जब गौतम गंभीर की पत्नी ने वर्ल्ड कप 2011 फाइनल का टिकट लेने से कर दिया था मना
नई दिल्ली, 19 मार्च: भारत के पूर्व बल्लेबाज गौतम गंभीर 2011 विश्व कप में टीम इंडिया को मिली जीत में काफी अहम भूमिका में थे। पूरी प्रतियोगिता में बाएं हाथ का यह बल्लेबाज अच्छी पारियां खेलता रहा लेकिन उनका बेस्ट तब आया जब श्रीलंका के खिलाफ खिलाफ फाइनल वाला हाई वोल्टेज मुकाबला हुआ। गौतम गंभीर अपनी 97 रनों की पारी में मात्र 3 रनों से शतक से चूक गए लेकिन उन्होंने भारत की जीत में अपनी शानदार भूमिका निभा कर अपना काम पहले ही कर दिया था।

नताशा से पूछा तो उन्होंने मना कर दिया-
उस वक्त स्टेडियम में कई फैंस गौतम गंभीर की मास्टर पारी को सलाम ठोक रहे थे, तालियां बजा रहे थे लेकिन तब उनकी गर्लफ्रेंड और अब पत्नी नताशा स्टेडियम में नहीं थीं।
गंभीर याद करते हैं कि नताशा ने 2011 विश्व कप फाइनल के फ्री टिकट ऑफर को भी ठुकरा दिया था। यह मैच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में हुआ था। गंभीर कहते हैं कि ना केवल नताशा ने टिकट ऑफर को तुरंत ठुकरा दिया बल्कि उल्टे यह पूछा क्या यह गेम इतना ज्यादा महत्वपूर्ण है? गौतम गंभीर यह भी बताते हैं कि इस गेम को जीतने के बाद ही उनकी पत्नी यह समझ पाई की ये खेल कितना महत्वपूर्ण था, जब उन्होंने देखा कि पूरा देश इस विजय पर कितना जश्न मना रहा है। गंभीर बताते हैं कि नताशा आज भी उस बात को याद करके शर्मिंदा हो जाती हैं।

'यह बस एक क्रिकेट का एक खेल ही तो है'
गंभीर ने जतिन सप्रू के यूट्यूब चैनल पर यह बात कही। वे कहते हैं कि, जब हम सेमीफाइनल मैच मोहाली में पाकिस्तान के खिलाफ जीत चुके थे और मुंबई पहुंचे तो मैंने नताशा को कहा- आप फाइनल मैच देखने के लिए आना चाहती हो? उन्होंने कहा- ठीक है, मुझे सोचने दो। और फिर कॉल बैक किया और पूछा- क्या यह इतना महत्वपूर्ण है? यह बस एक क्रिकेट का एक खेल ही तो है। मुंबई आने के लिए कौन परेशान होगा मेरी बहन और मेरे भाई आएंगे।

जीत के बाद अहसास हुआ तो शर्मिंदा हुईं-
गंभीर आगे बताते हैं कि, उनके बहन और भाई आए और जब हम जीते तभी वे इस बात का अहसास कर पाईं कि पूरा देश वास्तव में जश्न मना रहा था। उन्होंने पूछा- पूरा देश जश्न क्यों बना रहा है और मैंने कहा कि हम 20 साल से भी ज्यादा समय के बाद विश्व कप जीते हैं। यहां तक कि आज भी आज भी नताशा इस बात को लेकर शर्मिंदा होती है कि उस खेल में वह नहीं आ पाई थीं जबकि उनके बहन और भाई वहां मौजूद थे।

उस मुकाबले में बेहद अहम साबित हुए गंभीर-
अगर गेम की बात करें तो गौतम गंभीर ने जो पारी खेली वह बहुत अच्छी मौके पर आई क्योंकि भारत के दोनों ओपनर सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग 275 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए सस्ते में आउट हो गए थे। हालांकि गंभीर ने भारत को निराश नहीं होने दिया क्योंकि उन्होंने विराट कोहली के साथ टीम को मझधार से बाहर निकाला। इसके बाद का काम महेंद्र सिंह धोनी ने किया जो तब कप्तान थे और उन्होंने अंतिम गेंद पर छक्का लगाते हुए 91 रनों की नाबाद पारी खेली और भारत को उसका दूसरा 50 ओवर विश्व कप खिताब दिला दिया।












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