IPL 2023: शाहरुख खान की टीम चेन्नई या मुम्बई जैसी क्यों नहीं बन सकी ?
IPL 2023: केकेआर को जितनी सफतला मिलनी चाहिए थी, उतनी नहीं मिली। गौतम गंभीर की कप्तानी में दो बार केकेआर ने खिताब जीता।

IPL 2023: चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स की सोच और रणनीति में सबसे बड़ा फर्क क्या है ? कप्तानी को लेकर दोनों की सोच अलहदा है। चेन्नई जहां अपने पहले कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी को लगातार समर्थन देता रहा है वहीं कोलकाता अपने मतलब के लिए कप्तान बदलते रहा है। इस मामले में कोलकाता नाइटराइडर्स के मालिक शाहरुख खान पर मतलबपरस्त और अभिमानी होने का आरोप लगता रहा है। कहा जाता है कि फिल्मी दुनिया का सुपर स्टार होने की वजह से शाहखान खान क्रिकेट को भी अपने तरीके से चलाना चाहते हैं। शाहरुख खान ने पहले सौरव गांगुली को हटाया। फिर दो बार चैंपियन बनाने वाले गौतम गंभीर को हटाया। प्रतियोगिता के बीच में दिनेश कार्तिक से कप्तानी छीन कर इयान मोर्गन को कमान सौंप दी थी। इयाम मोर्गन भी नहीं टिके। उनकी छुट्टी कर श्रेयस अय्यर को नया कप्तान बनाया। लेकिन किस्मत देखिए कि अय्यर 2023 सीजन के पहले घायल हो गये और केकेआर को फिर नये कप्तान की खोज माथा खपाना पड़ा।
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जब सौरव गांगुली को कप्तानी से हटाया था
सौरव गांगुली ने भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा था। उनकी कप्तानी में ही पहली बार टीम इंडिया ने विरोधियों की आंखों में आंखें डाल कर खेलना सीखा था। देश और विदेश में जीतने का नया जोश पैदा हुआ था। सौरव गांगुली क्रिकेट के सफल रणनीतिकार थे। केकेआर को खड़ा करना में भी गांगुली ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। पहले तीन सीजन तक वे केकेआर के कप्तान रहे। जब टीम को वे फाइनल तक नहीं पहुंचा सके तो शाहरुख खान ने गांगुली को अपमानजनक तरीके से कप्तानी छीन ली। एक कार्यक्रम में पत्रकार वीर सिंघवी ने शाहरुख खान से पूछा था, आप गांगुली जैसे क्रिकेटर को कैसे अपमानित कर सकते हैं ? उन्होंने भारतीय क्रिकेट को ऊंचाई तक पहुंचाने में बहुत बड़ा योगदान दिया है, फिर भी आपने उनके साथ बुरा बर्ताव किया ? इस बात के लिए क्या आपको शर्मिंदगी है ? तब शाहरुख खान ने कहा, बिल्कुल नहीं, मुझे सौरव गांगुली को हटाने का कोई मलाल नहीं है। इस मामले में मैं डिप्लोमेटिक तरीके से सोचता हूं।
गौतम गंभीर ने तो जिताया फिर क्यों हटाया ?
सौरव गांगुली की बात छोड़िए, गौतम गंभीर को आखिर क्यों कप्तानी से हटाया ? जब कि उन्होंने केकेआर को दो आइपीएल खिताब दिलाये थे ? जब सौरव गांगुली से कप्तानी छीन कर गंभीर को दी गयी थी तब शाहरुख खान ने उनसे कहा था, ये आपकी टीम है, इसे बनाइए या तोड़िए, मैं बीच में नहीं आऊंगा। लेकिन शाहरुख अपनी बात पर कायम नहीं रहे। गंभीर ने 2012 और 2014 में केकेआर को आइपीएल ट्रॉफी दिलायी। लेकिन 2018 में गंभीर के लिए प्रतिकूल स्थितियां पैदा हो गयीं। आइपीएल की अधिकतर टीमें वैसे खिलाड़ियों को रिटेन करतीं हैं जो उनकी जीत के नायक होते हैं। लेकिन 2018 में केकेआर ने गौतम गंभीर को रिटेन नहीं किया। शाहरुख खान ने सुनील नरेन और आंद्रे रसेल को अहम खिलाड़ी मानते हुए बरकरार रखा और गंभीर को रीलीज कर दिया था। गौतम गंभीर के योगदान का यही सिला दिया था केकेआर ने
चेन्नई हमेशा धोनी के साथ
चेन्नई सुपर किंग्स आखिर क्यों आइपीएल की दूसरी सबसे सफल टीम है ? इसकी वजह हैं महेन्द्र सिंह धोनी। चेन्नई हारे या जीते, लेकिन वह हमेशा अपने कप्तान धोनी के साथ खड़ा रहती है। जडेजा विवाद के समय भी वह धोनी के साथ थी। इस अटूट विश्वास ने धोनी की नेतृत्व क्षमता को और भी बढ़ा दिया। इस विश्वास की वजह से ही धोनी जोखिम उठाने वाले बड़े-बड़े फैसले लेते रहे हैं। वे जानते हैं कि अगर जोखिम के जुए में वे हार भी गये तो उनसे कोई सवाल नहीं पूछेगा। इसी विश्वस की वजह से धोनी नाराज साथी को भी मना लेते हैं। जैसे अभी उन्होंने रवीन्द्र जडेजा को मना कर फिर अपनी टीम के साथ जोड़ा है। लेकिन केकेआर में टीम भावना का यह उच्च स्वरूप कभी विकसित नहीं हो पाया ?
शाहरुख खान की सोच अलग
कहा जाता है कि गौतम गंभीर को केकेआर ने इस लिए हटा दिया था क्यों कि नकी उम्र 36 साल हो चली थी। अगर उम्र ही किसी खिलाड़ी की काबिलियत तय करने का पैमाना है तो फिर महेन्द्र सिंह धोनी बी नहीं खेल रहे होते। अब चेन्नई की दरियादिली देखिए। प्रतिबंध के बाद 2018 में जब चेन्नई की टीम फिर प्रतियोगिता में लौटी तो टीम प्रबंधन ने धोनी को 15 करोड़ में रिटेन कर लिया था। उस समय धोनी की उम्र 36 साल थी। सबसे बड़ी बात ये कि 2017 में धोनी के बल्ले से रन भी नहीं निकले थे। इसके बावजूद चेन्नई ने धोनी पर भरोसा जताया था। अगर 36 साल के धोनी आइपीएल में टीम की कप्तानी कर सकते थे तो क्या गंभीर क्यों नहीं कर सकते थे ? लेकिन शाहरुख खान ने तो गंभीर से इसलिए किनारा कर लिया था क्यों कि अब वे पहले की तरह उपयोगी नहीं रह गये थे।
IPL बिजनेस है लेकिन इसमें भी भरोसे की जरूरत
वैसे आइपीएल क्रिकेट का बिजनेस जरूर है लेकिन इस बिजनेस में भी भरोसे की बहुत अहमियत है। आज मुम्बई और चेन्नई इसलिए सफल टीमें हैं क्यों कि प्रबंधन हमेशा अपने कप्तान के साथ खड़ा रहता है। हार हो या जीत, इससे उनका फैसला नहीं बदलता। 2022 में चेन्नई 9वें और मुम्बई 10वें स्थान पर रहीं थीं। लेकिन धोनी और रोहित 2023 के सीजन में कप्तान हैं। जीत के लिए कौशल और योग्यता बहुत जरूरी है लेकिन उससे भी जरूरी है आत्मविश्वास। अगर बार बार कप्तान बदलेंगे तो टीम का आत्मविश्वास शायद ही कभी मजबूत हो पाये।












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