पूर्व भारतीय विकेटकीपर बोले- मेरे साथ भी हुआ था अन्याय, पर किसी ने नहीं दिया साथ
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज रिद्धिमान साहा ने पिछले कुछ दिनों में कई चौंकाने वाले खुलासे किया है, जिसकी वजह से लगातार विवाद बना हुआ है। श्रीलंका के खिलाफ शनिवार को दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिये टीम का ऐलान किया गया जिसमें उनका नाम नहीं होने पर पहले उन्होंने टीम मैनेजमेंट, चयनकर्ता और सौरव गांगुली को लेकर खई खुलासे किये तो वहीं पर एक जाने माने पत्रकार की ओर से उनके साथ की गई बदतमीजी के स्क्रीनशॉट शेयर कर एक नया विवाद शुरू कर दिया। इस मामले पर साहा को प्रज्ञान ओझा, वीरेंदर सहवाग और वेंकटेश प्रसाद समेत कई पूर्व क्रिकेटर्स का समर्थन मिला है तो कई खिलाड़ियों ने उनसे दोषी पत्रकार के नाम का खुलासा करने की अपील की है।

इस मामले पर बीसीसीआई ने भी साहा से संपर्क कर नाम का खुलासा करने की मांग की है ताकि भविष्य में किसी और खिलाड़ी को इस तरह के अनुभव से न गुजरना पड़े। हालांकि साहा ने सभी की इच्छा को दरकिनार करते हुए पत्रकार की पहचान को आम करने से इंकार कर दिया है और कहा है कि वो उस पत्रकार के करियर को खत्म नहीं करना चाहते हैं। उल्लेखनीय है कि पत्रकार विवाद सामने आने के बाद साहा के टीम से बाहर किये जाने और मैनेजमेंट को लेकर उनके दिये गये बयान को ज्यादा तव्ज्जो नहीं मिल रही है। अब इस पूरे मामले को पूर्व भारतीय विकेटकीपर ने भी ज्वाइन कर लिया है और कहा है 3 दशक पुराने किस्से को सुनाया है।
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मेरे साथ भी हुआ था अन्याय पर कोई नहीं करता बात
भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज सैयद किरमानी ने भी साहा को टीम से बाहर किये जाने पर बात करते हुए कहा कि उन्हें भी टीम से गलत तरीके से बाहर किया गया था, वो भी तब जब उनके अंदर भारत के लिये खेलने की आग बरकरार थी। उल्लेखनीय है कि किरमानी 1983 में भारत के लिये विश्वकप जीतने वाली टीम का हिस्सा था, उन्होंने खुलासा किया कि भारत का बेस्ट विकेटकीपर होने के बावजूद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया, खास तौर से तब जब विकेटकीपिंग के लिये कोई प्रतिस्पर्धा नहीं थी।
स्पोर्टसकीड़ा को दिये गये एक इंटरव्यू में किरमानी ने कहा,'साहा के आसपास बहुत सारा कॉम्पिटिशन है, कई सारे युवा प्लेयर्स हैं जो कि आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन कर के आ रहे हैं। उसका उदास होना बनता है, लेकिन हर क्रिकेटर को इस उतार-चढ़ाव से होकर गुजरना होता है, है न। मेरे साथ भी अन्याय हुआ था लेकिन कोई उसके बारे में बात नहीं करता है।'

मेरे बारे में बुरा भला लिखते थे पत्रकार
पूर्व चयनकर्ता ने आगे बात करते हुए बताया कि कई मौकों पर पत्रकारों ने उनके बारे में झूठे आर्टिकल लिखे, जिसके बारे में कोई क्रॉस चेक नहीं करना चाहता था। किरमानी ने अपना आखिरी वनडे और टेस्ट भारत के लिये 1986 में खेला था, लेकिन इसके साथ ही उनका करियर नीचे की तरफ जाने लगा।
उन्होंने कहा,'मुझे नहीं पता, मैं उस वक्त अपने करियर के बेहतरीन स्तर पर था, लेकिन उसके बावजूद मुझे टेस्ट और वनडे टीम से बिना गलती के बाहर कर दिया गया। उस वक्त कोई प्रतिस्पर्धा भी नहीं थी। मैंने करीब 88 टेस्ट मैच खेले थे और कई बार भारत को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकाला था। क्या आप जानते हैं कि मेरे बारे में अखबार में गलत खबरें छापी गई थी जिसमें कहा जा रहा था कि मैं खराब प्रदर्शन कर रहा था। स्लिप में कोई और कैच छोड़ता था लेकिन वो मेरी फोटो छाप कर कहते थे कि कैच छोड़ दिया या स्टंपिंग मिस कर दी।'

मेरे खुद के राज्य ने भी टीम से बाहर निकाला
किरमानी ने आगे बात करते हुए कहा कि मैं हमेशा से एक फाइटर रहा हूं। मेरे खुद के राज्य कर्नाटक ने मुझे टीम से उस वक्त बाहर निकाल दिया था जब मैं भारतीय टीम में वापसी करने के लिये उसका सहारा चाहता था। यही वजह थी कि मुझे रेलवेज की टीम के साथ जाना पड़ा। जब में रेलवे के लिये जा रहा था तो कर्नाटक क्रिकेट संघ के सचिव ने मुझसे कहा कि तो अब तुम रेलवेज से खेलने जा रहे हो, चलो देखते हैं कि आप वहां पर कैसा प्रदर्शन करते हैं। क्या ये कोई तरीका है देश के लिये विश्वकप जीतने वाली टीम के खिलाड़ी से बात करने का।












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