वीरभद्र पर गिरी ED की गाज, फार्महाउस किया अटैच
एक ओर भाजपा ने वीरभद्र के खिलाफ आक्रामक तेवर अपनाये है,वहीं जांच एजेंसियों की कार्रवाई भी संकट बढ़ा रही हैं।
शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की मुसीबतें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। दिल्ली की अदालत के झटके के बाद सीबीआई की कार्रवाई के बाद अब प्रर्वतन निदेशालय ने उन पर शिकंजा कस दिया है।
वीरभद्र सिंह इन दिनों अपनी आंख के ईलाज के लिये चेन्नई प्रवास पर हैं, वहीं सोमवार को प्रर्वतन निदेशालय ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे और बेटी की कंपनी के नाम दिल्ली स्थित महरौली वाले फार्म हाउस पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उसे अटैच कर दिया है। जिससे एकाएक फिर मामला गरमा गया है।

जिससे उनकी मुशीकलें बढ़ती जा रही हैं। एक ओर भाजपा उनके खिलाफ आक्रामक तेवर अपनाये है,वहीं जांच एजेंसियों की कार्रवाई भी संकट बढ़ा रही हैं।
दरअसल यह फार्म हाउस साढ़े छह करोड़ रुपए में खरीदा गया था। लेकिन इसकी बाजार में कीमत 27 करोड़ बताई जा रही है। वर्ष 2011 में खरीदे गए इस फार्म के लिए लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपए नकद दिए गए थे। बेचने वाले व्यक्ति ने खुद आयकर विभाग को दिए बयान में इसका खुलासा किया था। इस बयान की प्रति सीबीआई के पास मौजूद है। इसे सोमवार सुबह ही अटैच किया गया है।
तब खरीदा था ये फॉर्महाउस
बताया जा रहा है कि महरौली के डेरा मंडी गांव के लिंगायस सोसाइटी में मैपल डेस्टीनेशन एंड ड्रीमलैंड प्राइवेट लिमिटेड ने अगस्त 2011 में 6.61 करोड़ रुपए में एक फार्म खरीदा था। यह कंपनी वीरभद्र सिंह के बेटे और बेटी के नाम है, लेकिन फर्म सिर्फ कागजों पर है।

फार्म हाउस बेचने वाले पिचेश्वर गड्डे ने अपने बयान में बताया कि इसके लिए उसे 5.41 करोड़ रुपए नकद दिए गए थे और 1.20 करोड़ रुपए की रजिस्ट्री की गई थी। पिचेश्वर के अनुसार नकद रकम वीरभद्र सिंह के करीबी वकामुल्ला चंद्रशेखर ने दिए थे।
इसके साथ ही आयकर विभाग ने पिचेश्वर को 2008 में यह फार्म हाउस बेचने वाली जया शर्मा का भी बयान दर्ज किया है। जया शर्मा ने बताया है कि उसने यह फार्म हाउस 3.15 करोड़ में बेचा था, जिसमें केवल 1.05 करोड़ की रजिस्ट्री की गई थी।












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