चोट के बावजूद खेलने वाले 3 भारतीय शेर, दर्द से कराहते रहे लेकिन मैदान छोड़कर नहीं भागे
टेस्ट क्रिकेट असली गेम होता है लेकिन इसमें हिस्सा लेते हुए कई बार रास्ता मुश्किल हो जाता है। चोट के कारण मैच के बीच में बाहर हो जाना, बैटिंग या गेंदबाजी से हट जाना आदि चीजें देखने को मिलती है। भारत के भी कई खिलाड़ियों के साथ ऐसा कुछ हुआ है।
इंटरनेशनल क्रिकेट में चोट के बावजूद कई खिलाड़ियों ने टीम को प्राथमिकता में रखते हुए खेलने का फैसला लिया है। उनमें भारत के भी कुछ खिलाड़ी हैं, जो अपनी चोट और दर्द को भूलकर खेलने के लिए मैदान पर उतर गए। ऐसे तीन खिलाड़ियों के बारे यहां जिक्र किया गया है, जो टेस्ट क्रिकेट में चोट के बाद भी खेले।

अनिल कुंबले
इस सूची में पहला नाम महान भारतीय लेग स्पिनर अनिल कुंबले का आता है, जो वेस्टइंडीज के खिलाफ एंटीगा में टेस्ट खेल रहे थे। यह मैच साल 2002 में हो रहा था। भारत की पहली पारी के दौरान कुंबले बैटिंग कर रहे थे और एक तेज गेंद उछलकर उनके हेलमेट पर जाकर लगी। कुंबले का जबड़ा टूट गया था और खून निकल आया था। इसके बाद टूटे जबड़े पर पट्टी बांधकर वह फील्डिंग करने के लिए आए और गेंदबाजी करते हुए ब्रायन लारा को आउट कर दिया, यह मुकाबला ड्रॉ रहा था।
हनुमा विहारी
साल 2021 में भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया दौरे पर सिडनी टेस्ट खेल रही थी, उस समय हनुमा विहारी हेमस्ट्रिंग इंजरी से जूझ रहे थे लेकिन दूसरी पारी में बैटिंग करना जारी रखा। उन्होंने कुल 161 गेंदों का सामना कर 23 रन बनाए। गेंदों को उन्होंने शरीर पर भी खाया लेकिन मुकाबला ड्रॉ करा दिया।
ऋषभ पंत
भारतीय टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने 2025 में इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर टेस्ट मैच में पांव की टूटी उंगली के बावजूद खेलने का फैसला लिया। पहले दिन जूते पर लगने के कारण वह रिटायर्ड हर्ट हो गए और दूसरे दिन कुछ बल्लेबाजों के आउट होने पर फिर से खेलने के लिए आ गए और फिफ्टी जमा दी। उन्होंने आर्चर जैसे खूंखार गेंदबाज को छक्का जमाया। दर्द के बाद भी पंत ने टीम को सपोर्ट दिया।












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