'मैं तुम्हारे पैसे वापस दे दूंगा', जब शेन वॉर्न ने लगभग छोड़ दिया था राजस्थान रॉयल्स का खेमा
नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग के पहले संस्करण में दुनिया की सबसे मशहूर टी20 लीग का खिताब जीतने के बाद से ही राजस्थान रॉयल्स का ट्रॉफी कैबिनेट लगातार खाली रहा है। हालांकि संजू सैमसन की कप्तानी वाली राजस्थान रॉयल्स की टीम ने 14 साल बाद एक बार फिर से टीम को उस मुकाम पर ला खड़ा किया है जहां पर उसके ट्रॉफी कैबिनेट में एक और खिताब जा सकता है। आईपीएल के 15वें सीजन का फाइनल मैच रविवार 29 मई को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाना है जहां पर राजस्थान रॉयल्स की टीम का सामना पहली बार इस टूर्नामेंट में खेल रही गुजरात टाइटंस से होगा।
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राजस्थान रॉयल्स की टीम को आईपीएल में इकलौता खिताब जिताने का श्रेय पूर्व कप्तान शेन वॉर्न को जाता है जिनका निधन इसी साल मार्च के महीने में हार्ट अटैक के चलते हो गया था। राजस्थान रॉयल्स की टीम के लिये यह सीजन अब तक काफी शानदार रहा है, जहां पर उसने इस दुख को अपना हथियार बनाकर हर चुनौती को पार किया है।

जब वॉर्न ने लगभग छोड़ दिया था राजस्थान रॉयल्स का खेमा
राजस्थान की टीम शेन वॉर्न को पहला रॉयल कहकर संबोधित कर रही है और इस कैंपेन को पूरी तरह से उन्हें समर्पित कर रही है। कप्तान संजू सैमसन ने इस पर बात करते हुए कहा था कि हमने शुरुआत से ही इस कैंपेन को शेन वॉर्न को समर्पित किया है और अब हम उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देने से महज एक कदम दूर खड़े हैं। हालांकि आपको यह जानकर हैरानी होगी कि शेन वॉर्न की जिस उपलब्धि को राजस्थान रॉयल्स की टीम रविवार को दोहराने की ओर देख रही है वो शायद कभी हो ही नहीं पाती क्योंकि एक वक्त ऐसा आ गया था जब टीम के मालिक मनोज बडाले और शेन वॉर्न के बीच चयन को लेकर इतनी अन-बन हो गई थी कि वो राजस्थान रॉयल्स का खेमा छोड़ना चाहते थे।

टीम में एक और खिलाड़ी चाहते थे मनोज बडाले
शेन वॉर्न की ऑटो बायोग्राफी नो स्पिन में पूर्व दिग्गज ने इस बात का खुलासा करते हुए वो किस्सा सुनाया है जिसमें वो राजस्थान रॉयल्स के मालिक मनोज बडाले 16 सदस्यीय टीम में एक और खिलाड़ी जोड़ना चाहते थे। हालांकि यह किस खिलाड़ी के चयन के बारे में था इसका खुलासा किताब में नहीं किया गया है, लेकिन यह बताया गया है बडाले यह बदलाव तब करना चाहते थे जब वॉर्न ने कोचिंग स्टाफ के साथ 50 खिलाड़ियों की लिस्ट में 16 का चयन कर लिया था।

मनोज बडाले से इस बात को लेकर हुई बहस
10 दिन के लंबे टीम ट्रॉयल्स के अनकैप्ड रविंद्र जडेजा और स्वनिल अनसोडकर ने ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज को काफी प्रभावित किया था लेकिन बडाले टीम में एक और अनकैप्ड प्लेयर को शामिल करना चाहते थे जिसे वॉर्न ने आसिफ के नाम से संबोधित किया है। बडाले लगातार आसिफ को शामिल करने के लिये दबाव बना रहे थे, हालांकि ट्रॉयल्स में वॉर्न उनके प्रदर्शन से ज्यादा प्रभावित नहीं हुए। वॉर्न का कहना था कि अगर वो ट्रॉयल्स में प्रभावित करने में नाकाम रहे आसिफ को टीम में शामिल कर लेते हैं तो ड्रेसिंग रूम के अंदर उनकी इज्जत हवा हो जायेगी।

मैं टीम छोड़ दूंगा पर ये नहीं करूंगा
उन्होंने कहा,'अगर मैं आसिफ को टीम में शामिल कर लेता हूं तो वो समझ जायेंगे कि एक वो खिलाड़ी जो उतना काबिल नहीं था और वो भी यहां है तो इसका मतलब है कि यहां पर एक खास तरह का फेवर किया जा रहा है। उस वक्त मैं उन्हें खो दूंगा। तो अगर आप आसिफ को टीम में चाहते हैं तो ठीक है मैं आपके पैसे वापस दे दूंगा और मैं इसका हिस्सा नहीं बनूंगा। इस बात पर मनोज ने कहा कि क्या तुम सीरियस हो जिसके जवाब में मैंने कहा कि बहुत ही ज्यादा, मुझे मेरे फैसले पर रहने दीजिये।'

डगआउट पर बिठाने के लिये भी नहीं माने वार्न
वॉर्न की बात सुनकर बडाले ने अपने कदम पीछे खींच लिये और वॉर्न को इस बात के लिये मनाया कि आप आसिफ को टीम के डगआउट में टीम की शर्ट पहनकर तो रहने दे सकते हैं, अगर उसे अंतिम 16 में जगह नहीं दी जा सकती। इसके जवाब में वॉर्न ने साफ किया कि नहीं वो एरिया हम सभी के लिये काफी छोटा है और दूसरी चीज मैं नहीं चाहता कि वो वहां पर बैठा रहे क्योंकि यह ऐसा लगेगा कि हम उसे फेवर कर रहे हैं। इसके बाद मनोज ने ठीक है कहकर बात को खत्म कर दिया। यह मामला यहीं पर समाप्त हो गया जिसके बाद वॉर्न ने वो कर के दिखाया जिसने वॉर्न और बडाले दोनों को एक-दूसरे के लिये सम्मान हासिल करने में मदद की।












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