IND vs SA: 3 गलतियां जो साउथ अफ्रीका दौरे पर भारत को पड़ी भारी, नहीं हुआ इतिहास रचने का सपना पूरा

नई दिल्ली। भारत और साउथ अफ्रीका के बीच खेली जा रही 3 मैचों की टेस्ट सीरीज में दुनिया की नंबर 1 टीम को मात देते हुए एक बार फिर से अपनी सरजमीं पर टेस्ट सीरीज को अपने नाम करने में कामयाब रही। साउथ अफ्रीका की टीम ने केपटाउन के मैदान पर खेले गये निर्णायक टेस्ट मैच में जोहान्सबर्ग की जीत को दोहराया और 2-1 से सीरीज को अपने नाम कर लिया। केपटाउन टेस्ट में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 223 रनों का स्कोर खड़ा किया जिसके जवाब में साउथ अफ्रीका 210 रन पर ऑल आउट हो गई। दूसरी पारी में भारतीय टीम के लिये ऋषभ पंत ने जरूर शतक लगाया लेकिन बाकी बल्लेबाजों ने निराश किया और विराट सेना सिर्फ 211 रन ही बना सकी। जवाब में 212 रनों का पीछा करने उतरी साउथ अफ्रीका की टीम ने 3 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया और सीरीज को अपने नाम कर लिया।
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साउथ अफ्रीका के लिये जोहान्सबर्ग में जीत की कहानी लिखने वाले कप्तान डीन एल्गर और कीगन पीटरसन केपटाउन में भी जीत के हीरो बनें। कीगन पीटरसन ने दोनों पारियों में अर्धशतकीय पारियां खेली और केपटाउन के मैदान पर दूसरी बार 200 से ज्यादा के लक्ष्य को हासिल किया। भारतीय कप्तान विराट कोहली के नेतृत्व में पहली बार हुआ है जब भारतीय 150 से ज्यादा रनों का बचाव करते हुए मैच हारी है। भारत ने साउथ अफ्रीका की कमजोर टीम के खिलाफ सीरीज का आगाज एक बड़ी जीत के साथ किया लेकिन इसके बाद वो अपनी जीत की लय को बरकरार नहीं रख सकी और पहले जोहान्सबर्ग और फिर केपटाउन में हार की वजह से सीरीज गंवा बैठी। आइये एक नजर उन गलतियों पर डालें जिसकी वजह से भारत ने सीरीज जीतने का गोल्डन चांस गंवा दिया।
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भारतीय बल्लेबाजों ने किया निराश
सेंचुरियन की ऐतिहासिक जीत में भारतीय टीम के लिये गेंदबाजों ने जरूर शानदार प्रदर्शन किया लेकिन बल्लेबाजों ने भी अहम भूमिका निभाई, जिसकी वजह से उसने पहली पारी में 300 से ज्यादा रनों का लक्ष्य खड़ा किया और मैच को अपने नाम करने में कामयाब रही। हालांकि इसके बाद भारतीय टीम बचे हुए दोनों मैच में बल्लेबाजी की लय खो बैठी और 4 में से सिर्फ एक बार ही 250 से ज्यादा रन जोड़े। यूं तो जोहान्सबर्ग (4 बार) और केपटाउन (2 बार) के मैदान पर चौथी पारी में 200 से ज्यादा रनों का पीछा करते हुए टीमों ने बेहद ही कम मैच जीते थे लेकिन जिस तरह से कीगन पीटरसन और डीन एल्गर ने जुझारू पन दिखाया उससे साउथ अफ्रीकी टीम ने आसानी से लक्ष्य को हासिल कर लिया। पहले मैच में शानदार शुरुआत दिलाने वाले भारतीय ओपनर्स बची हुए मैचों में अर्धशतकीय साझेदारी करने में भी नाकाम रहे तो वहीं पर मध्यक्रम में पुजारा-राहणे की जोड़ी 6 में से 4 पारियों में रनों का योगदान देने में नाकाम रही।

अहम मौकों पर छोड़े कैच
भारतीय टीम ने वैसे तो पूरी सीरीज के दौरान काफी शानदार फील्डिंग की लेकिन जोहान्सबर्ग टेस्ट और केपटाउन में भी उससे उन अहम मौकों पर गलतियां हुई जिसका खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा। जोहान्सबर्ग टेस्ट में भारतीय फील्डर्स ने डीन एल्गर और कीगन पीटरसन का कैच छोड़ा जिससे केएल राहुल की कप्तानी वाली भारतीय टीम को वापसी कर पाने का मौका नहीं मिल सका और 240 रनों का लक्ष्य देने के बावजूद टीम को हार का सामना करना पड़ा। वहीं केपटाउन टेस्ट मैच की चौथी पारी में अर्धशतक लगा चुके कीगन पीटरसन जब भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ तेजी से रन बना रहे थे तभी जसप्रीत बुमराह ने कैच का मौका बनाया जिसे पुजारा ने छोड़ दिया। जब यह कैच छूटा तब पीटरसन 59 रन के स्कोर पर खेल रहे थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने तेजी से 29 रन जोड़े और अपनी टीम को जीत की दहलीज पर लाकर छोड़ दिया।

बुमराह-शमी को नहीं मिला अन्य गेंदबाजों को साथ
पहले मैच में जब भारत ने 113 रनों की ऐतिहासिक जीत हासिल की थी तब मोहम्मद शमी-जसप्रीत बुमराह को मोहम्मद सिराज की गेंदबाजी का साथ मिला था लेकिन इसके बाद टीम के पेस अटैक को गेंदबाजों का साथ नहीं मिला। जोहान्सबर्ग टेस्ट में मोहम्मद सिराज पहली पारी के दौरान चोटिल हो गये थे जिसकी वजह से अच्छे तरीके से गेंदबाजी नहीं कर सके और भारतीय टीम के गेंदबाजों को चौथी पारी में वो कामयाबी नहीं मिल सकी, जिसकी वजह से टीम को जीत दिला पाती। इसके बाद केपटाउन टेस्ट में भारतीय टीम ने मोहम्मद सिराज की जगह उमेश यादव को मौका दिया लेकिन वो भी उतने कामयाब नहीं हो सके। पहली पारी में उन्होंने 2 विकेट जरूर हासिल किये लेकिन दूसरी पारी में न तो वो विकेट हासिल कर सके और न ही रन बचाने में कामयाब हो सके, जिसके चलते साउथ अफ्रीकी बल्लेबाजों पर कोई खास दबाव नहीं बना और उन्होंने आसानी से लक्ष्य को हासिल कर लिया।












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