वेस्टइंडीज में तेज गेंदबाजों से क्या अब कोई नहीं डरता?
नई दिल्ली, 29 जुलाई: वेस्टइंडीज की तेज गेंदबाजी कभी तूफान हुआ करती थी। लेकिन अब हवा का एक झोंका भर रह गयी। अब उनसे कोई नहीं डरता। कुछ लोगों को कहना है कि वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज अब क्लब स्तर के हो गये हैं तभी तो वे 300 प्लस स्कोर की भी हिफाजत नहीं कर पाते। भारत की दूसरी वरियता की टीम ने वेस्टइंडीज को वनडे में 3-0 से हरा दिया। पिछले दो महीने में वेस्टइंडीज लगातार 9 एकदिवसीय मैच हारा है। 2005 के बाद वनडे में वेस्टइंडीज की ये दूसरी सबसे बड़ी शर्मनाक हार है। क्रिकेट के सुपर पावर रहे वेस्टइंडीज की आखिर क्यों ऐसी हालत हो गयी है ? क्यों उसके खेल में पतन जारी है ? अब वहां पहले की तरह खौफनाक तेज गेंदबाज क्यों नहीं होते ?

वेस्टइंडीज में कोई जेनुइन फास्ट बॉलर नहीं !
तीन-चार साल पहले तक वेस्टइंडीज के सबसे तेज गेंदबाज शेनन ग्रैबियल माने जाते थे। उन्होंने सबसे तेज गेंद 148.7 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से डाली थी। लेकिन उन्होंने 2019 के बाद कोई एकदिवसीय मैच नहीं खेला है। टेस्ट मेचों में वे सफल रहे। 56 टेस्ट में उन्होंने 161 विकेट लिये हैं। इसके बाद ओसाने थोमस दूसरे सबसे तेज गेंदबाज हैं। उनकी सबसे तेज की रफ्तार थी 147.7 किलोमीटर प्रति घंटा। लेकिन 2020 के बाद उन्होंने भी कोई एकदिवसीय मैच नहीं खेला है। जाहिर है अब ये दोनों उतने प्रभावशाली नहीं रहे कि उनका टीम में चयन हो सके। वेस्टइंडीज की मौजूदा टीम में जो तेज गेंदबाज हैं उनमें अल्जारी जोसेफ को छोड़ कर कोई जेनुइन फास्ट बॉलर नहीं है।

वेस्टइंडीज के मौजूदा फास्ट बॉलर कितने तेज ?
अल्जारी जेसेफ ने आइपीएल 2022 में गुजरात टाइटंस की तरफ से खेलते हुए एक मैच में 151.3 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद डाली थी। उन्हें प्रतिभाशाली गेंदबाज भी माना जाता रहा है। लेकिन उनके प्रदर्शन में निरंतरता नहीं है। पहले वनडे में अल्जारी ने 10 ओवरों में 61 रन दिये। वेस्टइंडीज की ढीली गेंदबाजी के कारण ही भारत ने पहले वनडे में 308 रनों का स्कोर खड़ा किया था। इस मैच में अल्जारी के अलावा तेज गेंदबाज जाइडेन सील्स और रोमारियो शेफर्ड ने भी छह रन प्रति ओवर की दर से रन लुटाये थे। इन तीनों से बेहतर गेंदबाजी तो स्पिनर अकील होसैन और गुडकेश मोती ने की थी। 20 साल के उभरते हुए तेज गेंदबाज जाइडन सील्स को भविष्य का तेज गेंदबाज माना जा रहा है लेकिन वे भी मध्यम गति के तेज गेंदबाजी हैं। उनकी गति 135 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की है। उन्हें अभी बहुत कुछ सीखना है। पिछले साल जब वेस्टिंडीज ने पाकिस्तान को जमैका टेस्ट में केवल 1 विकेट से हराया था तब सील्स ने लाजवाब प्रदर्शन किया था। पांच विकेट लेने के अलावा उन्होंने रोच के साथ अंतिम विकेट के लिए 17 रनों की साझेदारी की थी। रोमारियो शेफर्ड भी मध्यम गति के ही तेज गेंदबाज हैं। उन्होंने कोई टेस्ट मैच नहीं खेला है। 18 एकदिवसीय मैचों में उन्होंने सिर्फ 11 विकेट लिये हैं। उनका चयन ऑलराउंडर के रूप में होता है।

मैच में वापसी कराने वाला कोई गेंदबाज नहीं
दूसरे एकदिवसीय मैच में वेस्टइंडीज 311 रन बना कर भी हार गया। कैरिबियन गेंदबाज इस बड़े स्कोर की रक्षा नहीं कर सके। जब भारत को जीत के लिए अंतिम ओवर में 8 रन चाहिए थे तब केली मेयर्स को गेंद थमायी गयी थी। मेयर्स भी मध्यम गति के ही तेज गेंदबाज हैं। उनकी औसत गति भी 135 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास है। वे टीम में बैटिंग आलराउंडर की हैसियत से खेलते हैं। अंतिम ओवर में एक, एक रन के बाद अक्षर पटेल ने चौथी गेंद पर छक्का मार कर भारत को यह मैच 2 विकेट से जिताया था। तीसरे मैच में जेसन होल्डर को टीम में शामिल किया गया। 2014 में क्लाइव लॉयड चयन समिति के अध्यक्ष थे। उन्होंने होल्डर में गैरी सोबर्स की छवि देखी थी। सिर्फ 23 साल की उम्र में ही वनडे टीम का कप्तान बना दिया था। कुछ महीने बाद ही उन्हें टेस्ट टीम का भी कप्तान बना दिया गया था। लेकिन वे गैरी सोबर्स के आसपास भी नहीं पहुंचे। उनकी बल्लेबाजी, गेंदबाजी से बेहतर है। होल्डर की औसत रफ्तार 126 से 132 किलोमीटर प्रति घंटा है। वे अपनी स्लोअर गेंदों से विकेट चटकाते रहे हैं। लेकिन उन्हें ऐसा गेंदबाज नहीं माना जाता कि वे मैच का नक्शा पलट दें। होल्डर ने तीसरे वनडे में 6 ओवरों में 43 रन दिये थे। जाहिर है वेस्टइंडीज की गेंदबाजी अब गौरवशाली अतीत की छाया मात्र रह गयी है।












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