बल्ला भी नहीं उठा पा रहा था। इंग्लिश बल्लेबाजों को घायल करने में लिली भी पीछे नहीं थे। प्लेचर को लिली ने ही घायल किया था। लॉयड को छोड़ कर ये घायल बल्लेबाज दूसरे टेस्ट में नहीं खेल पाये। ऐसी हिंसक फास्ट बॉलिंग देख कर इंग्लैंड के बल्लेबाज काफी भयभीत हो गये। थॉम्पसन-लिलली की आग उगलती गेंदों को कोई खेल नहीं पा रहा था। तब इंग्लैंड ने अपने महान बल्लेबाज कोलिन काउड्रे को याद किया।

जब लिली-थॉम्पसन के सामने उतरे 41 साल के काउड्रे
उस काउड्रे की उम्र 41 साल हो चुकी थी और टेस्ट क्रिकेट से रिटायर हो गये थे। काउड्रे को फास्ट बॉलिंग का सबसे अच्छा बल्लेबाज माना जाता है। इंग्लैंड के खेमे में जोश भरने के लिए 41 साल के काउड्रे को दूसरे टेस्ट में शामिल किया गया। लेकिन नतीजा नहीं बदला। बहुत दिनों के बाद काउड्रे टेस्ट मैच खेल रहे थे। उन्होंने 101 गेंदें खेल कर 22 रन बनाये। लेकिन वे खुद को थॉम्पसन का शिकार होने नहीं बचा पाये। दूसरी पारी में थॉम्पसन ने काउड्रे को 41 रनों पर आउट किया और पांच विकेट लिये। दूसरा टेस्ट भी इंग्लैंड हार गया। थॉम्पसन-लिली की खौफनाक जोड़ी के कहर से आस्ट्रेलिया ने छह टेस्ट मैचों की यह सीरीज 4-1 से जीती थी।

जब लिली ने की थी 9 स्लिप के साथ बॉलिंग
1976 में एक कैच लेने की कोशिश में ज्यॉफ थॉम्पसन अपने साथी खिलाड़ी से इस बुरी तरह से टकराये कि उनका कंधा जबर्दस्त रूप से घायल हो गया। इस चोट से उबरने में उन्हें समय लगा। लेकिन जब वे मैदान पर लौटे तो अपनी पुरानी रफ्तार खो चुके थे। उनकी गेंदों में पहले की तरह धार नहीं थी। लेकिन डेनिस लिली मैच दर मैच और खतरनाक होते गये। 1977 में आस्ट्रेलिया की टीम न्यूजीलैंड के दौरे पर गयी थी। टीम के कप्तान ग्रेग चैपल थे। उन्होंने लिली के खौफ को भुनाने के लिए ऑकलैंड टेस्ट में ऐसा फैसला लिया कि वह इतिहास बन गया। न्यूजीलैंड की पारी के दो विकेट ही बचे थे। लिली बॉलिंग करने आये।
तब चैपल ने बल्लेबाज को डराने के लिए स्लिप में 9 फील्डर खड़े कर दिये। मैदान पर अद्भुत दृश्य था। लिली अपने रनअप पर खड़े थे। कीपर मार्श विकेट के पीछे खड़े थे। बाकी के 9 फील्डर स्लीप में खड़े थे। इस फिल्डिंग सजावट पर कई तरह की कहानियां भी प्रचलित हैं। विश्व क्रिकेट में लिली-थॉम्पसन के उदय ने फास्ट बॉलिंग के मकसद और मतलब को ही बदल दिया।












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